योरोपीय बच्चों के 'छुपे और हिंसक शोषण' पर यूएन की पहल

14 जनवरी 2020

संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा कि योरोप में हर वर्ष कम से कम साढ़े पाँच करोड़ बच्चों को शारीरिक, यौन, भावनात्मक या मनोवैज्ञानिक हिंसक बर्ताव का सामना करना पड़ता है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के योरोप क्षेत्रीय कार्यालय ने मंगलवार को कहा कि ये संख्या इतनी बड़ी होने के बावजूद ये साबित हो चुका है कि आमने-सामने के  हिंसक दुर्व्यवहार की ख़बरें अक्सर बाहर नहीं आती हैं. 

संगठन ने इस दुर्व्यवहार की ख़बरें बाहर नहीं आने के संदर्भ में अनुमान व्यक्त किया है कि पूरे योरोप में 18 वर्ष से कम उम्र के किशोरों और बच्चों की लगभग 20 करोड़ 40 लाख संख्या का लगभग 9.6 प्रतिशत हिस्सा यौन शोषण का सामना करता है. इस संख्या का लगभग 22.9 प्रतिशत हिस्सा शारीरिक दुराचार और लगभग 29.1 फ़ीसदी हिस्से को भावनात्मक नुक़सान उठाना पड़ता है. इस सबके बावजूद हर वर्ष लगभग 700 बच्चों की हत्या कर दी जाती है.

हिंसा की भारी क़ीमत

संगठन ने कहा है कि बच्चों पर होने वाली हिंसा की भारी क़ीमत होती है. अनुमान के अनुसार इस हिंसा के पीड़ित बच्चों की चिकित्सीय देखभाल पर एक साल में लगभग 581 अरब डॉलर की रक़म ख़र्च होती है.

"लेकिन निजी रूप में व्यक्तियों के स्वास्थ्य पर इस हिंसक बर्ताव का जो विशाल असर होता है उसकी तुलना में वित्तीय क़ीमत कुछ भी नहीं है."

© UNHCR/Achilleas Zavallis
ग्रीस के लेस्बोस द्वीप पर शरणार्थी शिविर में एक बच्चा.

अध्ययनों से पता चलता है कि जिन बच्चों के साथ हिंसक बर्ताव होता है उनमें मानसिक बीमारियाँ होने, उनके शराब के नशे की लत लग जाने और मोटापा बढ़ने का ज़्यादा जोखिम होता है. साथ ही जीवन में आगे चलकर लंबी अवधि की बीमारियाँ होने का भी ज़्यादा ख़तरा होता है.  

विश्व स्वास्थ्य संगठन में ग़ैरसंचारी बीमारी विभाग और स्वास्थ्य को प्रोत्हासित करने वाले विभाग के योरोप क्षेत्र की डायरेक्टर डॉक्टर बेन्ते मिक्कलसन का कहना था, "बच्चों से साथ हिंसक बर्ताव रोंगटे खड़े करने वाला और तकलीफ़ पहुँचाने वाला है."

"बच्चों के साथ हादसे होने की भारी क़ीमत होती है, ना सिर्फ़ पीड़ित बच्चों और उनके वयस्क बनने पर, उनकी ख़ुद की ज़िन्दगी तो दहल ही जाती है, पूरे देश की संपूर्ण सेहत व अर्थव्यवस्था को भी भारी क़ीमत चुकानी पड़ती है."

सुरक्षा क़ानूनों की बढ़त

इस अभिशाप से निपटने के लिए विभिन्न देशों की सरकारें काफ़ी उत्सुक बर्ताव दिखा रही हैं. कुल मिलाकर बच्चों पर होने वाली हिंसा का मुक़ाबला करने के लिए ज़्यादा राजनैतिक इच्छाशक्ति नज़र आ रही है. 66 प्रतिशत क्षेत्रीय देशों ने तमाम परिस्थितियों में शारीरिक दंड को प्रतिबंधित कर दिया है.

हालाँकि ऐसे हालात में सिर्फ़ क़ानून बना देना पूरे समाधान का एक सीमित हिस्सा है. योरोप क्षेत्र में 83 प्रतिशत देशों ने बच्चों के साथ दुर्व्यवहार रोकने के लिए राष्ट्रीय योजनाएँ बना ली हैं लेकिन उनमें से आधी से भी कम योजनाओं के लिए ही पर्याप्त वित्तीय संसाधान उपलब्ध हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन का योरोप - INSPIRE पैकेज सबूत पर आधारित एक ऐसा संसाधन कार्यक्रम है जो उन देशों को मदद देता है जो बच्चों के ख़िलाफ़ हमलों को रोकने और उनका टिकाऊ समाधान निकालने के प्रयास करते हैं. इस पैकेज के तहत सात ऐसी रणनीतियों की शिनाख़्त की गई ह जिनसे हिंसा का स्तर कम करने में मदद मिलती है.

बच्चों के ख़िलाफ़ हिंसा की समाप्ति के लिए वैश्विक पार्टनरशिप - (Global Partnership to End Violence Against Children) में ऐसे देशों की निशानदेही की गई है जिन्होंने बच्चों के ख़िलाफ़ सभी तरह की हिंसा का ख़ात्म करने के लिए पर्याप्त और व्यापक कार्रवाई करने के लिए सार्वजनिक और औपचारिक संकल्प दिखाया है.  ऐसे देशों को पाथफाइंडर का नाम दिया गया है. 

बच्चों के शोषण और उनके साथ दुर्व्यवहार, बच्चों की तस्करी, उनके ख़िलाफ़ किसी भी तरह की हिंसा और उनके उत्पीड़न को रोकना संयुक्त राष्ट्र के टिकाऊ विकास लक्ष्यों में भी प्रमुख है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन योरोप क्षेत्र में बच्चों के ख़िलाफ़ हिंसा की चुनौती का सामना करने और इसका पूरी तरह ख़ात्मा करने के उपाय बढ़ाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन पाथफ़ाइंडर देशों की तरफ़ देखता है कि वो अन्य देशों को सही नेतृत्व व मदद मुहैया कराएँ.

विश्व स्वास्थ्य संगठन का योरोपीय क्षेत्रीय कार्यालय और उसके साझीदार संगठन इस क्षेत्र में हुई प्रगति का जायज़ा ले रहे हैं और इस छुपी हुई सामाजिक समस्या का सामना करने के लिए एस्तोनिया की राजधानी तल्लीन्न में हुई एक कार्यशाला में एक-दूसरे की मदद करने की कोशिश की है.

योरोप - INSPIRE के तकनीकी पैकेज को लागू करने के प्रयासों में शामिल तकनीकी विशेषज्ञों के साथ-साथ सांसदों और स्वास्थ्य, सामाजिक मामलों, शिक्षा और न्याय क्षेत्र के विशेषज्ञों ने इस कार्यशाला में शिरकत की है.

डॉक्टर बेन्ते मिक्कलसन का कहना था, "राजनैतिक इच्छाशक्ति के साथ हम इस चुनौती का सामना कर सकते हैं, समाजों को बच्चों के लिए बेहतर स्थान बनाने की मुहिम में समुदाय का हर एक हिस्सा और सैक्टर ख़ास भूमिका निभा सकता है. लेकिन हमें तेज़ी दिखानी होगी."

 

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