क्यूबा पर अमेरिकी पाबंदियों का अंत करने के लिए पुरज़ोर समर्थन

7 नवंबर 2019

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने लगातार 28वें साल एक प्रस्ताव पारित किया है जिसमें अमेरिका द्वारा क्यूबा पर लगाए गए आर्थिक, वाणिज्यिक और वित्तीय प्रतिबंधों को समाप्त करने की फिर से पुकार लगाई है. गुरुवार को वोटिंग के दौरान 187 सदस्य देशों ने प्रस्ताव के समर्थन में मतदान किया जबकि ब्राज़ील और इसराइल ने अमेरिका का साथ देते हुए प्रस्ताव के विरोध में वोट डाले.

दो देशों – कोलंबिया और यूक्रेन ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया.

संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की राजदूत कैली क्रॉफ़्ट ने वोटिंग से पहले कहा कि, “हर देश की तरह, हमें यह चुनने का अधिकार है कि हम किस देश के साथ व्यापार करें. यह हमारा संप्रभु अधिकार है.”

“इसलिए यह चिंताजनक है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय संप्रभुता की रक्षा के नाम पर इस अधिकार को चुनौती देना जारी रखे हुए है.”

इन प्रतिबंधों की जड़ शीत युद्ध के दिनों तक जाती है जब क्यूबा में फ़िदेल कास्त्रो और उनके क्रांतिकारी साथियों ने सत्ता हथिया ली थी.

क़रीब पांच दशकों बाद दोनों देशों के बीच तनाव में तब थोड़ी कमी आई जब पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रशासन ने क्यूबा के साथ राजनयिक संबंधों बहाल किए और प्रतिबंधों के कई पहलुओं में भी बदलाव किया. इसके तहत यात्राओं पर लगी पाबंदियाँ भी हटाई गई थीं.

प्रस्ताव में कहा गया है कि ये नीतियां मौजूदा राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के उन क़दमों के विपरीत हैं जो उन्होंने 2017 में लागू किए थे.

‘नाकेबंदी है जनसंहार की कार्रवाई’

क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिग्वेज़ पैरिला ने बताया कि अमरीका ने हाल के महीनों में उग्र रूप धारण करना शुरू कर दिया है और समुद्री मार्ग के रास्ते अंतरराष्ट्रीय ईंधन क्यूबा तक पहुंचने से रोका गया है, काउंसलर सेवा का स्तर घटाया गया है और ऐसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों को निशाना बनाया है जिनके ज़रिए अन्य विकासशील देशों को मदद दी जाती है.

“नाकेबंदी से बहुत ज़्यादा मानवीय क्षति हुई है. यह मानवाधिकारों का खुला, भारी और सुनियोजित उल्लंघन है.”

विदेश मंत्री ने जनसंहार अपराध की रोकथाम और सज़ा सुनिश्चित करने के लिए 1948 में हुई संधि के तहत जनसंहार के समकक्ष कार्रवाई क़रार दिया है.

उनके मुताबिक़ क्यूबा में एक भी परिवार ऐसा नहीं है जिसे इस नाक़ेबंदी के दुष्परिणाम ना झेलने पड़े हों.

फ़लस्तीन ने विकासशील देशों के समूह ग्रुप ऑफ़ 77 और चीन की तरफ़ से राय रखते हुए अफ़सोस व्यक्त किया कि अमेरिका ने प्रतिंबध कठोर बनाए हैं.

वहीं कैरिबियाई समुदाय के 15 सदस्य देशों ने क्षेत्र के लिए क्यूबा से मिलने वाले समर्थन को रेखांकित किया.

उदाहरण के तौर पर क्यूबा ने कई विपदाग्रस्त इलाक़ों में चिकित्साकर्मी भेजकर सहायता मुहैया कराई है, विशेषकर प्राकृतिक आपदा को झेलने वाले देशों में.

 

♦ समाचार अपडेट रोज़ाना सीधे अपने इनबॉक्स में पाने के लिए यहाँ किसी विषय को सब्सक्राइब करें
♦ अपनी मोबाइल डिवाइस में यूएन समाचार का ऐप डाउनलोड करें – आईफ़ोन iOS या एंड्रॉयड