इसराइल व फ़लस्तीन संघर्ष है - 'कई पीढ़ियों के लिए त्रासदी'

28 अक्टूबर 2019

मध्य पूर्व के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत निकोलाय म्लादेनोफ़ ने कहा है कि इसराइली-फ़लस्तीनी संघर्ष में ज़मीनी स्तर पर ख़राब हालात से विवाद का दो-राष्ट्र समाधान दूर होता जा रहा है. उन्होंने दुख जताया कि समाधान के अभाव में दोनों पक्षों के बीच यह विवाद कई पीढ़ियों को प्रभावित करने वाली एक त्रासदी बन गया है. 

विशेष दूत म्लादेनोफ़ ने सोमवार को सुरक्षा परिषद को जानकारी देते हुए बताया कि मध्य पूर्व क्षेत्र में तेज़ी से बदलते घटनाक्रम से तनाव के नए ख़तरनाक बिंदु उभरते दिखाई दे रहे हैं जिससे अंतरराष्ट्रीय शांति व सुरक्षा को ख़तरा भी बढ़ रहा है.  

विशेष दूत ने बताया कि ऐसी इसराइली बस्तियों की संख्या बढ़ रही है जो अंतरराष्ट्रीय क़ानून के तहत ग़ैरक़ानूनी हैं और शांति प्रक्रिया में बाधक हैं.

सितंबर महीने में इसराइली क़ब्ज़े वाले पश्चिमी तट में नई बस्तियां बनाने की योजना पर काम आगे बढ़ा है जबकि फ़लस्तीनी घर ढहाए या ज़ब्त किए जा रहे हैं.

उन्होंने कहा कि फ़लस्तीनी क्षेत्रों में इसराइली क़ब्ज़ा क़ायम है और वार्ता के ज़रिए दो-राष्ट्र समाधान को पाने में कोई प्रगति नहीं हुई है. “इस ज़मीन पर रह रहे लोगों के लिए यह कई पीढ़ियों से चली आ रही एक त्रासदी है.”

विशेष दूत ने कहा है कि हाल के हफ़्तों में तनाव में कमी आई है और ग़ाज़ा में हिंसा में कमी देखी गई है. इसे संभव बनाने में संयुक्त राष्ट्र और मिस्र ने सक्रिय भूमिका निभाई है.

हालांकि कुछ ही दिन पहले ग़ाज़ा में विरोध प्रदर्शनों के दौरान इसराइली सुरक्षा बलों के हाथों तीन फ़लस्तीनियों की मौत हो गई और 500 से ज़्यादा घायल हुए हैं. उन्होंने स्थानीय प्रशासन के नाम एक अपील जारी करते हुए बल प्रयोग करने में संयम बरतने की बात कही है.

© World Bank/Natalia Cieslik
ग़ाज़ा में एक विस्थापित महिला अपने बच्चे को दूध पिलाते हुए.

उन्होंने कहा कि बच्चों को हिंसा से दूर रखा जाना चाहिए. पश्चिमी तट में हुई झड़पों के दौरान आंसू गैस का इस्तेमाल हुआ जिससे एक शिशु की मौत हो गई.

अब तक कई घटनाओं में 88 से ज़्यादा लोग घायल हुए हैं जिनमें 11 बच्चे हैं. दो इसराइली सुरक्षा बलों सहित चार इसराइली नागरिक भी घायल हुए हैं.   

मानवीय राहत के मोर्चे पर प्रगति के बारे में जानकारी देते हुए विशेष दूत ने कहा कि हाल के समय में किए गए प्रयासों के अच्छे नतीजे देखने को मिले हैं.

क्षेत्र में बिजली की आपूर्ति अब दोगुना हो गई है – वर्ष 2018 के पहले छह महीनों में दिन में साढ़े पाँच घंटे ही बिजली मिल पा रही थी लेकिन 2019 में लगभघ सवा 12 घंटे आपूर्ति हो रही है.

बिजली आपूर्ति बेहतर होने से जल और दूषित जल के शोधन का रास्ता स्पष्ट हुआ है, अस्पतालों में महंगे ईंधन पर निर्भरता घटी है और निजी व्यवसायों और परिवारों को भी कम क़ीमतें चुकानी पड़ रही हैं.

आपात स्वास्थ्य सेवाओं ने ग़ाज़ा में साढ़े चार लाख से ज़्यादा लोगों को फ़ायदा पहुंचा है और दवाइयों व अन्य मेडिकल सामग्री की आपूर्ति से चार लाख लोगों को राहत मिली है.

यूएन की ओर से संचालित अस्थाई रोज़गार के कार्यक्रमों ने 16 हज़ार से ज़्यादा लोगों को नौकरियां मुहैया कराई हैं और आने वाले दिनों में रोज़गार के एक हज़ार अतिरिक्त अवसर पैदा होने की संभावना है.

विशेष दूत के मुताबिक़ मानवीय संकट से निपटना अब भी सर्वोच्च प्राथमिकता है लेकिन वास्तव में ग़ाज़ा में संकट का मूल राजनीति में निहित है.

उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व के अन्य देशों में हालात भी तनावपूर्ण नज़र आ रहे हैं: लेबनान में 15 लाख से ज़्यादा लोग शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा ले रहे हैं और इराक़ में हुए विरोध प्रदर्शनों में कई लोग हताहत हुए हैं. सीरिया में 9 साल से चले आ रहे हिंसक संघर्ष का आम लोगों में व्यापक असर हुआ है और बच्चों की एक पूरी पीढ़ी युद्ध की विभीषिका को नज़दीक से देखते हुए बड़ी हुई है.

“क्षेत्र के लोगों ने बहुत हिंसा और अन्याय देख लिया है. अब एक और युद्ध झेलने की हिम्मत नहीं है...”

विशेष दूत ने आगाह किया कि इसराइल व फ़लस्तीन और मध्य पूर्व में उठे सवालों से महज़ मानवीय आधार पर नहीं निपटा जा सकता. आगे बढ़ने के रास्ते को प्रकाशमान बनाने के लिए एक राजनैतिक दृष्टि की आवश्यकता है.

 

♦ समाचार अपडेट रोज़ाना सीधे अपने इनबॉक्स में पाने के लिए यहाँ किसी विषय को सब्सक्राइब करें
♦ अपनी मोबाइल डिवाइस में यूएन समाचार का ऐप डाउनलोड करें – आईफ़ोन iOS या एंड्रॉयड