29 अक्टूबर 2019

नेपाल के तराई क्षेत्र में बसे माझी गांव में 104 लोग रहते हैं. ग़रीबी से घिरे इस गांव में सुनयना भी रहती हैं. इस गांव में मिट्टी की एक गंदी सड़क के किनारे मिट्टी, घास और पुआल से बनी झोपड़ियां एक क़तार में खड़ी हैं. ये सड़क चावल के उन खेतों से गुज़रती है जिनसे सुनयना और उसके पड़ोसियों का जीवन-यापन होता है.

इस अल्प विकसित क्षेत्र में अभी तक साफ़-सफ़ाई की बहुत कमी थी. स्थानीय मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, राजू प्रजाद साह का कहना है, "पहले लोगों के पास शौचालय नहीं था, उन्हें लगता ही नहीं था कि शौच करने के लिए उचित स्थान का होना भी ज़रूरी है."

उन्होंने बताया कि किस तरह इस गांव में खुले में शौच करने की पुरानी और आम परंपरा रही है. सड़क के उस पार जिस तालाब में ग्रामीण लोग मछली और पानी के दूसरे जानवर पालते हैं, वो भी अक्सर दूषित रहता था.

राजू प्रजाद साह के मुताबिक़ कुछ समय पहले तक माझी में खुले में शौच करने के कारण दस्त और अन्य संक्रामक रोगों का फैलना आम बात थी.

"विशेष रूप से कमज़ोर युवा, बूढ़े, अकेलेपन, विकलांगता या मानसिक बीमारी के कारण रोग-प्रतिरोधक क्षमता में कमी से पीड़ित लोग इसका शिकार ज़्यादा बनते थे.” 

उनमें भी सबसे ज़्यादा असर बच्चों पर पड़ता था. जल आपूर्ति मंत्रालय के अनुसार हाल के दशकों में हर साल सात से दस हजार नेपाली बच्चों की मौत दस्त और अन्य संबंधित बीमारियों से हुई है.

© WSSCC/Charles Dickson
खुले में शौच की समाप्ति के अभियान में हाथ धोने के फ़ायदों को लेकर भी जागरूकता फैलाई गई.

राष्ट्र-व्यापी प्रयास

कुछ महीने पहले नेपाल में राष्ट्रव्यापी प्रयास शुरू किए गए ताकि लोगों को खुले में शौच के लिए ना जाने और शौचालय का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया जा सके. 

नेपाल सरकार के नेतृत्व में चल रहे इस अभियान से माझी गांव में बड़े बदलाव लाने में सफलता मिली है.

स्थानीय नेता नथुनी प्रसाद कुशवाहा कहते हैं, "शुरुआत में अधिकांश लोग इस योजना के ख़िलाफ़ थे और मानते थे कि यह हमारी संस्कृति के विरुद्ध है, इसलिए हम अपने घरों के बाहर ही शौच करेंगे."

नथुनी प्रसाद कुशवाहा  का कहना है कि खुले में शौच और बीमारी के बीच संबंध के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए सामुदायिक समूह अब घर-घर जा रहे है.

साथ ही, शौचालयों के उपयोग और हाथ धोने जैसी अच्छी आदतों के स्वास्थ्य लाभों को लेकर भी लोगों को प्रेरित किया जा रहा है. “ग्रामीणों को स्वच्छता के लाभ और उनके जीवन पर इसके प्रभाव के बारे में शिक्षा दी गई; धीरे-धीरे बात उनकी समझ में आने लगी.“

© WSSCC/Charles Dickson
माझी गांव में लगे पोस्टर शौचालयों का उपयोग करने और हाथ धोने से जुड़े स्वास्थ्य लाभों का प्रचार करते हैं.

मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के रूप में राजू प्रजाद साह पर नगर पालिका में विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन की ज़िम्मेदारी है. उन्होंने बताया कि खुले में शौच की समाप्ति के लिए तीन महीने के गहन प्रयासों के बाद माझी के हर घर ने अपना शौचालय बनाने का फ़ैसला किया.

उनका कहना था, "अब ये सभी लोग शौचालय का उपयोग कर रहे हैं, और ज़ाहिर है कि तब से अब में अंतर ये है कि अब बीमारियों में कमी आएगी और उनका जीवन स्तर सुधरेगा." 

सुनयना के घर के पीछे एक शौचालय है. उनका कहना है, “मैंने क़र्ज़ लेकर ख़ुद इसे बनाया था. मैंने अभी तक क़र्ज़ पूरी तरह नहीं चुकाया है, लेकिन चावल की पैदावार से एक साल के भीतर इसका भुगतान कर दूंगी.”

घोषणा

30 सितंबर 2019 को नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने देश के सभी 77 ज़िलों को खुले में शौच से मुक्त घोषित कर दिया. इस प्रगति से उत्साहित सरकार ने दीर्घकालिक व्यवहार परिवर्तनों के लिए एक नए राष्ट्रीय अभियान की घोषणा की है.

वर्ष 2011 से संयुक्त राष्ट्र की जल आपूर्ति और स्वच्छता सहयोग परिषद (WSSCC), नेपाली अधिकारियों के साथ मिलकर देश में साफ़-सफ़ाई और स्वच्छता का दृष्टिकोण बदलने का काम कर रही है. 

पिछले पांच वर्षों के दौरान नेपाल में स्वच्छता प्रयासों में विशेष रूप से दक्षिणी तराई के मैदानों पर ध्यान केंद्रित किया गया है.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़ इस क्षेत्र की कठिन सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों के बावजूद, WSSCC द्वारा समर्थित और यूएन-हैबिटैट, ग़ैर-सरकारी संगठनों और सरकारी भागीदारों द्वारा कार्यान्वित इस कार्यक्रम ने केवल आठ वर्षों में आठ तराई ज़िलों में स्वच्छता मानकों को 13 प्रतिशत से बढ़ाकर 98 प्रतिशत तक लाने में मदद की है. 

WSSCC की सू कोट्स ने बताया, ''नेपाल में हम जो प्रगति देख रहे हैं, वह बहुत उत्साहजनक है और इससे साबित होता है कि देश की सरकारों, विकास भागीदारों, ग़ैर-सरकारी संगठनों और स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर काम करने से क्या-कुछ हासिल होना संभव है." 

हर साल 19 नवंबर को विश्व शौचालय दिवस मनाया जाता है.

सू कोट्स के अनुसार, "ये दिन इस तरह की उपलब्धियों का जश्न मनाने और यह सुनिश्चित करने का एक अवसर है कि इस तरह के लाभ क़ायम रहें और हम स्वच्छता की सीढ़ी पर आगे बढ़ने के लिए देशों को सहयोग देते रहें. ये सभी टिकाऊ विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए बहुत आवश्यक है."

संयुक्त राष्ट्र और स्वच्छता

  • सभी के लिए स्वच्छता और स्वच्छ पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना टिकाऊ विकास लक्ष्यों (एसडीजी-6) में से एक है, जो संयुक्त राष्ट्र के 2030 एजेंडे का अभिन्न अंग है
  • खुले में शौच का अंत एसडीजी-6 का विशिष्ट उद्देश्य है
  • संयुक्त राष्ट्र की जल आपूर्ति और स्वच्छता सहयोग परिषद (WSSCC), संयुक्त राष्ट्र की परियोजना सेवा विभाग (UNOPS) से जुड़ी है
  • WSSCC दुनिया के सबसे कमज़ोर और हाशिए पर धकेले हुए लोगों के लिए बेहतर साफ़-सफ़ाई और स्वच्छता की वकालत करता है

 

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