म्याँमार: मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की सुरक्षा की अपील

10 दिसम्बर 2019

म्याँमार में संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत यंगी ली ने कहा है कि रोहिंज्या लोगों पर अत्याचारों के आरोप में हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में नवंबर में गांबिया द्वारा दाख़िल किए गए क़ानूनी मुक़दमे के बाद से ही मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ ऑनलाइन मंचों पर विद्वेष यानी शत्रुता का माहौल बढ़ गया है. यंगी ली ने म्याँमार सरकार और सोशल मीडिया कंपनियों से सभी मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कार्रवाई करने का आग्रह किया है.

 

गांबिया द्वारा दाख़िल मुक़दमें में आरोप लगाया है कि म्याँमार की सेना और सुरक्षा बलों द्वारा साल 2016 व 2017 के दौरान रोहिंज्या लोगों पर अत्याचार किए गए. इसी मुक़दमे की सुनवाई हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में 10 दिसंबर 2019 को शुरू हुई है.

यंगी ली ने मंगलवार को जारी एक वक्तव्य में जारी अपनी अपील में कहा, "मैं म्याँमार देश के सभी अंगों व संस्थानों से आग्रह करती हूँ कि ऐसे किसी भी समूह या व्यक्ति के ख़िलाफ़ बदले की कोई भी कार्रवाई ना होने दी जाए जो न्याय और जवाबदेही के लिए प्रयास कर रहे हैं. "

उन्होंने कहा कि जिन लोगों को निशाना बनाया गया है उनमें मुक्त मुक्त रोहिंज्या गठबंधन (Free Rohingya Coalition) के सदस्य भी शामिल हैं. 

मुक़दमे की सुनवाई शुरू

 रोहिंज्या मुख्य रूप से मुस्लिम बहुल समुदाय है जो बौद्ध बहुल देश म्याँमार के उत्तरी प्रांत राख़ीन में बसता है.

अगस्त 2017 में म्याँमार की सेना द्वारा कथित रूप से दमन की कार्रवाई के बाद छह लाख से भी ज़्यादा रोहिंज्या लोग सुरक्षा की ख़ातिर बांग्लादेश जाने पर मजबूर हुए. रोेहिंज्या लोगों के मानवाधिकारों का बड़े पैमाने उल्लंघन हुआ, उस समय के संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख ने रोहिंज्या के ख़िलाफ़ इस दमनात्मक कार्रवाई को "नस्लीय जनसंहार की सटीक मिसाल" क़रार दिया था.

यंगी ली ने ध्यान दिलाते हुए कहा कि गांबिया ने नवंबर में हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में म्याँमार के ख़िलाफ़ जैनोसाइड कन्वेंशन यानी जनसंहार संधि के तहत ऐतिहासिक अर्ज़ी दाख़िल की थी. ध्यान रहे कि हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय संयुक्त राष्ट्र का प्रमुख वैधानिक अंग है. 

पश्चिम अफ्रीकी देश गांबिया ने इस्लामिक सहयोग संगठन की तरफ़ से ये मुक़दमा अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में दाख़िल किया है.  

इस मुक़दमे की सुनवाई हेग में मंगलवार, 10 दिसंबर को शुरू हुई जिसमें म्याँमार की राजनैतिक हस्ती आंग सान सू ची अपने देश की तरफ़ से पैरवी करने के लिए पहले दिन अदालत में मौजूद रहीं और आगे भी उनकी मौजूदगी संभव है. 

न्यायालय ने म्याँमार व बांग्लादेश के सीमावर्ती इलाक़ों में रोहिंज्या लोगों पर हुए अत्याचारों के सिलसिले में - जनसंहार और मानवता के ख़िलाफ़ अपराधों के आरोपों में पहले ही जाँच के आदेश दे दिए हैं. ये शिकायतें सार्वभौमिक क़ानूनी सिद्धांत के तहत अर्जेंटीना में  दाख़िल की गई थीं.

ध्यान रहे कि ये जाँच गांबिया द्वारा दायर मुक़दमे से अलग है.

सोशल मीडिया पर लगाम लगाने की पुकार

म्याँमार के लिए विशेष दूत यंगी ली ने कहा, "अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में इस ताज़ा घटनाक्रम की घोषणा के बाद मैंने देखा है कि ऑनलाइन मंचों पर शत्रुता से भरी नारेबाज़ी का माहौल बढ़ गया है जिसमें झूठा और विभाजनकारी माहौल बनाया जा रहा है कि या तो हमारे साथ हों या फिर हमारे विरुद्ध हैं."

"म्याँमार के रोहिंज्या समुदाय सहित नस्लीय अल्पसंख्यकों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, महिलाओं व अन्य को निशाना बनाकर सोशल मीडिया पर गाली-गलौज और धमकियों वाले संदेश फैलाए जा रहे हैं. ये संदेश फैलाने का मक़सद नफ़रत और डर का माहौल भड़काना है, और जैसाकि हम जानते हैं, ऐसे माहौल के वास्तव में बहुत भयावह परिणाम हो सकते हैं."

साल 2016 और 2017 में भड़की हिंसा में सोशल मीडिया की भूमिका की ओर ध्यान दिलाते हुए यंगी ली ने म्याँमार सरकार का आहवान किया कि वो हिंसा, भेदभाव और नफ़रत को भड़कने से रोकने के लिए तुरंत और समुचित कार्रवाई करे. 

उन्होंने सोशल मीडिया कंपनियों से भी  मानवाधिकारों की हिफ़ाज़त करने में अपनी ज़िम्मेदारी निभाने का आग्रह किया. साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया कंपनियों से ए सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया कि उन कंपनियों के मंच नफ़रत व हिंसा को भड़काने के लिए इस्तेमाल ना किए जाएँ.

 

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