लाखों अफगान ‘गंभीर खाद्य असुरक्षा’ से पीड़ित - एक तिहाई को तत्काल मानवीय सहायता की ज़रूरत

19 नवंबर 2019

सोमवार को जारी नवीनतम एकीकृत खाद्य सुरक्षा चरण वर्गीकरण (IPC) अलर्ट के अनुसार, अफगानिस्तान में 1 करोड़ 2 लाख 30 हज़ार लोग "गंभीर खाद्य असुरक्षा" की स्थिति में रह रहे हैं और पिछले तीन महीनों में (अगस्त से अक्टूबर 2019) एक तिहाई अफगान आबादी को तत्काल मानवीय सहायता की ज़रूरत थी. 

संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों और अन्य साझेदारों का एक गठबंधन आईपीसी, चरण 1 (न्यूनतम/बिल्कुल नहीं) से चरण 5 (विनाशकारी/अकाल) तक, पांच अलग-अलग चरणों में खाद्य असुरक्षा को श्रेणीबद्ध करता है: इसके अनुसार लगभग 24 लाख 40 हज़ार अफगानों को संकट की स्थिति में माना गया है (चरण 4) और 77 लाख 90 हज़ार को बिल्कुल विनाशकारी स्थिति में (चरण 3).

संघर्ष के हालात, बढ़ती क़ीमतें, बेरोज़गारी 

अफ़ग़ानिस्तान में कई महत्वपूर्ण खाद्य सुरक्षा संकेतकों की निगरानी कर रही आईपीसी की आशंका है कि नवंबर 2019 और मार्च 2020 के बीच गंभीर खाद्य असुरक्षा का अनुभव करने वालों की संख्या बढ़कर 1 करोड़ 2 लाख 90 हज़ार हो जाएगी और हालात बदतर हो जाएंगे. इनमें से 27 लाख लोग आपात स्थिति में होंगे और 86 लाख संकट की स्थिति में.

रिपोर्ट के मुताबिक, रोज़गार के अवसरों की कमी, अनिश्चित राजनैतिक माहौल और सुरक्षा स्थिति जैसे कारणों से कमज़ोर तबकों की आजीविका प्रभावित होती है.

इसके अलावा आने वाले चुनावों से बदलते नज़रिए, सर्दियों में भोजन की बढ़ती क़ीमतें और सूखा व बाढ़ जैसी मौसमी आपदाओं से भी आम लोग प्रभावित होते हैं. 

मानवीय सहायता और जलवायु अनुकूलन 

आईपीसी के नवंबर अलर्ट में खाद्य असुरक्षा की समस्या से निपटने के लिए कई सिफ़ारिशें की गईं हैं.

नक़दी या सामान के रूप में मानवीय खाद्य सहायता प्रदान करना - एक ऐसा  प्रस्ताव है जिससे आने वाले मौसम के लिए किसानों को गुणवत्ता वाले बीज प्राप्त करने में मदद मिलेगी. यहां ज़्यादातर किसानों को किसी भी तरीक़े से बीज प्राप्त करने की सुविधा नहीं है.

आईपीसी भागीदारों से आग्रह करता है कि खाद्य सुरक्षा और आजीविका में सुधार के लिए रणनीति विकसित करते समय वो अफ़ग़ानिस्तान के जातीय समीकरण, बीहड़ इलाक़ों और "नागरिक अशांति की कठोर स्थिति" के जटिल संदर्भ को ध्यान में रखें. 

इस रिपोर्ट में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को संबोधित करते हुए ऐसे कार्यक्रमों पर ज़ोर दिया गया है जो आपदा जोखिम को कम कर सकें और लचीलापन बढ़ाएं.

इसके अलावा, जल सिंचाई प्रणालियों को बेहतर और मज़बूत बनाए जाने की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया गया है.

आईपीसी के तहत, खाद्य और कृषि संगठन (एफ़एओ), विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफ़पी) और संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ़), साथ ही कई ग़ैर-सरकारी संगठनों और अंतर-सरकारी संगठन मिलकर काम कर रहे हैं, ताकि देशों में खाद्य असुरक्षा और कुपोषण के स्तर का अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त वैज्ञानिक आकलन किया जा सके. 

 

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