डेंगू पर क़ाबू पाने के लिए नई तकनीक परीक्षण के लिए तैयार

19 नवंबर 2019

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार मच्छरों से फैलने वाले डेंगू बुख़ार से आधी से ज़्यादा दुनिया को ख़तरा है. इसकी गंभीरता को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र इसे जड़ से मिटाने के वैश्विक प्रयासों में अग्रणी भूमिका निभा रहा है. इन प्रयासों के तहत लाखों की संख्या में बधिया कीटों को छोड़े जाने के असर को मापने की घोषणा की गई है.

इस प्रक्रिया को बधिया कीट तकनीक (Sterile Insect Technique) के नाम से जाना जाता है जिसे दशकों पहले अमेरिका में फ़सलों को नुक़सान पहुंचाने वाले कीटों से निपटने के प्रयासों के तहत विकसित किया गया था. संयुक्त राष्ट्र के शोधकर्ता पिछले 10 वर्षों से इस तकनीक को मच्छरों के लिए इस्तेमाल में लाने और उसे कारगर बनाने में जुटे हैं.

शोधकर्ताओं ने यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के ‘ट्रॉपिकल डिज़ीज़’ कार्यक्रम के साथ काम करते हुए उन देशों के लिए नए दिशानिर्देश तैयार किए हैं जो मच्छर जनित बीमारियों पर क़ाबू पाने का प्रयास कर रहे हैं.

खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) में विशेषज्ञ जर्मी बोयर के अनुसार इटली, ग्रीस व मॉरिशस जैसे कई देशों ने पहले से ही इस पर काम शुरू कर दिया है जबकि अन्य देश ऐसा करने के कगार पर हैं जिनमें अमेरिका, फ़्रांस और ब्राज़ील शामिल हैं.

बोयर का मानना है, “हमारे पास पहले से ही सबूत हैं कि यह तकनीक मच्छरों के घनत्व को कम करने में सक्षम है और अब हमें यह साबित करना होगा कि यह बीमारी के फैलने पर भी उसे रोकने में असर डालेगी."

कीटों की संख्या पर नियंत्रण

बोयर बताते हैं कि ‘बधिया कीट तकनीक’ एक प्रकार से कीटों के जन्म और उनकी संख्या को नियंत्रण में करने का एक नुस्ख़ा है. इसके अंतर्गत बड़ी संख्या में बधिया नर मच्छर छोड़े जाते हैं जो जंगली नर मच्छरों को पीछे छोड़ते हुए मादा मच्छरों में बांझपन का कारण बनते हैं – उनके अंडे फूट नहीं पाते जिससे मच्छरों की संख्या को नियंत्रण में लाने में मदद मिलती है.

उन्होंने कहा कि यदि इस तकनीक को लंबे समय के लिए प्रयोग में लाया जाए तो मच्छरों की आबादी को कम और कुछ मामलों में मच्छरों की पूरी संख्या को लक्षित ढंग से ख़त्म किया जा सकता है.

बधिया मच्छरों के व्यापक स्तर पर उत्पादन और इस प्रक्रिया को स्वचालित बनाने के प्रयासों में भी प्रगति हुई है.

उदाहरण के तौर पर ड्रोन से हज़ारों-लाखों की संख्या में मच्छर छोड़े जा सकते हैं.

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार डेंगू के अलावा मलेरिया, ज़ीका, चिकनगुनिया और पीला बुख़ार जैसी बीमारियां मच्छरों के ज़रिए ही फैलती है जो विश्व भर में सभी संक्रामक रोगों का लगभग 17 प्रतिशत है.

यूएन एजेंसी ने इस साल 110 देशों में डेंगू के मामलों के सामने आने की आंशका जताई है.

संगठन के मुताबिक हर साल डेंगू के औसतन तीस लाख मामले दर्ज किए जाते हैं लेकिन वर्ष 2019 में ऐसे मामलों की संख्या बढ़कर 40 लाख तक पहुंच सकती है.

परिणाम के लिए चार साल का इंतजार

यूएन समर्थित ट्रॉपिकल बीमारियों के लिए शोध व प्रशिक्षण कार्यक्रम की टीम लीडर फ्लोरेंस फौक के अनुसार बीमारी के फैलाव को कम करने के प्रयासों में पायलट परीक्षण की सफलता को मापने में अभी लगभग चार साल लगेंगे.

लेकिन उन्होंने साथ में ये भी कहा, "कभी-कभी मच्छरों की बहुत कम आबादी भी रोग संचारित कर सकती है इसलिए हमें लोगों पर इसके प्रभावों को भी मापना होगा, और हम यही करना चाहते हैं क्योंकि यह अब तक कभी नहीं किया गया है.”

विश्व स्वास्थ्य संगठन  में ‘नैगलैक्टेड ट्रॉपिकल डिज़ीज़’ विभाग के रमन वेलुधन ने बताया, "दुनिया के कई देशों ने डेंगू के मामलों में बढ़ोत्तरी की सूचना दी है, हमारे पास बांग्लादेश, ब्राज़ील, फ़िलिपींस और कुछ अफ़्रीकी देशों की रिपोर्टें हैं और लगभग 10 अन्य लातिन अमेरिकी देशों में डेंगू के मामलों में वृद्धि जारी है.”

उनका कहना है कि यदि यह परीक्षण सफल रहा तो इससे व्यापक पैमाने पर स्वास्थ्य लाभ हो सकता है.

 

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