इसराइल-फ़लस्तीन विवाद के निपटारे के लिए संवाद पर बल

11 फ़रवरी 2020

मध्य पूर्व क्षेत्र में बढ़ता तनाव और अस्थिर हालात इसराइल और फ़लस्तीन के बीच दशकों पुराने विवाद को जल्द सुलझाने और शांति वार्ता की मेज़ पर जल्द लौटने की अहमियत को रेखांकित करते हैं. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प द्वारा इसराइल-फ़लस्तीन विवाद के निपटारे के लिए सुझाई गई योजना पर मंगलवार को सुरक्षा परिषद में चर्चा के दौरान यह बात कही है.

सुरक्षा परिषद चैम्बर में फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास और इसराइली दूत की उपस्थिति में यूएन प्रमुख ने दो-राष्ट्र समाधान के लिए संयुक्त राष्ट्र का समर्थन दोहराया. “यह समय संवाद, मेल-मिलाप, तर्क के लिए है.”

“मैं इसराइली और फ़लस्तीनी नेताओं से आग्रह करता हूँ कि न्यायसंगत व स्थाई शांति के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए ज़रूरी इच्छाशक्ति का प्रदर्शन करें, और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इसका समर्थन करना होगा.”

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प ने इसराइल और फ़लस्तीन के बीच विवाद सुलझाने के लिए कुछ ही सप्ताह पहले एक योजना पेश की है.

इसके तहत पश्चिमी तट और पूर्वी येरूशलम में इसराइली बस्तियों को क़ानूनी मान्यता दिए जाने के अलावा पश्चिमी तट के कुछ इलाक़ों पर इसराइल द्वारा क़ब्ज़ा किए जाने का उल्लेख है.

अन्य प्रस्तावों के अलावा येरूशलम को इसराइल की अविभाजित राजधानी बनाने का भी सुझाव है.

शांति प्रक्रिया आगे बढ़ाने का समय

मध्य पूर्व शांति प्रक्रिया में यूएन के विशेष समन्वयक निकोलाय म्लादेनॉफ़ ने बताया कि इस प्रस्तावित योजना को फ़लस्तीनी सरकार, लीग ऑफ़ अरब स्टेट्स, इस्लामिक सहयोग संगठन और अफ़्रीकी संघ के कुछ सदस्य देशों ने ख़ारिज कर दिया है.

“आज उन प्रस्तावों को सुनने का समय है कि इस प्रक्रिया को आगे किस तरह बढ़ाया जाए और आपसी सहमति के साथ मध्यस्थता के फ़्रेमवर्क के रास्ते पर लौटा जाए जिससे अर्थपूर्ण वार्ता शुरू हो सके.”

उनके मुताबिक राजनैतिक नेतृत्व प्रदर्शित करते हुए हालात पर विचार कर सभी पक्षों को वार्ता की मेज़ पर वापस लाना होगा.

“यह समय इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए प्रस्तावों को सुनने का है और आम सहमति के साथ मध्यस्थता के प्रयासों तक लौटने का भी, ताकि ठोस बातचीत हो सके. ”

उन्होंने कहा कि यह योजना पेश किए जाने के बाद क़ाबिज़ पश्चिमी तट और ग़ाज़ा के इलाक़ों में हिंसक प्रतिक्रिया देखने को मिली है

“जिस तरह एकतरफ़ा क़दमों से विवाद का निपटारा नहीं होगा, इन प्रस्तावों को ख़ारिज करने वालों को भी हिंसा का सहारा नहीं लेना चाहिए. इस नाज़ुक समय में यह सबसे ख़राब जवाब होगा.”

उनके मुताबिक राजनैतिक नेतृत्व प्रदर्शित करते हुए हालात पर विचार कर सभी पक्षों को वार्ता की मेज़ पर वापस लाना होगा.

फ़लस्तीन ने योजना ख़ारिज की

फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने सुरक्षा परिषद को बताया कि अमेरिकी योजना से क्षेत्र में शांति या स्थिरता नहीं आएगी क्योंकि इसमें फ़लस्तीनियों के अधिकारों को अमान्य घोषित कर दिया गया है, जिनमें आत्म-निर्णय का अधिकार भी शामिल है.

इससे एक ऐसे फ़लस्तीनी राष्ट्र का निर्माण होगा जो असल में ‘स्विस चीज़’ की तरह होगा क्योंकि उसमें इसराइली बस्तियां बहुतायत में होंगी.

“मैं पुरज़ोर ढंग से कहना चाहता हूं कि यह योजना, या इस योजना के किसी भी हिस्से को वार्ता के लिए अंतरराष्ट्रीय संदर्भ के तौर पर इस्तेमाल में नहीं लाया जाना चाहिए.”

उन्होंने इस प्रस्ताव को इसराइल और अमेरिका की एक ऐसी योजना बताया जिसके ज़रिए फ़लस्तीन के सवाल को ख़त्म करने का प्रयास किया जा रहा है.

“हमने इसे इसलिए ख़ारिज कर दिया क्योंकि इसके तहत पूर्वी येरूशलम पर फ़लस्तीन की संप्रभुता लागू नहीं होगी. इस योजना को ख़ारिज करने का हमारे लिए यह पर्याप्त आधार है.”

वहीं इसराइल के दूत डैनी डैनन ने कहा कि अमेरिकी योजना लंबे समय से चले आ रहे इस विवाद का हल ढूंढने के लिए एक समझदार कोशिश है क्योंकि इससे पहले के प्रस्ताव विफल रहे हैं.

“यह योजना इन मायनों में अलग है कि इसमें पुरानी योजनाओं के अमान्य सिद्धान्तों को स्वीकार करने से मना कर दिया गया है. यह योजना यह स्वीकार करने से ख़ारिज करती है कि इस विवाद को सुलझाने का एकमात्र रास्ता वो फ़ार्मूला है जो पिछले 70 सालों से ज़्यादा समय से विफल रहा है.”

“इस योजना में यथार्थवादी रास्ता निकालने की आवश्यकता दिखती है जिसमें दोनों पक्षों की चिंताओं को दूर करने के लिए अभिनव विकल्पों सुझाने से डरा नहीं गया है. जटिल समस्या को सुलझाने के लिए यह समझदारी भरा तरीक़ा प्रदर्शित करती है.”

यूएन दूत म्लादेनॉफ़ ने उम्मीद जताई कि मध्यस्थता के ज़रिए विवाद का रास्ता निकालने और दोनों पक्षों में रचनात्मक बातचीत के लिए सदस्य देश यूएन महासचिव की अपील का समर्थन करेंगे.

 

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