असहिष्णुता और नफ़रत की रोकथाम संभव है – यूएन प्रमुख

7 नवंबर 2019

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि किसी का जन्म घृणा करने के लिए नहीं हुआ है इसलिए असहिष्णुता की रोकथाम की जा सकती है और नफ़रत से प्रेरित सोच का अंत किया जा सकता है. यूएन प्रमुख ने बढ़ते नस्लवाद, यहूदीवाद विरोध और नफ़रत के अन्य स्वरूपों के विरुद्ध अपनी मुहिम को जारी रखते हुए यह बात कही है. 

यूएन महासचिव ने न्यूयॉर्क में यहूदी विरासत के संग्रहालय में गुरुवार को एक समारोह को संबोधित किया जिसे जर्मनी में नात्ज़ी शासनकाल में ‘क्रिस्टलनाख्ट’ – द नाइट ऑफ़ ब्रोकन ग्लास - की स्मृति में आयोजित किया गया था. 81 वर्ष पहले 9-10 नवंबर 1938 की रात में कई यहूदी घरों, व्यवसायों और उपासना स्थलों को तबाह कर दिया गया था. 

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख के लिए यह स्मृति समारोह ना सिर्फ़ पीछे मुड़कर देखने का एक अवसर था बल्कि सतर्क बने रहने की ज़रूरत को पहचानने का मौक़ा भी.

विश्व भर में यहूदियों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि “होलोकॉस्ट के कई दशक बाद भी दुनिया की सबसे पुरानी नफ़रत हमारे साथ है.”

हाल के समय में यहूदी क़ब्रगाहों और होलोकॉस्ट स्मारक को नुक़सान पहुंचाया गया है. इसके अलावा पिट्सबर्ग में पिछले साल एक यहूदी उपासना स्थल पर गोलीबारी की घटना हुई जिसे अमेरिका के इतिहास में सबसे ख़राब यहूदी विरोधी हमला माना गया है. 

यूएन प्रमुख ने आगाह किया कि नफ़रत के अन्य स्वरूप भी उभर रहे हैं और चर्च में बमबारी, मस्जिदों में गोलीबारी और शरणार्थियों व प्रवासियों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं हुई हैं. 

उन्होंने सचेत किया कि नफ़रत से लोगों के बीच रिश्ते और समाज की नींव कमज़ोर पड़ती है. उन्होंने इस समस्या से निपटने के लिए अभिभावकों, शिक्षकों और राजनैतिक नेताओं से तत्काल कार्रवाई की पुकार लगाई है. उनके मुताबिक़ गुपचुप ढंग से नफ़रत को हवा मिल रही है लेकिन उसे प्रत्यक्ष और सामान्य बनाए जाने से रोका जाना होगा. 

इन ख़तरों से निपटने के लिए उन्होंने वैश्विक समुदाय के प्रयासों का जिक्र किया – जैसे नफ़रत भरी बोली व भाषणों से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने एक कार्ययोजना तैयार की है और ऐसे ही प्रयास धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किए जा रहे हैं.

“रोकथाम के तरीक़ों में शिक्षा की अहम भूमिका होगी, और मैं आज घोषणा करता हूं कि मेरी इच्छा शिक्षा की भूमिका पर एक सम्मेलन आयोजित करने की है ताकि नफ़रत से प्रेरित भाषणों के ख़िलाफ़ सुदृढ़ क़दम उठाए जा सकें. ”

अगले वर्ष संयुक्त राष्ट्र अपनी स्थापना की 75वीं वर्षगांठ मना रहा है और इस अवसर पर उनका ध्यान समानता और मानवीय गरिमा सुनिश्चित करने पर होगा. 

 

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