असमानता की वजह से मानव विकास के रास्ते में गंभीर रुकावट

9 दिसम्बर 2019

दुनिया के कई देशों में हो रहे विरोध प्रदर्शन दर्शाते हैं कि ग़रीबी, भुखमरी और बीमारियों के मोर्चों पर अभूतपूर्व प्रगति के बावजूद कई समाजों को अब भी समुचित विकास का एक लंबा रास्ता तय करना है. संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) की एक नई रिपोर्ट में विश्व में बढ़ती असमानताओं व विकास चुनौतियों को रेखांकित करते हुए हालात बेहतर बनाने के लिए सिफ़ारिशें पेश की गई है. 

यूएनडीपी द्वारा सोमवार को जारी नई रिपोर्ट, “Beyond income, beyond averages, beyond today: inequalities in human development in the 21st Century,” बताती है कि लाखों-करोड़ों लोगों के लिए बुनियादी जीवन स्तर में अंतर तो घट रहा है लेकिन जीवन में फलने-फूलने के लिए उनकी ज़रूरतों में भी बदलाव आ रहा है.

रिपोर्ट के मुताबिक़ मौजूदा दौर में नई प्रकार की असमानताएं जड़ें जमा रही हैं जो मुख्य रूप से शिक्षा, तकनीक और जलवायु परिवर्तन से उपज रही हैं. ज़मीन को हिला कर रख देने वाले ये बदलाव समय रहते नहीं रोके गए तो एक ऐसी विशालकाय दरार के पैर पसारने का ख़तरा बढ़ जाएगा जिसे दुनिया ने औद्योगिक क्रांति के बाद नहीं देखा है.

उदाहरण के तौर पर मानव विकास के क्षेत्र में अग्रणी देशों में फ़िक्स्ड ब्रॉडबैंड के सब्सक्रिप्शन कम मानव विकास वाले देशों की तुलना में 15 गुना तेज़ गति से बढ़ रहे हैं.

यूएनडीपी के प्रशासक एखिम श्टाइनर ने बताया, “कई वजहों से लोग सड़कों पर उतर रहे हैं – टिकटों की क़ीमतें, पैट्रोल के दाम, राजनैतिक आज़ादी की मांगें, निष्पक्षता और न्याय की कोशिश. यह असमानता का एक नया चेहरा है और जैसाकि मानव विकास रिपोर्ट स्पष्ट करती है, असमानता समाधानों से परे नहीं है.”

रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 1990 से अब तक मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) में प्रभावशाली प्रगति देखने को मिली है और सबसे कम विकसित देशों सहित सभी क्षेत्रों को इसका लाभ मिला है. सबसे तेज़ आर्थिक वृद्धि 2000 से 2010 तक देखने को मिली लेकिन उसके बाद से यह रफ़्तार सुस्त हुई है.

UNICEF Patrick Brown
बांग्लादेश के कॉक्स बाज़र में यूनिसेफ के लर्निंग सेंटर में सवाल का जवाब देने के लिए हाथ उठाते बच्चे. (8 जुलाई, 2019)

वर्ष 1990 से 2018 तक कई देशों ने मानव विकास के विषय में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है – उच्च मानव विकास वाले देशों की संख्या 12 से बढ़कर 62 हो गई है जबकि कम मानव विकास वाले देशों की संख्या 62 से कम होकर 36 हो गई है.

वैश्विक स्तर पर एचडीआई रैंकिंग में शीर्ष पांच स्थानों पर ये देश हैं: नॉर्वे, स्विट्ज़रलैंड, आयरलैंड, जर्मनी और हॉंगकॉंग. आख़िरी पायदान पर आने वाले देशों में बुरुंडी, दक्षिण सूडान, चाड, मध्य अफ़्रीकी गणराज्य और निजेर हैं.

रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि असमानता की चुनौती समाधान से परे नहीं है और उससे निपटा जा सकता है लेकिन अगर मौजूदा ढर्रे पर काम चलता रहा तो असमानता को नियंत्रण में लाना आसान नहीं होगा.

शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन स्तर में असमान वितरण देश की प्रगति को प्रभावित करता है. हालात बेहतर बनाने व असमानता की विकराल होती समस्या से निपटने के लिए निम्न सिफ़ारिशें पेश की गई हैं:

  • जन्मकाल से ही असमानता आरंभ होती है, शिक्षा व स्वास्थ्य में अंतर उसे और पैना करते हैं और यह बालिग़ होने तक जारी रह सकता है. इसलिए हालात सुधारने के लिए प्रयास व नीतियां भी जन्म या उससे पहले ही शुरू हो जानी चाहिए जिसके केंद्र में बच्चों की पढ़ाई-लिखाई, स्वास्थ्य व पोषण हों.
  • ऐसे निवेश व्यक्ति के जीवन के उस चरण में विशेष रूप से जारी रहने चाहिए जब वे श्रम बाज़ार में धन कमा रहे हों. महज़ श्रमिकों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए नीतियां पर्याप्त नहीं हैं और बाज़ार में असंतुलन से पार पाने के लिए एंटी-ट्रस्ट सहित अन्य नीतियों पर ध्यान केंद्रित करना होगा.
  • टैक्स को एक व्यापक नीति प्रणाली का हिस्सा होना चाहिए जिसमें स्वास्थ्य और शिक्षा पर सार्वजनिक ख़र्च हो और कार्बन आधारित जीवनशैली के विकल्प तलाश किए जाएँ. समानता सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय टैक्स के नए सिद्धांतों की अहमियत को रेखांकित किया गया है और कॉरपोरेट टैक्स दरों को कम करने की दौड़ में शामिल होने से बचने की बात कही गई है.
  • औसत आँकड़े अक्सर सच्चाई को सही रूप में प्रदर्शित नहीं करते. इसके अलावा असमानता से असरदार ढंग से निपटने के लिए विस्तृत जानकारी की आवश्यकता होती है, विशेषकर ग़रीबी के विविध आयामों से मुक़ाबले और पीछे छूट गए लोगों की सहायता के लिए.
  • भविष्य में असमानताओं का स्वरूप बदल सकता है और जलवायु संकट इसका एक प्रमुख कारण हो सकता है. कार्बन की क़ीमत तय करने वाली नीतियों का ग़लत प्रबंधन हो सकता है. लेकिन कार्बन प्राइसिंग के ज़रिए हासिल होने वाले राजस्व का इस्तेमाल अगर सामाजिक नीतियों के पैकेज के तहत करदाताओं के भले के लिए किया गया तो इससे असमानता को कम करने में मदद मिलेगी.
  • नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता, डिजिटल फ़ाइनेन्स और स्वास्थ्य समाधान दर्शाते हैं कि किस तरह नई तकनीकों और अवसरों का इस्तेमाल व्यापक रूप से जीवन स्तर को बेहतर बनाने में किया जा सकता है. रिपोर्ट के अनुसार तकनीकी क्रांतियों से पहले भी गहरी असमानताएं उभरी हैं और अब आर्टिफ़िशियल इंटैलीजेंस और डिजिटल तकनीकों से भी वैसी ही तस्वीरर उभर रही है.
  • ऐसी स्थिति में सामाजिक संरक्षण की ज़रूरत पर बल दिया गया है जिसके तहत उचित मुआवज़ा सुनिश्चित करने, जीवन-पर्यन्त सीखने में निवेश करने और डिजिटल गतिविधियों को टैक्स के दायरे में लाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहमति अहम होगी. इससे एक नई, सुरक्षित और स्थिर डिजिटल अर्थव्यवस्था का निर्माण करने में मदद मिलेगी, जिससे मानव विकास का मार्ग प्रशस्त होगा.

 

♦ समाचार अपडेट रोज़ाना सीधे अपने इनबॉक्स में पाने के लिए यहाँ किसी विषय को सब्सक्राइब करें
♦ अपनी मोबाइल डिवाइस में यूएन समाचार का ऐप डाउनलोड करें – आईफ़ोन iOS या एंड्रॉयड