ईरान में विरोध प्रदर्शनों के दौरान गोलीबारी पर 'गहरी चिंता'

19 नवंबर 2019

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) ने ईरान में विरोध-प्रदर्शनों के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के मारे जाने की रिपोर्टों पर गहरी चिंता जताई है. देश में ईंधन की क़ीमतों में बढ़ोत्तरी के विरोध में पिछले शुक्रवार को प्रदर्शन शुरू हुए थे जिन पर सुरक्षा बलों की गोलीबारी में कुछ प्रदर्शनकारियों की मौत होने की ख़बरें मिली हैं.

यूएन मानवाधिकार कार्यालय के प्रवक्ता रूपर्ट कोलविले ने ईरान की मीडिया का हवाला देते हुए कहा है कि देश के सर्वोच्च धार्मिक नेता आयतुल्लाह ख़मैनेई ने भी माना है कि कुछ लोगों की मौत हुई है.

प्रवक्ता का कहना था, “बल प्रयोग पर अंतरराष्ट्रीय मानकों और नियमों के कथित उल्लंघन से हमें गहरी चिंता है – इनमें ईरान पर प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाना शामिल है.”

यूएन मानवाधिकार प्रवक्ता का कहना है कि देश में गहराई तक समस्याएं व्याप्त है जिनका नतीजा इस रूप में देखने को मिल रहा है.

एक हज़ार से ज़्यादा प्रदर्शनकारियों को गिरफ़्तार किए जाने की रिपोर्टें हैं लेकिन इसकी पुष्टि कर पाना मुश्किल है क्योंकि देश में यूएन मानवाधिकार कार्यालय नहीं है.

“कुल 40 शहरों व क़स्बों में विरोध प्रदर्शनों की ख़बरें मिली हैं लेकिन विवरण की पुष्टि कर पाना मुश्किल है क्योंकि शनिवार देर शाम से इंटरनेट बंद कर दिया गया है.”

मानवाधिकार मामलों में समन्वयन के लिए यूएन एजेंसी (OCHA) के मुताबिक़ ईरान की कुल जनसंख्या 8 करोड़ से ज़्यादा है जिनमें क़रीब आधी आबादी की उम्र तीस वर्ष से कम है.

एक तिहाई जनसंख्या 15 से 29 वर्ष के आयु वर्ग में है और हर चार में से तीन व्यक्ति शहरों व क़स्बों में रहते हैं.

जुलाई 2019 में स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञ - स्पेशल रैपोर्टेयर जावेद रहमान ने अपनी रिपोर्ट में रेखांकित किया था कि ईरानी जनता को बढ़ती महंगाई, वेतन का भुगतान ना हो पाने और भोजन, कामकाज और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच ना हो पाने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है.

देश पर फिर से प्रतिबंध लगाए जाने से हालात और ज़्यादा विकट हो गए हैं जिससे समाज का कमज़ोर तबका विशेष रूप से प्रभावित हुआ है.

यूएन मानवाधिकार प्रवक्ता ने अत्यधिक बल प्रयोग से परहेज़ की अपील जारी करते हुए कहा है कि स्थानीय प्रशासन को स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करने होंगे ताकि अंतरराष्ट्रीय नियमों व मानकों का पालन किया जा सके.

अंतरराष्ट्रीय मानकों के तहत गोलियों का इस्तेमाल तभी किया जा सकता है जब जीवन को ख़तरा पैदा हो जाए या फिर गंभीर रूप से घायल होने का डर हो और एकत्र लोगों को अन्य तरीक़ों से तितर-बितर करना संभव नहीं हो पा रहा हो.

प्रदर्शनकारियों से भी अपील की जाती है कि शारीरिक हिंसा और संपत्तियों को नुक़सान पहुंचाए बग़ैर विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लिया जाए.

साथ ही ईरान सरकार से संचार माध्यमों पर लगी रोक को हटाने का अनुरोध भी किया गया है.

 

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