बदलती दुनिया में प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण पर चर्चा

17 फ़रवरी 2020

पक्षियों, मछलियों व स्तनपायी जानवरों सहित वन्यजीवों की कई प्रजातियां भोजन व प्रजनन के लिए हर साल अपने ठिकानों से दूर अन्य स्थानों व देशों का रुख़ करती हैं. जलवायु परिवर्तन और जैवविविधता घटने के इस दौर में ऐसी प्रजातियों का ख़याल किस तरह रखा जा सकता है, इसी विषय पर प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण (CMS) के 13वें सम्मेलन, कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज़ यानी कॉप-13 में विचार-विमर्श हो रहा है. ये कॉप-13 सम्मेलन भारत के गुजरात राज्य की राजधानी गांधीनगर में आयोजित हो रहा है.

15 फ़रवरी को शुरू हुआ कॉप-13 सम्मेलन 22 फ़रवरी तक चलेगा और इस बार आयोजन की थीम (Migratory species connect the planet and together we welcome them home) में पृथ्वी को जोड़ कर रखने में इन प्रजातियों की भूमिका और उनका अपने घरों में स्वागत करना है.

प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण के रास्तों पर विचार-विमर्श के लिए विभिन्न देशों के प्रतिनिधि भारत में एकत्र हुए हैं. मौजूदा समय में दुनिया भर की लगभग दस लाख प्रजातियाँ विलुप्त होने के कगार पर हैं. 

सीएमएस की कार्यकारी सचिव एमी फ़्रैन्कल ने कहा, “कॉप-13 वन्यजीवन संरक्षण के एक महत्वपूर्ण मुक़ाम पर हो रही है. प्रजातियों की संख्या में गिरावट आ रही है और पर्यावास ख़त्म होते जा रहे हैं.”

“इस सम्मेलन से ऐसी कार्रवाई को मूर्त रूप देने में मदद मिलेगी जिसकी प्रवासी प्रजातियों के बेहतर संरक्षण के लिए ज़रूरत है और जिसे संभव बनाने के लिए बहुपक्षीय सहयोग पर निर्भरता है.”

प्रवासी प्रजातियों से मानवता अनेक प्रकार से लाभान्वित होती है. उदाहरणस्वरूप, प्रवासी जीव परागण और बीजों के बिखराव से पर्यटन क्षेत्र तक उनके कई फ़ायदे हैं.

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कॉप-13 को दिए अपने भाषण में कहा, “ ये प्रजातियाँ बिना पासपोर्ट या वीज़ा के एक से दूसरे देश में घूमती हैं, मगर शांति व समृद्धि की संदेशवाहक हैं. उनकी रक्षा करना हमारा दायित्व है.”

Photo by IISD/ENB | Sean Wu
प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण (सीएमएस) को लेकर 13वां कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज़ यानी कॉप-13, भारत के गुजरात राज्य की राजधानी गांधीनगर में आयोजित किया जा रहा है.

प्रवासी वन्यजीवों की मुश्किलें

लेकिन गर्म होती धरती और चरम मौसम की घटनाएँ बढ़ने से प्रवासी जीवों और उनके फलने-फूलने के लिए अहम पारिस्थितिकी तंत्रों पर भारी असर हो रहा है.

बैठक में प्रतिनिधि इस बात पर भी विचार करेंगे कि प्रवासी प्रजातियों पर सड़क, रेल और अन्य प्रकार के बुनियादी ढांचों के निर्माण से होने वाले प्रभाव को किस तरह कम किया जा सकता है.

पक्षियों व अन्य पशुओं के हताहत होने के जोखिम को कम करने पर मुख्य ध्यान केंद्रित किया जा रहा है. इस संबंध में कुछ दिशानिर्देश भी जारी किए जा सकते हैं.

जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते के अनुरूप औद्योगिक काल से पहले की तुलना में वैश्विक तापमान में वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस से कम रखने के लिए सदस्य देश प्रयासरत हैं.

साथ ही जैवविविधता और प्रवासी प्रजातियों को राष्ट्रीय नीतियों में शामिल करने और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के प्रयास होंगे जिसे वन्यजीवों के लिए अनुकूल माना जाता है.

इसके अलावा ग़ैरक़ानूनी ढंग से वन्यजीवों की हत्या करने व प्रवासी पक्षियों के अवैध व्यापार को रोकने के लिए मज़बूत प्रयासों का ख़ाका तैयार करने और जंगली समुद्री मीट के लिए लक्षित कार्रवाई पर चर्चा होगी.

प्रकृति के लिए अहम साल

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ने वर्ष 2020 को प्रकृति के लिए सुपर-साल (Super year) क़रार दिया गया है.

इस साल होने वाले आयोजनों में जून 2020 में महासागरों पर होने वाला ‘महासागर सम्मेलन’, सितंबर में प्रकृति पर ‘प्रकृति सम्मेलन’ और साल के अंत में संयुक्त राष्ट्र जैवविविधता सम्मेलन प्रमुख हैं.

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के प्रमुख जॉयस म्यूसा ने बताया, “एक ऐसे समय जब हम प्रजातियों के खोने के अभूतपूर्व संकट का सामना कर रहे हैं, वर्ष 2020 एक महत्वपूर्ण साल है - प्रजातियों के संरक्षण के लिए कार्रवाई का स्तर बढ़ाने और टिकाऊ विकास लक्ष्यों की दिशा में अर्थपूर्ण प्रगति के लिए." 

"हमें हर एक अवसर का इस्तेमाल करना है और सीएमएस कॉप-13 पृथ्वी पर जैवविविधिता के फलने-फूलने के लिए एक बेहद अहम पड़ाव है.”

प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण (Convention on the Conservation of Migratory Species - CMS) संयुक्त राष्ट्र की एक पर्यावरणीय संधि है जो ऐसे जीवों को संरक्षण प्रदान करने वाली एकमात्र वैश्विक संधि है.

इसमें दो परिशिष्ट (Appendices) शामिल हैं: एक लुप्तप्राय: प्रवासी प्रजातियों पर केंद्रित है जबकि दूसरे में ऐसे वन्यजीवों को जगह मिली है जिनके लिए पर्याप्त सरंक्षण सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की आवश्यकता है.

इस बैठक में एक नई रिपोर्ट जारी की जाएगी जो दर्शाती है कि कुछ सफलताओं के बावजूद संधि में लिखित अधिकांश प्रवासी प्रजातियों के पक्षियों की संख्या कम हो रही है.

संरक्षण की सीएमएस सूची में दस नई प्रजातियों को इस संधि में शामिल किए जाने की उम्मीद है जिनमें एशियन एलिफ़ेंट, जैगुआर और ग्रेट इंडियन बस्टर्ड हैं. इनमें से इंडियन हबस्टर्ड कॉप-13 सम्मेलन का प्रतीक-चिन्ह भी है.

 

♦ समाचार अपडेट रोज़ाना सीधे अपने इनबॉक्स में पाने के लिए यहाँ किसी विषय को सब्सक्राइब करें
♦ अपनी मोबाइल डिवाइस में यूएन समाचार का ऐप डाउनलोड करें – आईफ़ोन iOS या एंड्रॉयड