पूर्वोत्तर सीरिया में हिंसा के बीच डेढ़ लाख से ज़्यादा विस्थापन को मजबूर

22 अक्टूबर 2019

संयुक्त राष्ट्र के मानवीय राहत कार्यालय (UNOCHA) ने कहा है कि पूर्वोत्तर सीरिया में लगभग दो हफ़्तों से चली आ रही हिंसा के कारण अब तक एक लाख 80 हज़ार से ज़्यादा लोग अपने घरों और शरणगाहों को छोड़ने पर मजबूर हुए हैं. इनमें 80 हज़ार से ज़्यादा बच्चे भी हैं और सभी विस्थापितों को तत्काल मानवीय सहायता की आवश्यकता है.

तुर्की ने 9 अक्टूबर को कुर्द लड़ाकों को निशाना बनाते हुए ज़मीनी कार्रवाई शुरू की थी जिसके तहत हवाई बमबारी और ज़मीनी हमले किए गए.

मानवीय मामलों में समन्वयन के लिए यूएन कार्यालय (UNOCHA) ने मंगलवार को बताया कि पांच दिन से नाज़ुक संघर्षविराम के बावजूद तुर्की की इस कार्रवाई से व्यापक तौर पर मानवीय असर पड़ा है.

मंगलवार को न्यूज़ रिपोर्टों के मुताबिक़ तुर्की के राष्ट्रपति रचप तैयप एर्दोआन ने कहा है कि अगर कुर्द लड़ाकों ने सीमावर्ती इलाक़ों को खाली नहीं किया तो तुर्की के सुरक्षा बल कार्रवाई  फिर से शुरू करेंगे.

 

दाएश लड़ाकों के ख़िलाफ़ कार्रवाई और उन्हें खदेड़ने में अमेरिका के नेतृत्व वाले गठबंधन को सबसे अधिक मदद कुर्द लड़ाकों से ही मिली है लेकिन तुर्की उन्हें आतंकवादी मानता है. हालांकि अमेरिका के अनुरोध पर तुर्की ने फ़िलहाल अपनी कार्रवाई को रोक दिया है.

क्षेत्र मे जारी हिंसा से बुनियादी ढांचे को क्षति पहुंची है – जल आपूर्ति प्रभावित हुए हैं और चार स्वास्थ्य केंद्रों के संचालन पर भी असर पड़ा है.

यूएन एजेंसी का कहना है अल-हस्केह शहर में पांच लाख लोगों को जल की आपूर्ति करने वाला स्टेशन पिछले दस दिनों से बंद पड़ा था जिसे सीरियाई अरब रेड क्रेसेंट और जल व बिजली कर्मचारियों की मदद से अस्थाई रूप से शुरू किया गया है. एजेंसी के मुताबिक इस पृष्ठभूमि में मानवीय ज़रूरतें लगातार बढ़ने की संभावना है.

सीरिया के पूर्वोत्तर हिस्से से हाल ही में लौटने वाले इमान रिज़ा यूएन शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) के लिए काम करते हैं. उनका कहना है कि जल आपूर्ति को बहाल किए जाने से स्थानीय निवासियों को एक गंभीर मानवीय संकट का शिकार बनने से बचा लिया गया है. 

संयुक्त राष्ट्र और उसके साझेदार संगठन सुरक्षा अवरोधों के बावजूद जीवनरक्षक सहायता के दायरे को बढ़ा रहे हैं. राक्क़ा और हस्केह गवर्नरेट में साढ़े पांच लोगों को कंबल और भोजन सामग्री उपलब्ध कराई गई है और सर्दी के मौसम से पहले ज़रूरी सेवाओं का इंतज़ाम किया जा रहा है.

ज़मीन पर विकट हालात की वजह से हज़ारों की संख्या में लोगों ने इराक़ का रुख़ किया है और पिछले सोमवार से अब तक वहां सात हज़ार से ज़्यादा शरणार्थी पहुंचे हैं. लगभग सभी शरणार्थी बरदरश शरणार्थी शिविर में रह रहे हैं जो सीमा से 140 किलोमीटर दूर है.

सीरियाई शरणार्थियों में क़रीब तीन-चौथाई महिलाएं व बच्चे हैं जिनमें से कुछ को प्राथमिक चिकित्सा और मनो-सामाजिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है. प्रभावित लोग लंबे समय से बम-धमाकों की गूंज और हिंसा से उपजे भय के साथ रहने के लिए मजबूर थे जिसका उनके मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ा है.  

यूएन शरणार्थी एजेंसी और साझेदारों ने उनके लिए गर्म भोजन, शिविर तक पहुंचने, शरण और संरक्षण सेवाओं का इंतज़ाम किया है और अकेले बच्चों और विशेष ज़रूरतों वाले लोगों का ख़ास तौर पर ध्यान रखा जा रहा है.

बरदरश कैंप में जल और बिजली की आपूर्ति के साथ-साथ सीवर लाईन की भी व्वयस्था है लेकिन शरणार्थियों की संख्या बढ़ने की वजह से वहां बदलाव लाने होंगे.

अब तक जान बचाने के लिए इराक़ पहुंचने वाले सीरियाई शरणार्थियों की संख्या बढ़कर सवा दो लाख से ज़्यादा हो गई है.

 

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