बेहतर टीकाकरण और निगरानी से पोलियो पर कसी लगाम

23 दिसम्बर 2019

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि पिछले दो वर्षों के दौरान तीन अफ़्रीकी देशों में पोलियो के नए मामले सामने आने के बाद वहां स्थिति पर क़ाबू पा लिया गया है जिससे इन देशों को फिर पोलियो मुक्त होने का दर्जा प्राप्त हो गया है. यूएन एजेंसी ने उम्मीद जताई है कि अब अफ़्रीका के अन्य क्षेत्रों में पोलियो की रोकथाम की जा सकेगी.

केनया, मोज़ाम्बीक़ और नीजेर ने ‘वैक्सीन डिराइव्ड पोलियो वायरस’ के फैलने पर क़ाबू पा लिया है जिससे पिछले दो वर्षों में 14 बच्चे प्रभावित हुए थे.

अफ़्रीका में जंगली पोलियो वायरस (Wild poliovirus) वर्ष 2016 से अब तक सामने नहीं आया है लेकिन 12 देश ऐसे हैं जहां ‘वैक्सीन डिराइव्ड पोलियो वायरस’ फैल रहा है.  

अफ़्रीकी क्षेत्र में पोलियो की रोकथाम के लिए काम कर रही टीम के समन्वयक डॉक्टर मोदजिरोम न्दोउताबे ने बताया, “इन तीन देशों में बीमारी फैलने से रोक पाना इस बात का सबूत है कि इससे निपटने के लिए हुए प्रयासों, गुणवत्तापूर्ण प्रतिरक्षा अभियानों और सतर्क निगरानी के ज़रिए क्षेत्र में बीमारी फैलने के अन्य मामलों की भी रोकथाम की जा सकती है.”

“हम इस उपलब्धि से ख़ासे उत्साहित हैं और अफ़्रीका से हर प्रकार के पोलियो के उन्मूलन के लिए संकल्बद्ध हैं. यह सरकारों, विश्व स्वास्थ्य संगठन और साझेदारों के संकल्प को प्रदर्शित करता है ताकि दुर्बल बनाने वाले इस वायरस से भावी पीढ़ियों को मुक्त रखना सुनिश्चित किया जा सके.”

पोलिया एक बेहद संक्रामक विषाणुजनित बीमारी है जिससे लकवा भी मार सकता है. आमतौर पर इससे पांच साल की कम उम्र के बच्चे प्रभावित होते हैं.

इसका कोई इलाज नहीं है लेकिन बीमारी की रोकथाम एक सरल वैक्सीन द्वारा की जा सकती है.

पोलियो बीमारी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलती है और संक्रमित मल या फिर दूषित जल और भोजन के संपर्क में आने से फैलती है. वायरस मुंह के रास्ते शरीर में प्रवेश करता है और आंतों तक पहुंच जाता है.

यूएन एजेंसी का कहना है कि ‘वैक्सीन डिराइव्ड पोलियो वायरस’ के मामले यदा-कदा ही देखने को मिलते हैं और वे उन इलाक़ों में सामने आते हैं जहां प्रतिरक्षण प्रणाली कमज़ोर होती है और पर्याप्त साफ़-सफ़ाई का अभाव होता है. इससे रूपान्तरित पोलियो वायरस के संचारित होने का जोखिम बढ़ जाता है.

वैक्सीन डिराइव्ड पोलियो वायरस फैलने से प्रभावित अफ़्रीकी देशों में अंगोला, बेनिन, कैमरून, मध्य अफ़्रीकी गणराज्य, चाड, आइवरी कोस्ट, कॉंगो लोकतांत्रिक गणराज्य, इथियोपिया, घाना, नाईजीरिया, टोगो और ज़ाम्बिया शामिल है

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के मुताबिक़ नियमित टीकाकरण के अभाव, वैक्सीन कवरेज का दायरा सीमित होने या फिर टीके लगवाने से मना करने और दूरदराज़ के क्षेत्रों में वैक्सीन की व्यवस्था ना होने के कारण बीमारी फैलने का जोखिम बना रहता है.

 

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