सीरिया को मदद मुहैया कराने की समय सीमा अंतिम क्षणों में बढ़ी

11 जनवरी 2020

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने सीरिया के सीमावर्ती इलाक़ों में रहने वाले लाखों आम नागरिकों को मानवीय सहायता पहुँचाने के संयुक्त राष्ट्र के अभियानों को जारी रखने के लिए शुक्रवार देर शाम मंज़ूरी दे दी. लेकिन सुरक्षा परिषद के कुछ सदस्यों ने ये मानवीय सहायता पहुँचाने के लिए सीमा चौकियों की संख्या और समय दायरा कम किए जाने पर निराशा भी व्यक्त की.

सीरियाई लोगों को मानवीय सहायता पहुँचाने के लिए सीमाएँ खोलने का दायरा बढ़ाने के लिए सुरक्षा परिषद में दिसंबर 2019 में एक मसौदा प्रस्ताव रखा गया था जो रूस द्वारा वीटो किए जाने के बाद पारित नहीं हो सका था. साथ ही रूस द्वारा प्रस्तुत वैकल्पिक प्रस्ताव को समुचित समर्थन हासिल नहीं सका था.

जिसके बाद मानवीय सहायता बढ़ाने के लिए शुक्रवार रात तक नई मंज़ूरी मिलना ज़रूरी था क्योंकि संयुक्त राष्ट्र को मानवीय सहायता उपलब्ध कराने के वास्ते छह साल के लिए मिला मैंडेट की समय सीमा शुक्रवार रात समाप्त हो रही थी और किसी नए प्रस्ताव पर रूस के वीटो की भी आशंका बनी हुई थी.

इस नए प्रस्ताव के समर्थन में 11 वोट पड़े जबकि विपक्ष में एक भी वोट नहीं पड़ा. सुरक्षा परिषद के चार स्थाई सदस्यों – चीन, रूस, अमरीका और ब्रिटेन ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया.

पारित किए गए नए प्रस्ताव में सुरक्षा परिषद ने मौजूदा चार सीमा चौकियों में से सिर्फ़ दो के ज़रिए ही मानवीय सहायता उपलब्ध कराने को मंज़ूरी दी है. इनके नाम हैं – बाब अल सलाम और बाब ल हवा जो तुर्की में हैं.

ये मंज़ूरी छह महीने के लिए मिली है जबकि कोशिश एक वर्ष के लिए हो रही थी. इस प्रस्ताव के ज़रिए जॉर्डन के अल रमथा और इलाक़ के अल यरूबियाह सीमा रास्ते को मंज़ूरी नहीं मिली है.

सीमा पार से मानवीय सहायता 

सीरिया के पश्चिमोत्तर इलाक़े में हाल के समय में अशांति बढ़ने के बाद 12 दिसंबर से लगभग तीन लाख लोग विस्थापित हो गए हैं.

इस बीच, चूँकि नया वर्ष शुरू होने पर सुरक्षा परिषद के नए सदस्य अपना दो साल का कार्यकाल शुरू करेंगे तो स्थाई सदस्यों – अमरीका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस के साथ इस मुद्दे पर बातचीत चल रही थी. पिछले एक सप्तार के दौरान चार बैठकें हुई थीं लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला था. 

समाचारों के अनुसार विवाद का मुख्य मुद्दा अल यरूबियाह सीमा चौकी को खोले जाने के बारे में था. प्रस्ताव के प्रायोजक देशों – जर्मनी, बेल्जियम और कुवैत ने तुर्की की दो सीमा चौकियों और एक इराक़ की सीमा चौकी से होकर मानवीय सहायता उपलब्ध कराए जाने पर ज़ोर दिया था.

लेकिन रूस द्वारा पेश किए गए वैकल्पिक प्रस्ताव में इराक़ की अल यरूबियाह चौकी को बंद करने का प्रस्ताव रखा गया था.

ग़ौरतलब है कि रूस को सीरिया का निकट सहयोगी देश समझा जाता है.

वर्ष 2014 में संयुक्त राष्ट्र को प्रस्ताव संख्या 2165 के ज़रिए सीरिया में लोगों को अन्य देशों से सीमा चौकियों के ज़रिए मानवीय सहायता मुहैया कराने के लिए प्राधिकृत किया गया था. संयुक्त राष्ट्र का ये मैंडेट 2018 में प्रस्ताव संख्या 2449 के ज़रिए बढ़ा दिया गया था. 

शुक्रवार, 10 जनवरी को सुरक्षा परिषद के अनेक सदस्यों ने निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि कमतर प्रावधानों वाला प्रस्ताव पारित किया गया है और इससे बेहतर विकल्प हासिल किया जा सकता था. 

जर्मनी के प्रतिनिधि ने क्रोधित अंदाज़ में कहा कि सीरिया के पूर्वोत्तर इलाक़ों में रहने वाले लगभग 14 लाख लोगों के लिए ये प्रस्ताव “एक भारी मुसीबत के रूप में सामने आया है. जब वो शनिवार को नींद से जागेंगे तो उन्हें ये नहीं मालूम होगा कि ऐसी चिकित्सा सहायता मिल भी पाएगी या नहीं जिसकी उन्हें सख़्त ज़रूरत है.”

अमरीकी राजदूत कैली क्राफ़्त ने इस प्रस्ताव को कमतर क़रार देते हुए कहा कि ये प्रस्ताव लाखों सीरियाई लोगों की ज़रूरतों को नज़रअंदाज़ करता है.

उन्होंने प्रस्ताव को सुरक्षा परिषद की साख़ के लिए एक झटका बताते हुए कहा कि इस मुद्दे पर जो संकट खड़ा किया गया उसके लिए सिर्फ़ रूस ज़िम्मेदार है. 

लेकिन रूस के राजदूत वस्सीली नेबेन्ज़िया का कहना था कि सीरिया में ज़मीनी स्थिति तेज़ी से बदली है और सुरक्षा परिषद द्वारा पारित किसी भी प्रस्ताव में ये स्पष्ट किया जाना बहुत ज़रूरी है कि कोई भी मानवीय सहायता मुहैया कराने में ग्रहण करने वाली और मेज़बान सरकारों की मंज़ूरी ली जाए.

ब्रिटिश राजदूत कैरेन पियर्स ने रूस पर सीरिया के पूर्वोत्तर इलाक़ों में रहने वाले लोगों के जीवन के साथ घटिया खेलने का आरोप लगाया.

उनका कहना था कि सुरक्षा परिषद के पास एक ऐसा प्रस्ताव पारित करने के सिवाय कोई विकल्प नहीं बचा था जो सीरियाई लोगों की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए काफ़ी नहीं है. “मानवीय सहायता कोई ऐसा मुद्दा नहीं है जिसे राजनैतिक सौदेबाज़ी का औज़ार बनाया जाए.”

मदद में तत्काल रुकावट

मानवीय सहायता के लिए अवर महासचिव मार्क लोकॉक और राजनैतिक मामलों की अवर महासचिव रोज़मैरी डी कार्लो ने एक सप्ताह पहले सीरिया के इदलिब में ताज़ा हालात की जानकारी सुरक्षा परिषद के गोपनीय सत्र में पेश की थी.

इस मीटिंग के दौरान सुरक्षा परिषद के अनेक सदस्यों ने इदलिब प्रांत में मानवीय स्थिति बेहद ख़राब होने का हवाला देते हुए सीरिया में सीमा पार से मानवीय सहायता पहुँचाने की अनुमति तुरंत बढ़ाने पर ज़ोर दिया था, इससे पहले कि ये अनुमति शुक्रवार 10 जनवरी 2020 को समाप्त हो रही थी.

मार्क लोकॉक ने नवंबर 2019 में सुरक्षा परिषद के सदस्यों को बताया था कि संयुक्त राष्ट्र पूरे सीरिया में लगभग 40 लाख लोगों को अनेक देशों से सीमा चौकियों के ज़रिए दाख़िल होकर मानवीय सहायता मुहैया कराता है.

उनका कहना था, “अगर अन्य देशों से सीमा चौकियों के ज़रिए दाख़िल होकर मानवीय सहायता मुहैया कराने की इजाज़त नहीं मिलती है तो सीरिया के लाखों लोगों को ये मदद मिलनी तुरंत बंद हो जाएगी.”

यथास्थिति स्वीकार्य नहीं

सुरक्षा परिषद की शुक्रवार, 10 जनवरी 2020 की अहम से पहले रूस के राजदूत वस्सीली नेबेन्ज़िया ने उम्मीद जताई थी कि कोई समाधान निकाल लिया जाएगा, “हम समाधान के बहुत निकट हैं, मगर अभी समाधान तक पहुँचे नहीं हैं.”

उन्होंने कहा था, “हम ये बताना चाहते हैं कि अगर हम एक सीमा चौकी बंद कर देते हैं तो पूर्वोत्तर इलाक़े में मानवीय संकट पैदा हो सकता है, इस बारे में चिंताएँ सही नहीं हैं क्योंकि उस क्षेत्र के लिए मानवीय सहायता सीरिया के भीतर से ही मुहैया कराई जा रही है, काफ़ी लंबे समय से. और ये आगे भी जारी रहेगी.”

रूसी राजदूत का कहना था कि चूँकि ज़मीनी स्थिति में बहुत बदलाव आया है, यथास्थिति स्वीकार्य नहीं हो सकती. “हमें उन सीमा चौकियों को बंद करना होगा जो अब प्रासंगिक नहीं बचे हैं.”

 

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