सीरिया: हिंसा में फंसी महिलाओं की स्वास्थ्य ज़रूरतों पर संकट

23 जनवरी 2020

पूर्वोत्तर सीरिया के हिंसा प्रभावित इलाक़ों से आम नागरिकों का विस्थापन जारी रहने के  कारण महिलाओं व लड़कियों के लिए सुरक्षित माहौल, शरण और प्रजनन स्वास्थ्य सुविधाओं की तत्काल ज़रूरतें पैदा हो गई हैं. संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) के इस सप्ताह की नवीनतम जानकारी में यह स्थिति सामने आई है.

हिंसक संघर्ष के कारण पूर्वोत्तर इलाक़ों से विस्थापित 70 हज़ार से ज़्यादा लोग अल-हस्काह, अर-राक़्का और अलेप्पो गवर्नरेट में रह रहे हैं. इन घरेलू विस्थापितों में साढ़े 17 हज़ार महिलाएं प्रजनन उम्र की हैं.

तापमान लगातार गिरने की वजह से महिलाओं को विकट परिस्थितियों में रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.

पर्याप्त स्वास्थ्य देखभाल और अन्य सुविधाओं के अभाव में विस्थापित महिलाओं व लड़कियों के लिए लिंग आधारित हिंसा सहने की संभावना बढ़ जाती है.

यूएन जनसंख्या कोष के सीरिया में प्रतिनिधि कैरेन दादुरयन ने बताया, “पूर्वोत्तर सीरिया में महिलाओं व लड़कियों को संरक्षण व प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़े अनेक जोखिमों का सामना करना पड़ता है.

लिंग आधारित हिंसा का जोखिम अल होल जैसे शिविरों में विशेष रूप से ज़्यादा है जहां कैंप में 96 फ़ीसदी संख्या महिलाओं व बच्चों की है.”

आशा पर संकट के बादल

यूएन एजेंसी युद्ध प्रभावित क्षेत्र में महिलाओं व लड़कियों के लिए अपने साझेदार संगठनों की मदद से ‘सुरक्षित स्थलों’ संचालित कर रही है ताकि उन्हें सुरक्षा व सहारा सुनिश्चित किया जा सके.

लिंग आधारित हिंसा के प्रभावों का सामना करने के लिए ज़रूरी चिकित्सा सेवाएँ मुहैया कराई जा रही हैं - इनमें मनोसामाजिक सहारा, जागरूकता प्रसार, वैकल्पिक रोज़गार प्रशिक्षण, मानसिक स्वास्थ्य व प्रजनन संबंधी सेवाएं शामिल हैं.

इन सुरक्षित स्थलों पर नई महिला विस्थापितों को सहायता प्रदान की जाती है. साथ ही मोबाइल टीम व क्लीनिक की व्यवस्था की गई है ताकि जहां ज़रूरत हो वहां पीड़ितों का उपचार किया जा सके.

UNFPA Syria/2019
सीरिया के पूर्वोत्तर इलाक़ों में हिंसा में फँसी महिलाओं व लड़कियों के लिए स्वास्थ्य सेवाएँ कठिन हो गई हैं.

ज़रूरतमंदों के लिए जीवनरेखा

32 वर्षीय असमा अल इस्सा सहित कई महिलाओं को यूएन एजेंसी व साझेदार संगठनों के ज़रिए प्रजनन संबंधी स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिला है.

असमा अल इस्सा पहली बार तीन साल पहले तब विस्थापित हुईं थी जब अल क़ादिसिया गांव में उनका घर मलबे में तब्दील हो गया. अब वह राक़्का गवर्नरेट के अल तपक़्का शहर में रहती हैं जहां उनका घर अब भी बन रहा है.

असमा ने बताया कि वह “प्रसव से पहले बेहद चिंतित थी.” लेकिन यूएन एजेंसी की मदद से चलाए जा रहे एक क्लीनिक से उन्हें मातृत्व संबंधी स्वास्थ्य सुविधाएं मिलीं और प्रसव प्रक्रिया बिना किसी मुश्किल के संपन्न हुई.

क्लीनिक में दाई के तौर पर कार्यरत हनान का कहना है, “असमा ने बिना किसी जटिलता के बच्चे को जन्म दिया. उन्हें और उनके बच्चे के जीवन को बचाना एक बड़ा मिशन है.”

असमा ने यूएन एजेंसी को बताया, वह “एक बच्ची को पाकर बेहद ख़ुश हैं.”

42 हज़ार महिलाओं को सहारा

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष और साझेदार संगठनों ने अक्टूबर 2019 से अब तक, 42 हज़ार से ज़्यादा महिलाओं को प्रजनन स्वास्थ्य सुविधाएँ – सुरक्षित प्रसव, प्रसव पूर्व और उसके बाद स्वास्थ्य देखभाल, परिवार नियोजन – मुहैया कराई हैं.

अक्टूबर 2019 से 15 जनवरी 2020 तक 45 शरण शिविरों और देश के भीतर ही विस्थापित व शरणार्थियों के लिए बनाए गए चार कैंपों में रह रही महिलाओं की मदद की गई.

हिंसा और अशांति के बीच स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच होने से महिलाओं में सुरक्षा के ऐहसास के साथ-साथ आशा का संचार भी हुआ है.

मार्च 2019 से मध्य जनवरी 2020 तक अल-होल शिविर में ही एक लाख 89 हज़ार से ज़्यादा स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं.

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष के सहयोग से सैनिटरी नैपकिन और अन्य आवश्यक सामान उपलब्ध कराए जाने के अलावा साक्षरता पाठ्यक्रम पर भी ध्यान दिया गया है.

सुरक्षा व सुलभता के प्रति समर्पण

रहने का स्थान बार-बार बदलने और लगातार विस्थापन के कारण स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं में अवरोध पैदा होते हैं. ज़रूरतमंदों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ आवश्यक सामग्री का अभाव भी होता है.

यूएन एजेंसी के प्रतिनिधि के मुताबिक “कई दानदाताओं के उदार सहयोग और साझेदारों के समर्पित कार्य से, यूएन जनसंख्या कोष को संवेदनशील परिस्थितियों में रह रहीं महिलाओं व लड़कियों तक जीवनरक्षक और जीवनदायिनी प्रजनन स्वास्थ्य व लिंग अधारित हिंसा सुविधाओं को पहुंचाना संभव हुआ है.”

लेकिन पूर्वोत्तर सीरिया में महिलाओं के लिए चुनौतियां अब भी बरक़रार हैं.

सामूहिक शिविरों में भीड़भाड़, सर्दी के कपड़ों की कमी, और लिंग आधारित हिंसा से समुचित ढंग से निपटने में विशेषज्ञों की कमी इस काम को मुश्किल बना रही हैं.

ऐसे में यूएन एजेंसी ने दानदाताओं और साझेदार संगठनों से समर्थन बनाए रखने की पुकार लगाई है ताकि सीरिया में संकट से प्रभावित महिलाओं व लड़कियों को मदद जारी रखी जा सके.

 

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