यूएन शांतिरक्षा मिशनों के कामकाज व जवाबदेही पर ज़ोर

6 दिसम्बर 2019

संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा अभियानों को सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के अनुरूप बनाने और सभी स्तरों पर कामकाज को ज़्यादा असरदार बनाने के उद्देश्य से न्यूयॉर्क मुख्यालय में शुक्रवार को एक बैठक में विचार-विमर्श हुआ. यूएन शांतिरक्षा मिशनों को बेहतर बनाने के तहत कामकाज का प्रभावी ढंग से मूल्यांकन करने, सूचनाएँ साझा करने की प्रक्रिया में बेहतरी लाने और जवाबदेही तय करने पर ज़ोर दिया जाएगा.

यह बैठक सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2436 के विषय पर थी जिसे सितंबर 2018 में पारित किया गया था.

यूएन प्रमुख ने ध्यान दिलाया कि शांतिरक्षकों और उनके असैनिक सहयोगियों का काम लगातार चुनौतीपूर्ण हो रहा है और इस परिप्रेक्ष्य में उनकी ‘एक्शन फ़ॉर पीसकीपिंग’ पहल उत्कृष्टता बरक़रार रखने के सामूहिक संकल्प को फिर से पुष्ट करती है.

“सभी मिशनों में निष्पादन के आकलन के लिए हमने नई प्रणालियाँ व साधन  शुरू किए हैं – इनमें सैन्य व पुलिस यूनिट के नियमित मूल्यांकन के अलावा एक अस्पताल मूल्यांकन प्रणाली शामिल है.”

“इसके परिणामस्वरूप हम सदस्य देशों के साथ ज़्यादा केंद्रित ढंग से काम कर रहे हैं. कुछ मामलों में हमने आशानुरूप निष्पादन ना करने वाले सैनिकों को वापस भेजा है, साथ ही परामर्शदाताओं व प्रशिक्षण देने वाली टीमें भी तैनात की गई हैं.”

सूचनाएँ साझा करने, ज़रूरी उपकरणों की कमी को पूरा करने, शांतिरक्षकों की सुरक्षा को बेहतर बनाने और यूएन के झंडे तले काम करने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ाने में प्रगति देखने को मिली है.

सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्य अमेरिका ने इस बैठक का आयोजन भारत, पुर्तगाल, सेनेगल, उरूग्वे और वियतनाम के साथ मिलकर किया था. यूएन के शांतिरक्षा बजट में अमेरिका का योगदान 1.7 अरब डॉलर है.

संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की स्थाई प्रतिनिधि कैली क्रॉफ़्ट ने शांतिरक्षा के प्रति अमेरिका के मज़बूत समर्थन को रेखांकित करते हुए जवाबदेही निर्धारित करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया.

उन्होंने कहा कि ख़राब प्रदर्शन से संयुक्त राष्ट्र और शांतिरक्षा में योगदान देने वाले देशों की प्रतिष्ठा को नुक़सान पहुंचता है. “लेकिन इससे भी बड़ी चिंता मानव ज़िंदगियों के लिए जोखिम बढ़ने की है: संयुक्त राष्ट्र पर जिन लोगों की रक्षा का दायित्व है और जिन्हें बचाने के लिए शांतिरक्षक भेजे जाते हैं, उनकी बेहतरी के लिए हमें शांतिरक्षा मिशनों, सैनिकों व असैनिक स्टाफ़ की जवाबदेही तय करनी होगी.”

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई प्रतिनिधि सैयद अकबरूद्दीन ने शांतिरक्षा को बहुपक्षवाद का एक अनूठा नवप्रवर्तन (इनोवेशन) बताया, “वैश्विक एकजुटता को बढ़ावा देने के लिए शांतिरक्षा में व्यापक रूप से भागीदारी होना अहम है लेकिन पेशावर क़ाबिलियत का स्थान कोई नहीं ले सकता.”

निरंतर बेहतरी की संस्कृति का निर्माण

महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने बताया कि जवाबदेही बेहतर बनाने और शांतिरक्षकों द्वारा यौन उत्पीड़न व शोषण को रोकने के लिए हरसंभव प्रयास किया जा रहा है. रोकथाम के लिए मज़बूत क़दम उठाए जाने के अलावा पीड़ितों के अधिकारों के लिए एक पैरोकार की नियुक्ति का भी ज़िक्र किया गया.

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने हालात में लगातार बेहतरी लाने और जवाबदेही की संस्कृति के निर्माण की रफ़्तार तेज़ करने का अनुरोध किया.

सामूहिक प्रयासों के तहत एक दस-सूत्री कार्यक्रम पेश किया गया है जिसके अंतर्गत चुनौतीपूर्ण हालात में काम कर रहे यूएन मिशनों को ज़्यादा से ज़्यादा समर्थन, स्थिति के आकलन, सूचना को हासिल करने व स्थानीय समुदायों व प्रशासनों की ज़रूरतों को समझना शामिल है.

इसके अलावा यूएन की उन देशों के साथ मिलकर काम करने की भी योजना है जो वर्दीधारी कर्मचारियों को शांतिरक्षा मिशनों में भेजता है ताकि प्रदर्शन के मूल्यांकन और जवाबदेही की प्रक्रिया सुव्यवस्थित बनाई जा सके.

हाल के दिनों में संयुक्त राष्ट्र को नक़दी के संकट का भी सामना करना पड़ा है जिसका असर शांतिरक्षा अभियानों पर भी हुआ है.

इसके मद्देनज़र यूएन प्रमुख ने सभी देशों से संगठन को  रक़म आपूर्ति सुनिश्चित करने का आग्रह किया है.

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र शांति अभियान पहले से कहीं ज़्यादा क़िफ़ायती हैं लेकिन निरंतर और पर्याप्त धनराशि के अभाव में उन्हें सुचारू रूप से नहीं चलाया जा सकता.

 

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