इराक़ में हिंसा के चक्र को तोड़ने के लिए राष्ट्रीय संवाद की पुकार

30 अक्टूबर 2019

इराक़ में संयुक्त राष्ट्र महासचिव की विशेष दूत ने बुधवार को बग़दाद के केंद्रीय इलाक़े में प्रदर्शनकारियों से मुलाक़ात करने के बाद राष्ट्रीय संवाद क़ायम करने की अपील की है ताकि हिंसा के चक्र को तोड़ने के लिए त्वरित और अर्थपूर्ण कार्रवाई की पहचान हो सके. इराक़ में हाल के दिनों में भारी विरोध प्रदर्शन हुए हैं और सुरक्षा बलों की कार्रवाई में बड़ी संख्या में लोगों के हताहत होने की रिपोर्टें हैं.

इराक़ में यूएन सहायता मिशन (UNAMI) की प्रमुख जिनीन हेनिस-प्लाशर्ट ने बताया कि यूएन और इराक़ सरकार के बीच संवाद को बढ़ावा देने के प्रयासों के तहत उन्होंने लोगों से मिलकर उनकी चिंताओं को सुना है.

कई न्यूज़ रिपोर्टों के मुताबिक़ प्रधानमंत्री आदेल अब्दुल माहदी के इस्तीफ़े की मांगे लगातार तेज़ हो रही हैं,

अक्टूबर महीने में पहली बार सरकार विरोधी प्रदर्शनों की शुरुआत और तब से अब तक देश भर में 220 लोगों की मौत हो चुकी है.

कुछ प्रदर्शनकारियों ने कर्फ़्यू की परवाह ना करते हुए बेहतर सार्वजनिक सेवाओं, नौकरियों के अवसरों और भ्रष्टाचार पर रोक की मांग करते हुए प्रदर्शन जारी रखा है.

यूएन मिशन प्रमुख जिनीन हेनिस-प्लाशर्ट की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है, “पूरे इराक़ी समाज को विभाजन और हाथ पर हाथ रखकर बैठने के ख़तरों के प्रति एकजुट होना होगा. इराकी नागरिक एकजुट होकर साझा ज़मीन की तलाश कर सकते हैं जो सभी के लिए एक बेहतर भविष्य के निर्माण के लिए आवश्यक है.”

उन्होंने प्रदर्शनकारियों से भी अपील करते हुए कहा कि कोई भी सरकार विरासत में मिली मुश्किलों और मौजूदा चुनौतियों को एक साल के कार्यकाल में दूर नहीं कर सकती.

उन्होंने मंगलवार को जारी अपने कड़े बयान में सभी प्रकार की हिंसा की निंदा करते हुए कहा है कि इस रास्ते पर कभी नहीं चला जा सकता और जीवन रक्षा सर्वोपरि है.

उन्होंने शिया समुदाय के दबदबे वाले कर्बला में प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाए जाने की रिपोर्टों की निंदा की है. इस गोलीबारी में 18 लोगों के मारे जाने और और सैकड़ों के घायल होने की रिपोर्टें मिली हैं लेकिन स्थानीय प्रशासन ने लोगों के हताहत होने से इनकार किया है.

अत्यधिक बल प्रयोग की निंदा

संयुक्त राष्ट्र स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने मंगलवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए सरकार और सुरक्षा बलों से प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध तत्काल हिंसा बंद करने और उसकी रोकथाम करने की अपील की है. साथ ही ताक़त का ग़ैरक़ानूनी ढंग से इस्तेमाल करने के ज़िम्मेदार लोगों की जांच करने और उन पर मुक़दमा चलाने की भी मांग की गई है.

मानवाधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि 1-9 अक्टूबर के बीच सुरक्षा बलों ने ज़िंदा कारतूसों, रबर बुलेट, बख़्तरबंद गाड़ियों सहित अंधाधुंध आंसू गैस और पानी की तेज़ बौछारों का इस्तेमाल किया.

25 अक्टूबर के बाद से इराक़ी सुरक्षा बलों ने उससे पहले की तुलना में अधिक संयम का परिचय दिया है और राजधानी बग़दाद में विशेष तौर पर यह नज़र भी आया है. लेकिन इसके बावजूद अत्यधिक बल प्रयोग से लोगों के हताहत होने की रिपोर्टें अब भी मिल रही हैं.

इराक़ के दक्षिणी गवर्नरेटों में कुछ बंदूकधारियों ने राजनैतिक कार्यालयों की सुरक्षा करते हुए प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाई हैं.

यूएन विशेषज्ञों ने इन रिपोर्टों की तत्काल जांच कराए जाने की मांग की है, “हमें इराक़ी सुरक्षा बलों और हथियारबंद गुटों द्वारा प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध अत्यधिक बल प्रयोग और हिंसा पर हैरानी है. यह समझ से परे है - और हृदय विदारक भी – कि बोलने की आज़ादी और शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होने के अधिकार का इस्तेमाल करने पर इतनी क्रूर कार्रवाई की जाए.”

उन्होंने कहा कि इराक़ सरकार का यह उत्तरदायित्व बनता है कि शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होने के अधिकार की रक्षा की जाए.

 

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