विकलांगता सम्बन्धी अधिकारों पर नेतृत्व के लिए तैयार है यूएन

3 दिसम्बर 2019

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि विकलांग व्यक्तियों के अधिकार सुनिश्चित करने के विषय पर यूएन उदाहरण पेश करते हुए नेतृत्व करने के लिए तैयार है. यूएन प्रमुख ने मंगलवार, 3 दिसंबर, को 'विकलांग व्यक्तियों के अंतरराष्ट्रीय दिवस' पर अपने संदेश में कहा है कि विकलांग व्यक्तियों के मानवाधिकारों की रक्षा करना टिकाऊ विकास लक्ष्यों के नज़रिए से भी महत्वपूर्ण है.

यूएन प्रमुख ने जून 2019 में विकलांगता समावेशन रणनीति पेश की थी जिसके माध्यम से संगठन के मानक और प्रदर्शन को ऊपर उठाने का प्रयास किया जा रहा है. यह रणनीति एक ऐसी मज़बूत नींव तैयार करने का वादा करती है जिससे संयुक्त राष्ट्र प्रणाली में विकलांगता समावेशन पर टिकाऊ और कायापलट कर देने वाली प्रगति को संभव बनाया जा सके.

इस रणनीति के ज़रिए यूएन प्रणाली मज़बूती से उस संकल्प को स्पष्ट करती है जिसके तहत विकलांगों के मानवाधिकारों को पूर्ण रूप से सुनिश्चित करना सभी मानवाधिकारों व बुनियादी आज़ादी का अटूट, अविभाज्य और अपरिहार्य हिस्सा माना गया है.   

सुरक्षा परिषद ने पहली बार एक प्रस्ताव पारित किया जो सशस्त्र संघर्षों में विकलांगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समर्पित है. सभी सदस्य देशों ने विकलांगों के अधिकारों पर आधारित संधि पर मुहर लगा दी है.

यूएन महासचिव ने उन सभी देशों से इस संधि पर हस्ताक्षर करने का आग्रह किया है जिन्होंने अभी तक ऐसा नहीं किया है.

विकलांगता और टिकाऊ विकास

इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय दिवस पर हो रहे आयोजनों के केंद्र में विकलांगता के साथ जीवन गुज़ार रहे लोगों के सशक्तिकरण और टिकाऊ विकास के 2030 एजेंडा में संबंध है.

विश्व भर में एक अरब लोग यानी लगभग हर सात में से एक व्यक्ति – किसी ना किसी रूप में विकलांग हैं. इनमें से 80 फ़ीसदी लोग विकासशील देशों में रहते हैं और आधी से ज़्यादा आबादी के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं का इस्तेमाल ख़र्चीला है.

विकलांग के रूप में जीवन जीने वालों को कलंक, भेदभाव, और अज्ञानता का सामना करना पड़ता है और उन्हें सामाजिक सहारा भी नहीं मिल पाता.

इन्हीं कारणों से उनके हिंसा का शिकार बनने का जोखिम ज़्यादा होता है. उदाहरण के तौर पर, सामान्य बच्चों की तुलना में विकलांग बच्चों को चार गुना ज़्यादा हिंसा का अनुभव करना होता है.

टिकाऊ विकास के 2030 एजेंडा कई हिस्सों में विकलांगता के विषय पर ध्यान केंद्रित किया गया है. कई टिकाऊ विकास लक्ष्यों में इसे शामिल किया गया है जिनमें मुख्य रूप से शिक्षा, रोज़गार, असमानता, मानव बस्तियां हैं.

महासचिव ने कहा, “जब हम विकलांगों के अधिकारों की रक्षा करने की बात करते हैं तो हम 2030 एजेंडा के प्रमुख वादे की ओर क़दम बढ़ाते हैं: कोई भी पीछे ना छूटने पाए.”

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि यूएन विकलांगों के साथ मिलकर एक टिकाऊ, समावेशी और कायापलट कर देने वाले भविष्य को संभव बनाने के लिए काम करता रहेगा.

दक्षिण सूडान में व्हीलचेयर पर बास्केटबॉल खेलते कुछ एथलीट.

शांति और विकास के लिए खेलकूद

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में इस दिवस पर एक आधिकारिक समारोह का आयोजन हुआ – साथ ही आम जीवन में विकलांगता के समावेशन के लिए रास्ते तलाश करने पर भी पैनल में विचार-विमर्श हुआ.

इसके अलावा सभी के लिए शांति व विकास को बढ़ावा देने के लिए खेलकूद की थीम पर एक कार्यक्रम भी आयोजित किया गया.

संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष तिजानी मोहम्मद-बांडे ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि खेलकूद विकलांगों को समर्थ और सशक्त बनाने का एक ज़रिया है.

उन्होंने सदस्य देशों, निजी क्षेत्र व नागरिक समाज को प्रोत्साहन देते हुए कहा कि खेलकूद को एक ऐसे माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए जिससे सभी व्यक्तियों के लिए गरिमा को बढ़ावा दिया जा सके.

महासभा अध्यक्ष ने इच्छा जताई कि पैरा-एथलीटों को भी अन्य एथलीटों की तरह लोकप्रियता मिलनी चाहिए. साथ ही यह सुनिश्चित किया जाना ज़रूरी होगा कि विकलांगों को समाज, मीडिया, मनोरंजन, राजनीति, शिक्षा जगत और अन्य क्षेत्रों में प्रतिनिधित्व मिल सके.

 

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