लीबिया: लगातार लड़ाई से बच्चे 'भयंकर व असहनीय' स्थिति में

17 जनवरी 2020

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष – यूनीसेफ़ ने कहा है कि विश्व को लीबिया में लगातार जारी युद्ध के कारण बच्चों की "भंयकर और असहनीय" स्थिति को क़तई स्वीकार नहीं करना चाहिए. इस बीच लीबिया की स्थिति पर एक महत्वपूर्ण सम्मेलन रविवार को जर्मनी में हो रहा है जिसमें यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश के अलावा लीबिया के अहम प्रतिनिधियों के भी शिरकत करने की संभावना है और कोई शांति समझौता भी होने की उम्मीद जताई गई है.

यूनीसेफ़ की कार्यकारी निदेशक हेनरिएटा फ़ोर ने शुक्रवार को जारी एक वक्तव्य में कहा, “लीबिया में कई वर्षों से जारी गृहयुद्ध में लगातार हिंसा व उथल-पुथल के कारण बच्चों को बहुत गंभीर तकलीफ़ों का सामना करना पड़ है – जिनमें शरणार्थी और प्रवासी बच्चे भी शामिल हैं.”

अप्रैल 2019 में राजधानी त्रिपोली के बाहरी इलाक़ों और पश्चिमी क्षेत्र में लड़ाई फिर से भड़कने के बाद हज़ारों बच्चों व आम लोगों के लिए परिस्थितियाँ बहुत ख़राब हो गई हैं. विशेष रूप में घनी आबादी वाले इलाक़ों पर अंधाधुंध हमले होने के कारण सैक़ड़ों लोगों की मौतें हुई हैं.

हेनरिएटा फ़ोर ने कहा कि यूनीसेफ़ को ऐसी ख़बरें मिली हैं कि बहुत से बच्चे अपंग हो गए हैं, बहुत से बच्चों की मौत हो गई और बहुत से बच्चों को लड़ाई में हिस्सा लेने के लिए भर्ती किया जा रहा है.

वर्ष 2011 में तत्कालीन शासक शासक मुअम्मार ग़द्दाफ़ी को सत्ता से हटाए जाने के बाद से ही लीबिया में गहरी अस्थिरता रही है और अर्थव्यवस्था तो लगभग ठह ही हो गई है, हालाँकि देश के पास तेल के विशाल भंडार मौजूद हैं.

ख़लीफ़ हफ़्तार के नेतृत्व वाली स्वयंभू लीबियन नेशनल आर्मी (एलएनए) के कुछ गुटों और त्रिपोली सरकार के बीच लड़ाई में हज़ारों लोगों की मौत हुई है.

लीबियन नेशनल आर्मी विशेष रूप से देश के पूर्वी हिस्से में सक्रिय है जबकि पश्चिमी हिस्से में स्थित त्रिपोली सरकार को संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता प्राप्त है.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश लीबिया की स्थिति पर जर्मनी में रविवार, 19 जनवरी को हो रहे एक सम्मेलन में शिरकत करेंगे.

इस सम्मेलन में यूएन द्वारा मान्यता प्राप्त लीबिया सरकार के प्रधानमंत्री फ़ैय्याज़ अल सराज व लीबियन नेशलन आर्मी के नेता ख़लीफ़ा हफ़्तार के भी शिरकत करने की संभावना है.

इस सम्मेलन में लीबिया में एक स्थाई युद्धविराम पर सहमति होने की उम्मीद की जा रही है.

रविवार को जर्मनी के बर्लिन शहर में होने वाले सम्मेलन के सन्दर्भ में हेनरिएटा फ़ोर ने युद्ध में शामिल पक्षों और उन पर निर्णायक प्रभाव रखने वाले सभी पक्षों से, लीबिया में हर एक बच्चे की बेहतरी की ख़ातिर, एक टिकाऊ शांति समझौते पर, बिना देरी किए, राज़ी होने का आग्रह किया.

व्यापक तबाही

इस बीच, पिछले आठ महीनों के दौरान कम से कम एक लाख 50 हज़ार लोगों को अपने घर छोड़ने को मजबूर होना पड़ा है जिनमें लगभग 90 हज़ार बच्चे हैं. ये सभी अब देश के भीतर ही विस्थापित हैं.

हेनरिएटा फ़ोर ने ध्यान दिलाते हुए ये भी कहा कि ऐसे बुनियादी ढाँचे पर भी हमले किए जा रहे हैं जिन पर बच्चों का वजूद और उनके बेहतर हालात टिके हुए हैं.

यूनीसेफ़ महानिदेशक ने कहा, “लड़ाई में लगभग 30 स्वास्थ्य देखभाल केंद्रों को ध्वस्त कर दिया गया है, जिस कारण 13 को बंद करना पड़ा है.”

उन्होंने क्रोधित अंदाज़ में कहा कि स्कूलों पर हमले और हिंसा की धमकियों व ख़तरों के मद्देनज़र बहुत से स्कूलों को बन्द करना पड़ा है जिससे लगभग दो लाख बच्चों की स्कूली शिक्षा रुक गई है.

इनके अलावा जल आपूर्ति करने वाली प्रणालियों पर हमले किए गए हैं और साफ़-सफ़ाई व कूड़े-कचरे का प्रबंधन करने वाली व्यवस्था बिल्कुल ठप पड़ गई है.

इसके कारण पानी में गन्दगी पैदा हो जाने से होने वाली हैज़ा जैसी बीमारियाँ पनपने का ख़तरा बढ़ गया है.

यूनीसेफ़ अध्यक्ष हेनरिएटा फ़ोर ने कहा, “शहरी इलाक़ों में लगभग 60 हज़ार शरणार्थी बच्चों के परिस्थितियाँ बहुत नाज़ुक हो गई हैं, ख़ासतौर से 15 हज़ार बच्चे ऐसे हैं जो अपने माता-पिता व अभिभावकों से अलग हैं और इन्हें बंदीगृहों में रखा गया है.”

“इन बच्चों को पहले से ही सुरक्षा संबंधी और ज़रूरी बुनियादी सेवाएँ बहुत सीमित रूप में हासिल हैं इसलिए हाल के समय में हुई तेज़ लड़ाई ने इन बच्चों के सामने पहले से दरपेश जोखिम व ख़तरों को और ज़्यादा गंभीर बना दिया है.”

सहायता सुरक्षित बने

यूनीसेफ़ और लीबिया में प्रभावित इलाक़ों में मौजूद उसके साझीदार संगठन बच्चों और उनके परिवारों को स्वास्थ्य देखभाल, पोषण, सुरक्षा, शिक्षा, जल व स्वच्छता सेवाओं तक पहुँच बढ़ाने के लिए सहायता मुहैया करा रहे हैं.

यूनीसेफ़ की कार्यकारी निदेशक हेनरिएटा फ़ोर द्वारा जारी वक्तव्य में कहा गया है, “हम शरणार्थी व प्रवासी बच्चों तक भी सहायता पहुँचाने की कोशिश कर रहे हैं, ये सहायता बन्दीगृहों में रखे गए बच्चों तक भी पहुँचाने की कोशिश की जा रही है.”

“अफ़सोस की बात है कि सिविलियन आबादी, बुनियादी ढाँचे और मानवीय सहायता व चिकित्सा कर्मचारियों पर भी हो रहे हमलों की वजह से मानवीय सहायता के प्रयासों पर प्रतिकूल असर डाल रहे हैं.”

हेनरिएटा फ़ोर ने लीबिया के संघर्ष में शामिल सभी पक्षों का आहवान किया है कि वो बच्चों की हिफ़ाज़त सुनिश्चित करने के लिए हर संभव उपाय करें, युद्ध में इस्तेमाल करने के लिए बच्चों की भर्ती बन्द करें, सिविलियन बुनियादी ढाँचे पर हमले बंद करें. साथ ही बच्चों और अन्य ज़रूरतमन्द लोगों तक ज़रूरी मानवीय सहायता सामग्री सुरक्षित परिस्थितियों में पहुँचाने दें.

यूनीसेफ़ प्रमुख का कहना था, “हम लीबियाई सरकार से भी आग्रह करते हैं कि प्रवासी व शरणार्थी बच्चों को बंदी बनाना बंद किया जाए. साथ ही बंदीगृहों के स्थान पर एक सुरक्षित व सम्मानजनक विकल्प तलाश किया जाए.”

 

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