कृषि को टिकाऊ बनाने और किसानों की आय बढ़ाने पर ज़ोर

28 अक्टूबर 2019

अंतरराष्ट्रीय कृषि विकास कोष (International Fund for Agricultural Development) के अध्यक्ष गिल्बर्ट हॉन्गबो इस सप्ताह भारत का दौरा कर रहे हैं. उनकी यात्रा का लक्ष्य भारत में खाद्य प्रणालियों को टिकाऊ बनाना और किसानों की आय बढ़ाने के लिए किए जा रहे साझा प्रयासों को मज़बूती देना है.

इस यात्रा के दौरान उन परियोजनाओं की समीक्षा भी की जाएगी जिनकी मदद से दस लाख से ज़्यादा ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने में सफलता हासिल हुई है.

भारत ने वर्ष 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुना करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है.

आर्थिक प्रगति के बावजूद देश में ग्रामीण स्तर पर ग़रीबी की चुनौती अब भी क़ायम है.

ग्रामीण समुदायों को पर्याप्त खाद्य उत्पादन में सफलता तो मिली है लेकिन उनकी आमदनी बढ़ा पाना अब भी मुश्किल साबित हो रहा है. साथ ही पोषण और जलवायु परिवर्तन से उभरते जोखिमों से निपटना भी एक चुनौती है.

अंतरराष्ट्रीय कृषि विकास कोष (आईफ़ैड) अध्यक्ष गिल्बर्ट हॉन्गबो ने कहा, “जलवायु परिवर्तन से बुरी तरह प्रभावित होने वाले देश के तौर पर, भारत और आईफ़ैड में साझेदारी बहुत अहम हो गई है ताकि ग्रामीण समुदायों की सहनशीलता विकसित की जा सके. भारत लघु किसानों के खाद्य उत्पादन को मज़बूत बनाने और उसे आर्थिक, सामाजिक व पर्यावरणीय रूप से कारगर बनाने के लिए जो प्रयास कर रहा है, आईफ़ैड उसके लिए कृत संकल्पित है.”

Photo: World Bank/Curt Carnemark
लंबा रास्ता तय कर भोजन लेकर अपने घर की ओर जाती महिलाएं. (फ़ाइल)

भारत में फ़िलहाल आईफ़ैड से वित्तीय पोषण प्राप्त सात परियोजनाओं पर काम चल रहा है जिसके तहत राज्य सरकारें किसानों की आमदनी बढ़ाने, बाज़ार व वित्तीय सेवाओं तक उनकी पहुंच सुलभ बनाने और टिकाऊ व जलवायु सहनशील कृषि विकास को बढ़ावा देने के प्रयास कर रहे हैं. इसके अलावा इनका लक्ष्य पोषण के स्तर को भी बेहतर बनाना है.

आईफ़ैड अध्यक्ष अपनी भारत यात्रा के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन, ग्रामीण विकास एवं कृषि व किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, नीति आयोग के उपप्रमुख राजीव कुमार सहित अन्य लोगों से मुलाक़ात करेंगे और भारत सरकार के साझेदारी को मज़बूत बनाने पर चर्चा करेंगे.

आईफ़ैड प्रतिनिधिमंडल ने अपने दौरे की शुरुआत रविवार को महाराष्ट्र से की जहां अध्यक्ष हॉन्गबो उन महिलाओं से मिले जिन्होंने अपने कृषि आधारित व्यापार को आईफ़ैड के ग्रामीण महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम के ज़रिए विकसित किया है.

यह कार्यक्रम औपचारिक रूप से वर्ष 2018 में ही समाप्त हो गया था लेकिन इस कार्यक्रम को लागू करने वाली संस्था, महाराष्ट्र वीमैन डिवेलपमेंट कॉरपोरेशन अब भी महिलाओं को सहायता प्रदान करना जारी रखे हुए है.

इसके तहत सेल्फ़-हेल्प ग्रुप (स्व-सहायता समूह) को मज़बूत करने के साथ-साथ वित्तीय सेवाएँ सुलभ बनाई जा रही हैं. साथ ही कृषि के लिए तकनीकों की ट्रेनिंग, साक्षरता क्रार्यक्रम और व्यवसायिक योजनाओं और विकास के लिए भी ट्रेनिंग दी जाती है.

इस कार्यक्रम के सहारे दस लाख ग्रामीण महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में मदद मिली है. साथ ही सेल्फ़-हेल्प ग्रुप्स को सहायता प्रदान कर 30 करोड़ डॉलर की अतिरिक्त धनराशि का इंतेज़ाम करने में सफलता मिली.

आईफ़ैड एक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्था और संयुक्त राष्ट्र की विशेषीकृत एजेंसी है जिसका मुख्यालय रोम में है.

आईफ़ैड ग्रामीण समुदायों में निवेश करती है और इसका मुख्य लक्ष्य ग़रीबी कम करना, खाद्य सुरक्षा बढ़ाना, पोषण बेहतर बनाना और सहनशीलता को मज़बूत करना है.

1979 से अब तक आईफ़ैड ने भारत में प्रत्यक्ष रूप से 30 ग्रामीण विकास परियजोनाओं में एक अरब 28 करोड डॉलर का निवेश किया है जिसका लाभ 52 लाख घरों को मिला है.

 

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