नए साल के पहले दिन जन्मेंगे क़रीब चार लाख बच्चे
वैसे तो जनवरी का पहला दिन नए साल का आग़ाज़ है, इसी दिन दुनिया भर में लगभग तीन लाख 92 हज़ार बच्चे अपने जीवन की शुरुआत करेंगे. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने विश्व नेताओं से स्वास्थ्य सेवाओं और स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण में निवेश की पुकार लगाई है ताकि हर नवजात शिशु को बचाया जा सके.
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष की कार्यकारी निदेशक हेनरीएटा फ़ोर ने कहा कि, “एक नए साल की शुरुआत और एक नया दशक हमारी आशाओं और आकांक्षाओं पर चिंतन करने का एक अवसर है. ना सिर्फ हमारे भविष्य के लिए बल्कि उन लोगों के भविष्य के लिए भी जो हमारे बाद आएंगे.”
“जैसे कैलेंडर हर साल जनवरी में बदलता है, वह हमें जीवन की इस यात्रा पर जाने वाले प्रत्येक बच्चे के सामर्थ्य और सभी संभावनाओं की याद दिलाता है - अगर उन्हें इसका मौका दिया जाए.”
अनुमान है कि वर्ष 2020 का पहला बच्चा पैसिफ़िक क्षेत्र में फ़िजी में जन्म लेगा और साल के पहले दिन पैदा होने वाला आख़िरी बच्चा अमेरिका में होगा.
पहले दिन जन्म लेने वाले कुल बच्चों की संख्या का पचास फ़ीसदी आठ देशों में होने का अनुमान है:
1. भारत – 67,385
2. चीन – 46,299
3. नाजीरिया – 26,039
4. पाकिस्तान – 16,787
5. इंनडोनेशिया – 13,020
6. अमेरिका – 10,452
7. कॉंगो लोकतांत्रिक गणराज्य – 10,247
8. इथियोपिया – 8,493
नवजात शिशुओं का स्वास्थ्य चिंता का सबब
जनवरी के पहले दिन बच्चों का जन्म होना शुभ माना जाता है लेकिन दुनिया भर में लाखों नवजात शिशुओं के लिए उनका जन्मदिन शुभ नहीं रहता.
वर्ष 2018 में 25 लाख नवजात शिशुओं ने जन्म के बाद पहले ही महीने में अपनी जान गंवा दी. इनमें से क़रीब एक तिहाई शिशुओं की मौत पैदा होने वाले दिन ही हो गई.
इन बच्चों में अधिकतर की मौत ऐसे कारणों से हुई जिनकी रोकथाम की जा सकती है - जैसे समय से पूर्व जन्म होना, प्रसव के दौरान जटिलताएं और सेप्सिस जैसे संक्रमण.
इसके अलावा हर साल 25 लाख से अधिक बच्चे मृत पैदा होते हैं.
पिछले तीन दशकों में, दुनिया ने बच्चों की जान बचाए जाने में उल्लेखनीय प्रगति देखी है. ऐसे बच्चों की संख्या घट कर आधी रह गई है जिनकी मौत अपने पांचवें जन्मदिन से पहले ही हो जाती है. लेकिन नवजात शिशुओं के लिए प्रगति धीमी रही है.
वर्ष 2018 में पांच साल से कम उम्र के 47 प्रतिशत शिशुओं की मृत्यु पहले महीने में हुई - वर्ष 1990 में यह आंकड़ा 40 प्रतिशत था.
यूनीसेफ़ ने अपनी “Every Child Alive” मुहिम के ज़रिए सही प्रशिक्षण के साथ स्वास्थ्यकर्मियों में तत्काल निवेश के लिए आग्रह किया है जो हर माँ और नवजात शिशु की देखभाल करने के लिए सही दवाओं से लैस हो और गर्भावस्था, प्रसव और जन्म के दौरान जटिलताओं का इलाज कर सकें.
यूएन एजेंसी की कार्यकारी निदेशक हेनरीएटा फ़ोर ने कहा, “बहुत से माताओं और नवजात शिशुओं की देखभाल एक प्रशिक्षित दाई या नर्स द्वारा नहीं की जा रही है और परिणाम विनाशकारी रहा है.”
उनका कहना है कि, “हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि लाखों बच्चे अपने पहले दिन जीवित रहें और फिर इस दशक को भी जी पाएं.”