चौथी कमेटी:अनेक दुनियाओं का एजेंडा

16 दिसम्बर 2019

एक ऐसी टाइमलाइन जो औपनिवेशिक अतीत से होकर वर्तमान तक पहुँचती है, और जो अंतिम सीमाएँ निर्धारित करने के लिए भविष्य में भी दाख़िल होती है, यही टाइमलाइन संयुक्त राष्ट्र महासभा की सर्वाधिक विविध चौथी कमेटी का परिचय निर्धारित करती है. संयुक्त राष्ट्र महासभा की समितियों के बारे में इस विशेष श्रंखला में इस आलेख में प्रस्तुत है चौथी कमेटी का परिचय. ध्यान रहे कि महासभा 193 देशों के प्रतिनिधियों से मिलाकर बनती है और महासभा का कामकाज समितियों के ज़रिए संचालित किया जाता है.

चौथी कमेटी का आधिकारिक नाम है – Special Political and Decolonization Committee  यानी विशेष राजनैतिक और वि-उपनिवेशीकरण कमेटी.   

वैसे तो इस कमेटी का आधिकारिक नाम इसकी ऐतिहासिक भूमिका के बारे में कुछ जानकारी दे देता है, मगर इस कमेटी के सामने आज के दौर में दरपेश मुद्दे बहुत विविधता वाले होते हैं.

बिल्कुल शुरू में तो इस कमेटी को दूसरे विश्व युद्ध के बाद के दौर में वि-उपनिवेशीकरण के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने की ज़िम्मेदारी मिली थी.

कई दशक बाद जब बहुत से औपनिवेशिक देश और क्षेत्र आज़ाद हो गए तो इस कमेटी ने 1990 में विशेष राजनैतिक ज़िम्मेदारियाँ संभाल लीं. इनमें वो क्षेत्र भी शामिल थे जो संयुक्त राष्ट्र की ट्रस्टीशिप काउंसिल की प्रशासनिक देखभाल के तहत थे.

उन क्षेत्रों की सूची में पश्चिमी समोआ, टैंगनयीका, रवांडा-उरूंडी और टोगोलैंड शामिल थे. इनमें से टोगोलैंड को बाद में ब्रिटिश और फ्रेंच प्रशासनों में विभाजित कर दिया गया था.

विशेष राजनैतिक मुद्दों को इसके दायरे में शामिल करने से इस कमेटी को अंतरिक्ष क्षेत्र के शांतिपूर्ण इस्तेमाल में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को शामिल करने की ज़िम्मेदारी भी मिल गई.

साथ ही संयुक्त राष्ट्र के शांतिरक्षा अभियानों, संयुक्त राष्ट्र के विशेष राजनैतिक मिशनों की विस्तृत समीक्षा करना भी इसके कार्यों में शामिल हो गया.

ध्यान रहे कि संयुक्त राष्ट्र के विशेष राजनैतिक मिशनों के तहत इसके वर्दीधारी शांति सैनिक वहाँ मौजूद नहीं होते हैं. इस कमेटी का दायरा इतना बड़ा है कि ये संयुक्त राष्ट्र महासभा के कामकाज में फिर से नई जान फूँकने के तरीक़ों पर भी ग़ौर करती है.  

UN Photo/Yutaka Nagata
चौथी कमेटी की ये मीटिंग नवंबर 1978 की है. इसमें रोडेशिया के अन्दरूनी प्रवास मुद्दे और दक्षिण अफ्रीका पर लगे तेल प्रतिबंधों पर विचार किया गया था. साथ ही दक्षिणी रोडेशिया पर मसौदा पारित हुआ था.

कमेटी को कुछ नई ज़िम्मेदारियाँ मिलने के साथ-साथ इसकी मूल वि-उपनिवेशीकरण की भूमिका भी जारी है.

इससे साफ़ झलकता है कि ये कमेटी अब भी दुनिया भर में बचे औपनिवेशिक क्षेत्रों को स्वतंत्रता दिलाने के लिए संकल्प के साथ काम कर रही है.

पदाधिकारी

चौथी कमेटी आमतौर पर सितंबर में महासभा का वार्षिक उच्च स्तरीय सत्र व चर्चा ख़त्म होने के बाद अक्तूबर के प्रथम सप्ताह में अपना काम शुरू करती है.

ये कमेटी अपनी पहली बैठक में ही अपने पदाधिकारियों का चयन करती है जिनमें एक अध्यक्ष, कुछ उपाध्यक्ष होते हैं. कमेटी की रिपोर्ट तैयार करने की ज़िम्मेदारी एक रैपोर्टेयर पर होती है. कमेटी के कामकाज में मदद के लिए एक सचिवालय भी होता है.  

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 74वें सत्र (2019-2020) के लिए चौथी कमेटी के लिए इराक़ के राजदूत मोहम्मद हुसैन बहर अलुलूम चेयरमैन चुने गए.

कैमरून के अहीद्जो, स्लोवाकिया के पीटर पिंडजाक और ऑस्ट्रिया की आंद्रे बाशेर वायस चेयरपर्सन चुने गए. रिपोर्ट लिखने की ज़िम्मेदारी संभालने वाले रैपोर्टेयर के पद पर ग्वाटेमाला के जुआन एंतोनियो बैनार्ड ऐस्त्रादा की नियुक्ति हुई.

सचिवालय का काम सचिव संगीता शर्मा की देखरेख में हो रहा है.

पहली के बाद चौथी कमेटी!

ये देखने में कुछ अटपटा लगता है मगर संयुक्त राष्ट्र के बहुत से दस्तावेज़ों में चौथी कमेटी प्रथम कमेटी के बाद ही सूचीबद्ध है. ऐतिहासिक रूप से, विशेष राजनैतिक कमेटी को कोई संख्या नहीं दी गई तो उसे प्रथम कमेटी के बाद ही सूचीबद्ध कर दिया जाता था.

UN Photo/Ariana Lindquist
लाइबेरिया के डी मैक्सवैल साह केमाया 73वें सत्र में चौथी कमेटी के चेयरपर्सन थे. अक्टूबर 2018 में कमेटी की एक बैठक का संचालन करते हुए.

विशेष राजनैतिक कमेटी को निरस्त्रीकरण और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर काम करने की ज़िम्मेदारी मिली थी.

1993 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने विशेष राजनैतिक कमेटी को चौथी कमेटी में मिलाने का फ़ैसला किया और ट्रस्टीशिप और वि-उपनिवेशीकरण पर ख़ास ज़ोर रखा गया.

इस विलय के बाद जो कमेटी वजूद में आई उसका नाम रखा गया – “विशेष राजनैतिक और वि-उपनिवेशीकरण कमेटी” और ये कमेटी आधिकारिक रूप में प्रथम कमेटी के बाद दूसरे स्थान पर सूचीबद्ध होती थी.

कमेटी का एजेंडा

वि-उपनिवेशीकरण चौथी कमेटी के एजेंडे के प्रमुख कार्यों में से एक है. ये एजेंडा इतिहास में उस समय तक पहुँचता है जब यूरोपीय शक्तियों ने अमेरिका, अफ्रीका और एशिया में अपने साम्राज्यों का सीमाएँ निर्धारित कर रखी थीं.

अब जबकि योरोपीय ताक़तों की पूर्व औपनिवेशिक कॉलोनियाँ अब स्वतंत्र होकर संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देश बन चुके हैं, अब भी कुछ क्षेत्र संयुक्त राष्ट्र द्वारा ऐसी भौगोलिक इकाई के रूप में परिभाषित हैं जहाँ के लोगों को स्वशासन की सुविधा नहीं है.

ऐसी इकाइयों की सूची को सार्वभौमिक तौर पर मंज़ूरी नहीं मिली है, और इस वर्ष यानी 2019-2020 के सत्र में चौथी समिति अमेरिकन समोआ, एंगुइला, बरमूडा, द ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड, द केयमन आइलैंड, फ्रेंच पॉलीनीसिया, गुआम, माँट्सेरात, न्यू कैलीडोनिया, पितकेयर्न, सेंट हेलेना, टोकेलाऊ, द तुर्क्स और कायकॉस आइलैंड, द वर्जिन आइलैंड और वेस्टर्न सहारा के दर्जे पर भी विचार कर रही है. ज़्यादा जानकारी यहाँ देखी जा सकती है.

UN Photo/Manuel Elias
विशेष राजनैतिक व वि-उपनिवेशीकरण कमेटी (चौथी समिति) की एक रिपोर्ट पर महासभा की प्लेनरी बैठक में एक प्रतिनिधि अपना वोट डालते हुुए.

चौथी कमेटी ग़ैर-स्वशासित क्षेत्रों में आर्थिक व अन्य गतिविधियों पर भी नज़र रखती है और वहाँ रहने वाले लोगों की शिक्षा व ट्रेनिंग सुविधाओं का भी ख़याल रखती है.

साथ ही औपनिवेशिक देशों और वहाँ रहने वाले लोगों को स्वाधीनता प्रदान करने वाले घोषणा-पत्र (Declaration on the Granting of Independence to Colonial Countries and Peoples) को लागू करने का भी प्रबंध करती है.

इन मुद्दों के साथ-साथ चौथी कमेटी फ़लस्तीनी शरणार्थियों की सहायता, उनकी संपत्ति और राजस्व, इसराइल द्वारा क़ब्ज़ा किए हुए फ़लस्तीनी क्षेत्रों में इसराइली यहूदी बस्तियाँ और अन्य गतिविधियों जैसे मुद्दों पर भी चर्चा करती है.

निकट पूर्व क्षेत्र में फ़लस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र की राहत व कार्य एजेंसी (UNRWA) की गतिविधियों व अभियानों पर भी नज़र रखती है.

साल 2018-2019 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने UNRWA की ख़स्ता वित्तीय हालत के बारे में चिंता व्यक्त की थी जो ख़राब होती सामाजिक व आर्थिक और मानवीय परिस्थितियों में बढ़ती ज़रूरतों और ख़र्चों के कारण पैदा हुई.

इसके अलावा चौथी कमेटी बाहरी दुनिया यानी अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण इस्तेमाल के मुद्दे पर भी ग़ौर करती रही है.

कमेटी ने सिफ़ारिश दी है कि जो देश अंतरिक्ष के इस्तेमाल के नियम-क़ानून तय करने वाली संधियों पर दस्तख़त नहीं किए हैं, वो जल्द से जल्द दस्तख़त कर दें और अपने राष्ट्रीय क़ानूनों में इन्हें शामिल करें.

कमेटी ने साथ ही अंतरिक्ष संबंधी व्यापक क्षमताओं वाले देशों से आग्रह भी किया है कि वो अंतरिक्ष में हथियारों की दौड़ शुरू होने से रोकने में मदद करें.

चौथी कमेटी अपनी सिफ़ारिशें मसौदा प्रस्तावों और निर्णयों के रूप में मंज़ूरी के लिए महासभा के सामने पेश करती है. वर्ष 2019-2020 के दौरान 74वें सत्र में चौथी कमेटी द्वारा तैयार प्रस्तावों और निर्णयों के बारे में जानकारी यहाँ देखी जा सकती है.

चौथी कमेटी तक पहुँचने का रास्ता

UN Photo/Ariana Lindquist
2018 में चौथी कमेटी की एक मीटिंक के दौरान दस्तावेज़ों का गट्ठर.

अन्य प्रमुख समितियों की ही तरह चौथी कमेटी भी यूएन पेपर स्मार्ट तकनीक इस्तेमाल करती है. ये एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें संयुक्त राष्ट्र के महत्वपूर्ण दस्तावेज़ों तक प्रतिनिधियों की आसान पहुँच सुनिश्चित की जाती है.

प्रतिनिधियों को कमेटी के बारे में जानकारी, वक्ताओं की सूची, अनुरोध व अन्य संसाधन भी e-deleGATE नामक पोर्टल के ज़रिए उपलब्ध रहती है.

संयुक्त राष्ट्र की दस्तावेज़ प्रणाली प्रणाली में चौथी कमेटी के दस्तावेज़ A/C.4/सत्र संख्या/दस्तावेज़ संख्या के क्रम में उपलब्ध होते हैं.

उदाहरण के लिए A/C.4/74/1 संख्या बताती है कि ये प्रस्ताव संख्या 1 (कोई भी विषय हो सकता है) 74वें सत्र के दौरान जारी हुआ है.

अन्य कमेटियों की ही तरह चौथी कमेटी के सभी दस्तावेज़ भी छह मुख्य भाषाओं में तैयार किए जाते हैं.

चौथी कमेटी की आधिकारिक व खुली बैठकें यूएन वेब टीवी पर दिखाई जाती हैं. चौथी कमेटी के बारे में और ज़्यादा जानकारी यहाँ क्लिक करके हासिल की जा सकती है.

महासभा की छह प्रमुख समितियाँ हैं जो विभिन्न विषयों पर काम करती हैं. उनके बारे ज़्यादा जानकारी यहाँ उपलब्ध है---

प्रथम कमेटी

दूसरी कमेटी

तीसरी कमेटी

 

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