बांग्लादेश में बांस की खेती को बढ़ावा

2 जनवरी 2020

बांग्लादेश के कॉक्सेस बाज़ार में विशाल शरणार्थी बस्ती की निर्माण परियोजना के लिए 2 करोड़ 40 लाख से अधिक बांसों की कटाई की गई है. अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) के सहयोग से स्थानीय प्रशासन बांसों के लिए देश में एक टिकाऊ बाज़ार को सृजित करने का प्रयास कर रहा है जिससे शरणार्थियों की ज़रूरतों को पूरा करने के साथ-साथ इस क्षेत्र को बांस व्यवसाय के केंद्र के रूप में भी विकसित किया जा सकेगा. 

बांस को पानी और बोरेट्स – प्राकृतिक कीटनाशक - के घोल में सात दिन तक भिगोकर रखा जाता है. बांस के डंडों को इस घोल में भिगो कर रखने से उनकी उम्र एक या दो साल से बढ़कर पांच साल तक हो जाती है.

कुछ दिनों तक बांस को धूप में सुखाने के बाद इन डंडों को पास के रोहिंज्या शरणार्थी शिविरों में ले जाया जाता है जहां इनका इस्तेमाल राहत शिविरों और सार्वजनिक भवनों के निर्माण में किया जाता है.

वर्ष 2019 में एक “बैम्बू ट्रीटमेन्ट फ़ैसिलिटी” का निर्माण कार्य पूरा हुआ जो मानवीय राहत जगत में बांस की ख़रीद का सबसे बड़ा प्रयास है. साथ ही यह एक नई पहल का हिस्सा है जिससे पूर्वी बांग्लादेश का अलग-थलग रहा यह इलाक़ा बांस के अंतरराष्ट्रीय बाजार के केंद्र के रूप में उभर सकता है.

यूएन प्रवासन एजेंसी में सलाहकार केविन रॉवेल ने बताया कि, “बांस एक रोमांचक पदार्थ है. यह पर्यावरण के अनुकूल निर्माण सामग्री और औद्योगिक उत्पाद के रूप में बहुत ध्यान आकर्षित कर रहा है.”

इस आकर्षक उत्पाद की संभावनाओं को पूर्ण रूप से हासिल करने और उसकी गुणवत्ता व स्थिरता में सुधार के लिए यूएन एजेंसी ‘बांग्लादेश वन अनुसंधान संस्थान’ (BFRI) के साथ मिलकर काम कर रही है. 

अनुकूल जलवायु और स्थानीय स्तर पर मांग ज़्यादा होने के कारण कॉक्सेस बाज़ार बांस के लिए एक आदर्श स्थान है. उष्णकटिबंधीय गर्मी, उच्च आर्द्रता और रेतीली मिट्टी कृषकों के लिए आदर्श स्थिति बनाती है.

IOM/Abdullah Al Mashrif
बांग्लादेश में बांस की खेती को प्रोत्साहन दिया जा रहा है.

बांग्लादेश में देशीय बांस की 32 से अधिक प्रजातियां हैं - मियूली और बोराक विशेष रूप से जानी जाती हैं. बोराक प्रजाति महज़ दो महीनों में 65 फ़ीट तक बढ़ सकती है.

वर्ष 2017 में जब लगभग लाखों रोहिंज्या शरणार्थियों के कॉक्सेस बाजार में रहने का प्रबंध करने की ज़रूरत पैदा हुई तो किफ़ायती और मज़बूती के कारण बांस स्वाभाविक विकल्प के रूप में उभरा. 

उसके बाद के सालों में, मानवीय राहत की बढ़ती ज़रूरतों ने आसानी से उपलब्ध होने वाले, सस्ते बांस के लिए एक बाज़ार तैयार किया है. उदाहरण के तौर पर, शरणार्थियों की मदद के लिए दो करोड़ 40 लाख बांस की पैदावार हुई है. 

लेकिन मांग ज़्यादा होने के साथ यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या बांस के खेतों में बहुत जल्दी-जल्दी कटाई हो रही है और स्थानीय आपूर्ति पर बोझ बढ़ रहा है.

बांस के बाज़ार को विकसित करने का प्रयास

एक समय के लिए तो बांस की मांग आपूर्ति से कहीं ज़्यादा हो गई और इसके परिणामस्वरूप कुछ पौधों की कटाई समय से बहुत पहले होने लगी थी.
बांग्लादेश वन अनुसंधान संस्थान के अनुसार देश में 80 प्रतिशत बांस निजी खेतों में उगाया जाता है, यानी कटाई का स्थानीय वनों पर प्रभाव सीमित ही है. 

लेकिन समय से पहले बांस की कटाई का असर एक कमज़ोर उत्पाद के रूप मे सामने आ सकता है, क्योंकि उसके पौधे को अपनी कोशिका संरचना को मज़बूत बनाने के लिए समय चाहिए.

केविन रॉवेल के अनुसार नई फ़सल को नुक़सान से बचाने के लिए फ़सल की कटाई शुष्क मौसम में की जानी चाहिए. 

इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर यूएन एजेंसी एक टिकाऊ आपूर्ति श्रृंखला स्थापित करने के लिए वन अनुसंधान संस्थान के साथ साझेदारी स्थापित की है और इसके तहत किसानों और बांस की ख़रीद प्रक्रिया में शामिल लोगों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है.

प्रशिक्षण सत्रों में प्रतिभागियों को टिकाऊ खेती, बांस की पैदावार और देखभाल के बारे में सिखाया जाता है. साथ ही उनके इलाक़ों के लिए सर्वोत्तम किस्में दिखाई जाती हैं. यह पायलट कार्यक्रम शुरुआती दौर में 30 व्यवसायों पर लक्षित है. 

केविन रॉवेल के मुताबिक़ “बांस इस क्षेत्र की सबसे पुरानी निर्माण सामग्रियों में से एक है - इसलिए एक तरह से हम एक ऐसी चीज़ को पुनर्जीवित कर रहे हैं जो हजारों वर्षों से यहां रही है.” 

इमारतों की निर्माण सामग्री और कप से लेकर कपड़ों तक, पर्यावरण के लिए अनुकूल निर्माण सामग्रियों का अंतरराष्ट्रीय बाज़ार प्रति वर्ष 60 अरब डॉलर आंका गया है. तेज़ी से बढ़ रहे इस बाज़ार पर ध्यान केंद्रित करते हुए और गुणवत्ता को बेहतर बनाकर बांग्लादेश इस क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाने का प्रयास कर रहा है. 

यह लेख पहले यहां प्रकाशित हुआ. 

 

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