दुनियाभर में 27 करोड़ प्रवासी घर भेजते हैं सैकड़ों अरब डॉलर

28 नवंबर 2019

संयुक्त राष्ट्र की प्रवासन एजेंसी की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 2019 में अंतरराष्ट्रीय प्रवासियों की संख्या 27 करोड़ पहुंच गई है और सबसे पसंदीदा गंतव्य अब भी अमेरिका है, जहां लगभग 5 करोड़ 10 लाख प्रवासी हैं. ये प्रवासी हर साल लगभग 689 अरब डॉलर की रक़म अपने मूल स्थानों को भेजते हैं.

संयुक्त राष्ट्र की प्रवासन एजेंसी, आईओएम की नवीनतम वैश्विक रिपोर्ट के मुताबिक ये पूरा आंकड़ा दुनिया की आबादी का सिर्फ़ छोटा सा हिस्सा दर्शाता है.

हालांकि ये दो साल पहले प्रकाशित उसकी अंतिम रिपोर्ट के सांकेतिक स्तर से 0.1 प्रतिशत की वृद्धि है.

ग्लोबल माइग्रेशन रिपोर्ट 2020 के अनुसार, "यह हिस्सा फिर भी दुनिया की आबादी का बहुत कम यानी लगभग 3.5 प्रतिशत है – मतलब ये कि इसमें दुनिया के लगभग 96.5 प्रतिशत लोगों की वो आबादी शामिल नहीं हैं जो ये मानते हैं कि वो वहीं रह रहे हैं जहां वो पैदा हुए थे." 

संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी के अनुसार  कुल अंतरराष्ट्रीय प्रवासियों की लगभग आधी से भी ज़्यादा संख्या यानी क़रीब 14 करोड़ 10 लाख प्रवासी योरोप और उत्तरी अमेरिका में रहते हैं.

इनमें से लगभग 52 प्रतिशत पुरुष हैं और लगभग 16 करोड़ 40 लाख यानी दो-तिहाई प्रवासी रोज़गार की तलाश में हैं.

सबसे ज़्यादा अंतरराष्ट्रीय प्रवासी भारत से जाते हैं जिनकी संख्या लगभग एक करोड़ 75 लाख है.

उसके बाद मैक्सिको का नंबर है जिसके प्रवासियों की संख्या  एक करोड़ 18 लाख है. एक करोड़ 7 लाख प्रवासियों के साथ चीन का तीसरा नंबर है.

अन्य निष्कर्षों से संकेत मिलता है कि उच्च आय वाले देशों में प्रवासी श्रमिकों की संख्या 1 करोड़ 12 लाख 30 हज़ार से थोड़ा गिरकर 1 करोड़ 11 लाख 20 हज़ार रह गई है - लेकिन दूसरे कई स्थानों में इसमें वृद्धि हुई है.

उच्च मध्यम आय वाले देशों में सबसे बड़ी वृद्धि -1 करोड़ 75 लाख से लेकर 3 करोड़ 5 लाख तक देखी गई.

लगभग 689 अरब डॉलर की रक़म 

साथ ही आईओएम का ये भी कहना है कि 2018 में अंतरराष्ट्रीय प्रेषण भी बढ़कर 689 अरब डॉलर हो गया जिसमें सबसे ज़्यादा लाभान्वित होने वाले देशों में भारत है जहां  लगभग 78 अरब 60 करोड़ डॉलर की रक़म भेजी गई. 

चीन में 67 अरब 40 करोड़ डॉलर, मैक्सिको में 35 अरब 70 करोड़ डॉलर और फिलीपींस में 34 अरब डॉलर की रक़म भेजी गई है.  

जिन देशों से रक़म भेजी गई उनमें 68 अरब डॉलर के प्रेषण के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका शीर्ष स्थान बना रहा. इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात  से 44 अरब 40 करोड़ डॉलर और सऊदी अरब से 36 अरब 10 करोड़ डॉलर की रक़म भेजी गई.

अफ़्रीकी प्रवासी महाद्वीप नहीं छोड़ते 

यद्यपि अधिकांश प्रवासियों ने अमेरिका का रुख़ किया, रिपोर्ट में ग़रीब देशों से अमीर देशों को जाने वाले दूसरे महत्वपूर्ण गंतव्य स्थानों की भी पुष्टि की गई है - जैसे फ्रांस, रूस, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब. 

रिपोर्ट के मुताबिक, "यह पैटर्न भविष्य में कई वर्षों तक इसी तरह जारी रहने की संभावना है, ख़ासतौर पर इसलिए कि आने वाले दशकों में कई विकासशील इलाक़ों और देशों में आबादी बढ़ने से भविष्य की पीढ़ियों पर देश-परिवर्तन करने का दबाव पड़ेगा."

अफ्रीका, एशिया और योरोप में, अधिकांश अंतरराष्ट्रीय प्रवासी अपने जन्मस्थानों में ही रहते हैं, लेकिन लैटिन अमेरिका और कैरीबियन और उत्तरी अमेरिका के अधिकांश प्रवासी बाहर निकल जाते हैं. 

केवल ओशियानिया में प्रवास का स्तर 2019 में भी पहले के समान ही बना रहा. 

मध्य पूर्व के आंकड़ों से पता चला है कि अस्थाई श्रमिक प्रवासियों की सबसे बड़ी संख्या खाड़ी देशों में रहती है जोकि दुनिया भर की सबसे ज़्यादा है.

उसमें भी लगभग 90 प्रतिशत संख्या संयुक्त अरब अमीरात  में रहती है. 

विस्थापन और संघर्ष में संबंध

रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्य अफ़्रीकी गणराज्य, लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो (DRC), म्यांमार, दक्षिण सूडान, सीरिया और यमन में चल रहे संघर्ष और हिंसा के कारण पिछले दो वर्षों में बड़े पैमाने पर आंतरिक विस्थापन हुआ है.

आईओएम के आंतरिक विस्थापन निगरानी केंद्र ने कहा है कि कुल 4 करोड़ 13 लाख लोगों को 2018 के अंत में अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर किया गया था - 1998 में इन मामलों की निगरानी शुरू होने के बाद से ये एक रिकॉर्ड है. 

सीरिया में आंतरिक विस्थापितों की सबसे अधिक जनसंख्या 61 लाख है, उसके बाद कोलम्बिया  में 58 लाख और डीआरसी में 31 लाख है.

लगभग नौ वर्षों के संघर्ष के बाद सीरिया अब भी सबसे ज़्यादा शरणार्थियों वाला देश है जिनमें कुछ आंतरिक शरणार्थी हैं और कुछ अन्य देशों में चले गए हैं.

विश्व भर में कुल 2 करोड़ 60 लाख शरणार्थियों में से साठ लाख से अधिक सीरिया से और लगभग 25 लाख अफग़ानिस्तान से हैं. 

अंत में, जलवायु और मौसम की आपदाओं के प्रभाव का उल्लेख करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल ही में फिलीपींस में तूफ़ान मंगखुट के कारण 2018 के अंत में 38 लाख लोग विस्थापित हुए, जो विश्व स्तर पर सबसे बड़ी विस्थापन संख्या है.

 

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