कोरोनावायरस पर 'जल्द से जल्द क़ाबू पाना ज़रूरी'

10 फ़रवरी 2020

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टैड्रोस एडेहनॉम घेबरेयेसस ने सोमवार को एक अपील जारी कर कहा है कि सरकारों द्वारा कोरोनावायरस के फैलाव को सीमित रखने के प्रयास प्राथमिकता के तौर पर जारी रहने चाहिए. चीन के वूहान शहर में पहली बार 31 दिसंबर 2019 को इस वायरस के संक्रमण का पता चला था और अब तक चीन सहित अन्य देशों में इसके संक्रमण के 40 हज़ार से ज़्यादा मामलों की पुष्टि हो चुकी है और 900 से अधिक लोगों की मौत हुई है.

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के प्रमुख ने सचेत किया है कि भले ही अभी ऐसा लग रहा हो कि श्वसन तंत्र पर असर डालने वाला यह वायरस धीमी रफ़्तार से फैल रहा है, आने वाले दिनों में इसकी गति तेज़ हो सकती है.  

“कम संख्या में ऐसे मामलों का पता चलना एक ऐसी चिंगारी भी हो सकती है जो आगे चलकर एक बड़ी आग बन जाए, लेकिन फ़िलहाल अभी यह एक चिंगारी है. हमारा उद्देश्य इस पर क़ाबू पाना है, हम सभी देशों से अपील करते हैं कि इस समयावधि का इस्तेमाल करें ताकि एक बड़ी आग को फैलने से रोका जा सके.”

हाल के दिनों में कोरोनावायरस संक्रमण के कुछ ऐसे मामलों का भी पता चला जिनमें संक्रमित व्यक्तियों ने चीन की यात्रा नहीं की थी, इस स्थिति को उन्होंने “हिमखंड की नोक” को छूने जैसा क़रार दिया दिया है जिससे चिंता बढ़ गई है.

सोमवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बताया कि चीन में कोरोनावायरस के 40 हज़ार 235 मामलों की पुष्टि हो चुकी है और 909 लोगों की मौत हुई है.

चीन से बाहर 24 देशों में 319 मामले सामने आए हैं और एक व्यक्ति की मौत हुई है. फ़्रांस और ब्रिटेन में पिछले दो दिनों में नए संक्रमणों का पता चला है.

पैटर्न में बदलाव नहीं

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी प्रमुख ने बताया कि इस वायरस के संक्रमण के के तरीक़े में अभी कोई बदलाव देखने को नहीं मिला है. 99 फ़ीसदी से ज़्यादा मामले चीन में ही सीमित हैं और अधिकतर मरीज़ों में सामान्य लक्षण दिखाई दिए, लेकिन दो प्रतिशत मामलों में यह घातक साबित हुआ है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन में विशेषज्ञ डॉक्टर सिल्वी ब्रिएन्ड ने बताया कि क़रीब 80 प्रतिशत मामलों में मरीज़ों में लक्षण सामान्य थे, 15 फ़ीसदी मामलों में गंभीर थे जिन्हें न्यूमोनिया  हुआ और तीन से पांच प्रतिशत मरीज़ों को गहन चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता हुई.

एजेंसी प्रमुख ने माना कि अब भी कोरोनावायरस से जुड़े कई सवालों के जवाब नहीं मिले हैं और यह भी स्पष्ट नहीं है कि स्थिति बेहतरी की दिशा में जा रही है या फिर और ज़्यादा ख़राब हो रही है.

इबोला विशेषज्ञ की मदद

इस महामारी से निपटने में अंतरराष्ट्रीय समन्वय प्रयासों के तहत रविवार को यूएन एजेंसी प्रमुख ने बताया था कि अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की एक टीम चीन की राजधानी बेजिंग भेजी जाएगी.

इस टीम का नेतृत्व डॉक्टर ब्रूस एलवर्ड कर रहे हैं जिन्होंने हाल ही में पश्चिम अफ़्रीका में इबोला पर नियंत्रण पाने की कोशिशों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

उनकी मुख्य ज़िम्मेदारी एक बड़े अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ दल के लिए पुख़्ता ज़मीन तैयार करनी है जो बाद में चीन के लिए रवाना होगा.

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा उठाए गए अन्य प्रयासों के तहत 14 देशों में प्रयोगशालाओं को ज़रूरी किटें मुहैया कराई गई हैं ताकि संक्रमण के मामलों का परीक्षण द्वारा तेज़ी से पता लगाया जा सके.

इनमें आइवरी कोस्ट, केनया, ट्यूनीशिया और ज़ाम्बिया शामिल हैं.

कोरोनावायरस संक्रमण के मामलों की जल्द शिनाख़्त इसलिए भी ज़रूरी है क्योंकि इसके और अन्य बीमारियों के लक्षणों में समानता है.

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने अब तक ऐसी 168 प्रयोगशालाओं की पहचान की है जिनके पास कोरोनावायरस के संक्रमण का पता लगाने के लिए सही टैक्नॉलजी है.

ऐसी संभावना है कि कोरोनावायरस संक्रमित व्यक्तियों में 24 दिनों तक कोई लक्षण ना दिखाई दें लेकिन फ़िलहाल संदिग्ध मरीज़ों को 14 दिनों तक एकांतवास में रखे जाने की मौजूदा अवधि में कोई बदलाव नहीं किया गया है.

 

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