सब-सहारा अफ़्रीका में भुखमरी का विकराल रूप

31 दिसम्बर 2019

विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) का एक नया विश्लेषण दर्शाता है कि सब-सहारा देशों में भुखमरी से पीड़ित लोगों की संख्या बढ़ रही है और आगामी महीनों में ज़िम्बाब्वे, दक्षिण सूडान, कॉंगो लोकतांत्रिक गणराज्य सहित अन्य देशों में लाखों लोगों का जीवन बचाने के लिए खाद्य सहायता की ज़रूरत होगी.

अफ़्रीका और अन्य क्षेत्रों में इस चुनौती की व्यापकता और जटिलता के कारण यूएन खाद्य कार्यक्रम और अन्य एजेंसियों पर ज़बरदस्त बोझ पड़ेगा.

इन हालात के मद्देनज़र मानवीय राहत कार्यक्रमों को सुचारू ढंग से चलाने और लाखों ज़िंदगियों की रक्षा के लिए दानदाता देशों से समर्थन को अहम बताया गया है.

यूएन एजेंसी के कार्यकारी निदेशक डेविड बीज़ली ने बताया कि, “खाद्य कार्यक्रम बड़ी और जटिल मानवीय चुनौतियों से वर्ष 2020 की शुरुआत में ही कई मोर्चों पर मुक़ाबला कर रहा है. कुछ देशों में हम हिंसक संघर्ष व अस्थिरता देख रहे हैं और चरम जलवायु घटनाएं लोगों को घर, खेत और काम छोड़कर जाने के लिए मजबूर कर रही हैं.”

विश्व खाद्य कार्यक्रम की नई रिपोर्ट, WFP 2020 Global Hotspots Report, में अगले छह महीनों में सब-सहारा अफ़्रीका में गंभीर चुनौतियों को रेखांकित किया गया है.

ज़िम्बाब्वे में हालात को विशेष रूप से चिंताजनक बताया गया है क्योंकि सूखे और आर्थिक मंदी से हालात पहले ही ख़राब हैं और अब देश साल के एक ऐसे दौर में प्रवेश कर रहा है जहां आम तौर पर भोजन की उपलब्धता सामान्य दिनों में भी कम ही होती है.

ज़िम्बाब्वे में भूख से पीड़ित लोगों की संख्या पिछले एक दशक में उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है और हालात को देखते हुए यूएन एजेंसी 40 लाख से ज़्यादा लोगों की मदद के लिए राहत कार्यक्रम को शुरू करने की योजना बना रही है.

हेती में भी स्थिति चिंताजनक है और वहां क़ायम अशांति से अर्थव्यवस्था बदहाल है जिससे भोजन की क़ीमतें लोगों की पहुंच से बाहर हो गई हैं. देश की आबादी के एक तिहाई हिस्से – 37 लाख लोग – को मदद की आवश्यकता है.   

एशिया में, अफ़ग़ानिस्तान भी खाद्य असुरक्षा से पीड़ित है और उसे सूखे की मार झेलनी पड़ रही है जिससे एक करोड़ से ज़्यादा लोग पीड़ित हैं. यमन में एजेंसी ने खाद्य सहायता का दायरा बढ़ाया है और अब एक करोड़ 20 लाख लोगों को मदद दी जा रही है.

इराक़ और लेबनान में स्थिति को ध्यान में रखते हुए एजेंसी सभी हालात का सामना करने के लिए तैयारी में जुटी है.

यूएन एजेंसी का अनुमान है कि नए साल 2020 में 80 से ज़्यादा देशों में राहत अभियानों के संचालन के लिए 10 अरब डॉलर की धनराशि की आवश्यकता होगी.

 

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