दशकों से अनसुलझे इसराइल-फ़लस्तीन विवाद के निपटारे की पुकार

27 नवंबर 2019

संयुक्त राष्ट्र के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने ‘फ़लस्तीनियों के साथ एकजुटता के अंतरराष्ट्रीय दिवस’ पर उनके अपरिहार्य अधिकारों को वास्तविकता में बदलने के लिए प्रयासरत रहने का संकल्प दोहराया है. यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने इस अवसर पर अपने संदेश में कहा है कि दो-राष्ट्र समाधान का कोई और विकल्प नहीं है और उसमें भरोसा बहाल किया जाना होगा.

यूएन महासचिव ने कहा कि इसराइल-फ़लस्तीन विवाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समक्ष खड़े सबसे जटिल मुद्दों में से एक है लेकिन यह दुखद है कि पिछले साल इस संबंध में सकारात्मक प्रगति नहीं हुई है और ज़मीनी हालात का लगातार बिगड़ना जारी है.

फ़लस्तीनियों के साथ एकजुटता का अंतरराष्ट्रीय दिवस हर वर्ष 29 नवंबर या उसके आस-पास मनाया जाता है. यह एकजुटता दिवस अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए अनसुलझे फ़लस्तीनी मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने और आगाह करने का एक अवसर है कि फ़लस्तीनियों को अब भी यूएन महासभा द्वारा परिभाषित अपरिहार्य अधिकार नहीं मिले हैं.

  • बिना बाहरी हस्तक्षेप के आत्मनिर्णय का अधिकार
  • राष्ट्रीय स्वाधीनता व संप्रभुता का अधिकार
  • अपनी संपत्ति वापिस पाने व घर लौटने का अधिकार

फ़लस्तीनी जनसंख्या क़रीब 80 लाख है और वे मुख्य रूप से उन फ़लस्तीनी क्षेत्रों में रह रहे हैं जिन पर इसराइल का वर्ष 1967 से क़ब्ज़ा है. इनमें 43 फ़ीसदी से अधिक जनसंख्या शरणार्थियों की है.

“ग़ैरक़ानूनी बस्तियाँ बसाए जाने व फ़लस्तीनी घर ढहाए जाने की तेज़ रफ़्तार और ग़ाज़ा में व्याप्त पीड़ा को रोकना होगा.

पूर्वी येरुशलम सहित क़ाबिज़ फ़लस्तीनी इलाक़ों में बस्तियों की स्थापना का कोई क़ानूनी आधार नहीं है और अंतरराष्ट्रीय क़ानून का खुला उल्लंघन है.”

यूएन प्रमुख ने चिंता जताई कि ऐसी कार्रवाई से यूएन प्रस्तावों के तहत फ़लस्तीनी राष्ट्र की स्थापना की संभावनाओं को झटका लगता है.

साथ ही महासचिव गुटेरेश ने कहा है कि इसराइल में आम नागरिकों को निशाना बनाने के लिए होने वाले रॉकेट व मोर्टार हमलों को रोका जाना होगा.

UN News/Reem Abaza
पश्चिमी तट के हेब्रॉन में फ़लस्तीनी घर और इसराइली बस्तियां.

उन्होंने इसराइली व फ़लस्तीनी जनता से दो-राष्ट्र के समाधान में भरोसा बहाल करने की पुकार लगाई है. उनके मुताबिक़ इसका कोई और विकल्प नहीं है और इस भ्रम में नहीं रहना चाहिए कि इस विवाद को हमेशा के लिए टाला जा सकता है.

यूएन प्रमुख ने ज़ोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समर्थन से संबंधित पक्षों में सृजनात्मक वार्ता के ज़रिए और यूएन प्रस्तावों के अनुरूप एक न्यायोचित व स्थाई समाधान पाया जा सकता है – जिसके तहत येरुशलम दोनों राष्ट्रों की राजधानी होगी. लेकिन उसके लिए ठोस नेतृत्व व राजनैतिक इच्छाशक्ति की ज़रूरत है. 

इस अवसर पर अपने संदेश में संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष तिजानी-मोहम्मद बांडे ने कहा कि फ़लस्तीन के सवाल पर पारित प्रस्ताव हमें सात दशक से ज़्यादा समय से अनसुलझे विवाद को हल करने के बारे में ध्यान दिलाते हैं.

उन्होंने ध्यान दिलाया कि हिंसा में मौतों, उकसावे, घर ढहाए जाने और ग़ैरक़ानूनी बस्तियां बसाए जाने से सबसे अधिक तकलीफ़ आम लोगों को ही होती है.

ग़ाज़ा में फ़लस्तीनियों की पीड़ा को बयान करते हुए उन्होंने बताया कि लोगों को भोजन, पानी, बिजली, स्वास्थ्य व शिक्षा जैसी बुनियादी सेवाओं की बेहद आवश्यकता है लेकिन वित्तीय संसाधनों में कमी और बार-बार होने वाली झड़पों के कारण हालात मुश्किल बने हुए हैं.

यूएन महासभा अध्यक्ष ने सभी पक्षों को प्रासंगिक प्रस्तावों के तहत मामले के निपटारे का प्रयास करने के लिए प्रोत्साहित किया और फ़लस्तीनियों की मदद का संकल्प दोहराया.

 

♦ समाचार अपडेट रोज़ाना सीधे अपने इनबॉक्स में पाने के लिए यहाँ किसी विषय को सब्सक्राइब करें
♦ अपनी मोबाइल डिवाइस में यूएन समाचार का ऐप डाउनलोड करें – आईफ़ोन iOS या एंड्रॉयड