'तंबाकू सेवन ऑपरेशन में भी जटिलताएँ पैदा कर सकता है'

20 जनवरी 2020

विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि धूम्रपान किसी मरीज़ की रोग प्रतिरोधी क्षमता को गहराई से प्रभावित करता है और ना सिर्फ़ घाव के भरने में देरी कर सकता है बल्कि घाव में संक्रमण का जोखिम भी बढ़ाता है.

सोमवार को जारी इस रिपोर्ट में कह गया है कि धूम्रपान सेवन करने वाले जो लोग अपना कोई ऑपरेशन होने से चार सप्ताह पहले भी अगर धूम्रपान करना छोड़ देते हैं तो उनमें जटिलताओं का जोखिम कम होता है, साथ ही छह महीने बाद बेहतर नतीजे मिलते हैं. जबकि इसके उलट धूम्रपान करने वालों में ऐसा देखने को नहीं मिलता.

संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी की इस रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि सिर्फ़ एक सिगरेट पीने से ही शरीर की पोषक तत्व मुहैया कराने की क्षमता कम हो जाती है जो किसी ऑपरेशन के बाद घाव भरने के लिए ज़रूरी होते हैं.

ये रिपोर्ट विश्व स्वास्थ्य संगठन, यूनिवर्सिटी ऑफ़ न्यूकासल (ऑस्ट्रेलिया) और वर्ल्ड फ़ैडरेशन ऑफ़ सोसायटीज़ ऑफ़ एनेस्थीज़ियोलोजिस्ट्स ने मिलकर तैयार की है.

रिपोर्ट कहती है कि तंबाकू सेवन करने वालों में किसी ऑपरेशन के बाद जटिलताएं उत्पन्न होने का जोखिम बहुत ज़्यादा होता है जिनमें दिल और फेफड़ों कू कार्यक्षमता का कम होना और संक्रमण व घावों के भरने में देरी होना भी शामिल है.

जबकि इसके उलट जो मरीज़ तंबाकू सेवन छोड़ देते हैं उनमें एनेस्थीज़िया संबंधी जटिलताओं की बहुत कम संभावनाएँ होती हैं, दूसरी तरफ़ जो लोग तंबाकू सेवन या धूम्रपान नहीं छोड़ते हैं उनमें ये जटिलताएँ होने की काफ़ी संभावना होती है.

नए आँकड़ों से पता चलता है कि चार सप्ताहों के बाद तंबाकू सेवन मुक्त हर सप्ताह के दौरान पूरे शरीर में रक्त प्रवाह बहुत सुचारू हो जाता है जो तमाम अंगों को ज़रूरी रक्त पहुँचाता है जिससे स्वास्थ्य 19 फ़ीसदी तक सुधार का परिणाम देखा गया है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन में तंबाकू निषिद्धता के लिए काम कर रहे विभाग के प्रमुख डॉक्टर विनायक प्रसाद का कहना है, “रिपोर्ट में ऐसे सबूत सामने आए हैं कि मामूली या ग़ैर-आपात क़िस्म के ऑपरेशन मरीज़ों को धूम्रपान व तंबाकू सेवन छोड़ने तक स्थगित करने पर काफ़ी लाभ देखे गए हैं. ऐसा करने से मरीज़ का स्वास्थ्य बेहतर होता है.”

ध्यान दिलाने की बात है कि सिगरेट में मौजूद निकोटीन और कार्बन मोनोऑक्साइड मरीज़ के शरीर में ऑक्सीज़न का स्तर कम कर सकता है जिससे ऑपरेशन के बाद दिल संबंधी जटिलताएँ होने का ख़तरा बहुत बढ़ जाता है.

तंबाकू से फेफड़ों को भी भारी नुक़सान होता है जिसके कारण समुचित मात्रा में ऑक्सीज़न का रास्ता अटकता है और ऑपरेशन के बाद फेफड़ों की जटिलताएँ उत्पन्न होने का ख़तरा बढ़ जाता है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन में क्वालिटी ऑफ़ केयर विभाग के संयोजक शम्स सैयद का कहना है, “किसी ऑपरेशन के बाद पैदा होने वाली जटिलताएँ मरीज़ और स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराने वालों – दोनों ही पक्षों पर भारी बोझ डालती हैं.”

उनका ये भी कहना था कि किसी मरीज़ को धूम्रपान छुड़ाने के प्रयासों में प्राईमरी केयर के चिकित्सक, नर्सें और परिवार सभी की भूमिका बहुत अहम है, ख़ासतौर से कोई ऑपरेशन कराने से पहले.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने तमाम देशों का आहवान किया है कि वो धूम्रपान व तंबाकू सेवन छोड़ने में लोगों की मदद करने और इस बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए अपने स्वास्थ्य कार्यक्रमों शैक्षिक अभियान शामिल करें. इस जागरूकता अभियान में बच्चे पैदा करने के लिए महिलाओं का ऑपरेशन भी शामिल हो.

 

 

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