जलवायु सम्मेलन: हरित अर्थव्यवस्था को आगे बढ़कर अपनाने की पुकार

2 दिसम्बर 2019

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि हरित अर्थव्यवस्था से डरने के बजाय उसे खुलकर अपनाया जाना चाहिए. यूएन प्रमुख ने सोमवार को स्पेन की राजधानी मैड्रिड में वार्षिक यूएन जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP25) के पहले दिन प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए दोहराया कि महत्वाकांक्षी जलवायु कार्रवाई के लिए मज़बूत राजनैतिक इच्छाशक्ति दर्शाए जाने के साथ-साथ कार्बन की क़ीमत तय किए जाने की ज़रूरत है. 

दो हफ़्तों तक चलने वाले इस सम्मेलन में जलवायु संकट के विभिन्न पहलुओं से निपटने पर विमर्श होगा, जिनमें क्षमता-निर्माण, वनोन्मूलन, आदिवासी समुदाय, शहर, वित्तीय संसाधन, तकनीक सहित अन्य आयाम शामिल हैं.

उन्होंने ध्यान दिलाया कि हमारे सामने काम बहुत हैं, समय कम है और हर पहलू अहम है.

यूएन प्रमुख के मुताबिक़ इस सम्मेलन से यह संदेश दिया जाना चाहिए कि रास्ता बदलने के लिए मज़बूत संकल्प हैं और कि दुनिया प्रकृति के ख़िलाफ़ युद्ध को रोकने के लिए संकल्पित है.

साथ ही वर्ष 2050 तक कार्बन न्यूट्रैलिटी (नैट कार्बन उत्सर्जन शून्य) को पाने के लिए राजनैतिक इच्छाशक्ति है.

कॉप-25 बैठक के साथ ही अगले 12 महीनों तक चलने वाली प्रक्रिया की शुरुआत होगी जिसके तहत ‘नेशनली डेटरमाइन्ड कॉन्ट्रिब्यूशन्स’ यानी राष्ट्रीय जलवायु संकल्पों की समीक्षा की जाएगी.

ये संकल्प वर्ष 2015 में पेरिस जलवायु परिवर्तन समझौते के तहत लिए गए थे और जलवायु आपात स्थिति से निपटने के लिए इन संकल्पों को ज़्यादा महत्वाकांक्षी बनाने का प्रयास किया जा रहा है.

मतभेद दूर हों, कार्बन की क़ीमत तय हो

महासचिव के मुताबिक़ सितंबर 2019 में यूएन जलवायु शिखर वार्ता से उत्साहजनक प्रगति के संकेत मिले हैं.

इस बैठक में लघु द्वीपीय देशों, सबसे कम विकसित देशों, बड़े शहरों और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं के अलावा निजी और वित्तीय सैक्टरों ने भी कई नई शुरूआत करने का प्रस्ताव सामने रखा था.

क़रीब 70 देशों ने अपने राष्ट्रीय संकल्पों को वर्ष 2020 तक और ज़्यादा मज़बूत बनाने की इच्छा ज़ाहिर की है – 65 देश और प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं वर्ष 2050 तक नैट कार्बन उत्सर्जन को शून्य करने का प्रयास करेंगी. साथ ही सरकारों और निवेशकों ने जीवाश्म ईंधनों से हाथ खींचने के संकेत दिए हैं.

यूएन प्रमुख ने जलवायु परिवर्तन पर नेताओं से मतभेदों को दूर करने और कार्बन की क़ीमत तय करने पर सहमति बनाने की पुकार लगाई है.

ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कटौती के नज़रिए से यह बेहद अहम है. इसे हासिल करने के लिए बाज़ारों को तैयार करना होगा, निजी क्षेत्र को लामबंद करना होगा और सभी के लिए नियमों समान रूप से लागू करने होंगे.

लेकिन अगर कार्बन की क़ीमत तय करने में नाकामी हाथ लगती है तो कार्बन बाज़ार में टूट देखने को मिलेगी जिससे जलवायु संकट को सुलझाने के प्रयासों को धक्का पहुंचेगा.

मानवता के भविष्य को ख़तरा

यूएन महासचिव ने अपने भाषण में जलवायु संकट से मानवता के अस्तित्व को उपजते ख़तरे के प्रति आगाह करते हुए कहा कि अगर तत्काल ज़रूरी कार्रवाई नहीं हुई तो फिर आत्मसमर्पण ही रास्ता बचेगा.

“क्या हम एक ऐसी पीढ़ी के रूप में याद रहना चाहेंगे जिसने उस समय रेत में अपना सिर दफ़ना लिया था, जो तब व्यर्थ में समय गंवा रही थी - जब पृथ्वी जल रही थी.”

मौजूदा हालात और रुझानों से भविष्य में एक बड़े संकट की आशंका गहरा रही है.

उदाहरण के तौर पर, वातावरण में कार्बन डाय ऑक्साइड की सघनता की तुलना 30 से 50 लाख वर्ष पहले के स्तर से की जा सकती है.

उस समय धरती का औसत तापमान दो से तीन डिग्री सेल्सियस ज़्यादा था और समुद्री जलस्तर 10 से 20 मीटर ऊंचा था.

पिछले पांच वर्ष इतिहास के सबसे ज़्यादा गर्म साल साबित हुए हैं और चरम मौसम वाली घटनाएं व आपदाओं – चक्रवाती तूफ़ान, सूखा, बाढ़ और जंगलों में आग – की संख्या बढ़ रही है.

ग्लेशियरों का तेज़ गति से पिघलना जारी है, समुद्री जलस्तर बढ़ रहा है और महासागरों में अम्ल की मात्रा बढ़ रही है जिससे समुद्री जीवन को ख़तरा पैदा हो गया है.

गहराते संकट के बीच कोयला संयंत्रों की योजनाएं अब भी बन रही हैं और उनका निर्माण कार्य चल रहा है.

वैश्विक अर्थव्यवस्था के अहम हिस्सों – कृषि, परिवहन, शहर नियोजन, निर्माण और अन्य क्षेत्रों में काम अब भी जिस रूप में किया जा रहा है वह टिकाऊ नहीं है.

“समय अब नहीं बचा है और देर करने का कोई कारण नहीं है. हमारे पास औज़ार हैं, हमारे पास विज्ञान है, हमारे पास संसाधन हैं. आइए हम दर्शाएं कि हमारे पास राजनैतिक इच्छाशक्ति भी है जिसकी मांग लोग हमसे करते हैं. इससे कम कुछ करना हमारे समस्त मानव परिवार और भावी पीढ़ियों को धोखा देना होगा.”

नेतृत्व करें राजनेता

यूएन महासचिव ने कॉप-25 बैठक में हिस्सा लेने आए राष्ट्राध्यक्षों और सरकारों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में कहा कि जलवायु मुद्दे पर जनता की राय तेज़ी से बदल रही है और ऐसे समय में नेताओं को आगे बढ़कर नेतृत्व करना चाहिए.

महासचिव गुटेरेश ने ध्यान दिलाया कि हाल ही में ओसाका में जी-20 शिखर वार्ता के दौरान संपत्तियों का प्रबंधन करने वाली कंपनियों के एक समूह ने राजनैतिक नेताओं से जलवायु कार्रवाई का दायरा बढ़ाने, जीवाश्म ईंधनों पर सब्सिडी रोकने और कार्बन की क़ीमत तय करने की अपील की थी.

उनका मानना है कि निजी सैक्टर लगातार एक मज़बूत संकल्प को दर्शा रहा है लेकिन सरकारें अभी पीछे हैं: पर्याप्त नियामक प्रणाली नहीं है, वित्तीय प्रणाली उचित नहीं है, जीवाश्म ईंधनों को सब्सिडी अब भी मिल रही है और जलवायु कार्रवाई में इच्छुक कंपनियों को अवरोधों का सामना करना पड़ रहा है.

यूएन प्रमुख ने जलवायु परिवर्तन के नज़रिए से संवेदनशील एक फ़ॉरम को भी संबोधित किया जहां उन्होंने बताया कि जलवायु परिवर्तन का सबसे बुरा असर उन देशों पर होगा जिन्होंने इसमें सबसे कम योगदान दिया है.

इसे उन्होंने अन्यायपूर्ण क़रार दिया.

उन्होंने तूफ़ानों से तबाही को झेलने वाले मोज़ाम्बीक़ और कैरीबियाई देशों का ज़िक्र करते हुए कहा कि सबसे ज़्यादा संवेदनशील जलवायु कार्रवाई के अग्रिम मोर्चे पर साहस के साथ खड़े हैं और उनके इस उदाहरण का अनुसरण विश्व के बड़े उत्सर्जक देश करेंगे.

 

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