चुनौतीपूर्ण बदलाव संभव बना रही हैं लड़कियां

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि विश्व में एक अरब से ज़्यादा युवा लड़कियां ऐसे बदलावों का वाहक बन रही हैं जो स्वत:स्फूर्त हैं और जिन्हें आगे बढ़ने से रोका नहीं जा सकता है. 'अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस' के अवसर पर अपने संदेश में उन्होंने कहा कि बचपन में शादी किए जाने, पढ़ाई पूरी ना हो पाने और समान अवसरों से वंचित होने की चुनौतियों के बावजूद वे प्रगति पथ पर अग्रसर हैं.
महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने इस दिवस पर जारी अपने संदेश में कहा कि 18 साल से कम उम्र की लड़कियां हर दिन रूढ़ीवादिताओं को चुनौती दे रही हैं, बाधाएँ तोड़ रही हैं और उनके जीवन को प्रभावित करने वाले मुद्दों से निपटने के लिए आंदोलन का नेतृत्व कर रही हैं. अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस हर साल 11 अक्टूबर को मनाया जाता है.
Girls have the right to reach their full potential. Every year of secondary schooling a girl receives boosts her earning power by as much as 25 per cent.On this #DayOfTheGirl, we celebrate achievements by, with and for girls in the last 25 years and demand more. pic.twitter.com/GqYDs4dice
antonioguterres
यूएन प्रमुख ने कहा कि लड़कियां अपने प्रयासों में स्वत:स्फूर्त साबित हो रही हैं जिन्हें अब रोका नहीं जा सकता, और यही इस वर्ष इस दिवस की थीम रेखांकित करती है.
इन प्रयासों के केंद्र में कम उम्र में शादी कराए जाने, शिक्षा हासिल करने में मौजूद खाई को पाटने, हिंसा से निपटने और जलवायु संकट के विरुद्ध मज़बूती से खड़े होना है.
महिलाओं और लड़कियों के सशक्तिकरण के लिए वैश्विक प्रयासों के फलस्वरूप वर्ष 1995 में ‘Beijing Declaration and Platform for Action’ पारित किया गया.
उनके सशक्तिकरण का यह ब्लूप्रिंट चीन में चौथी ‘वर्ल्ड कांफ्रेंस ऑन वीमैन’ का नतीजा था जिसमें 30 हज़ार पुरुषों और महिलाओं ने हिस्सा लिया था.
इस ऐतिहासिक नीति एजेंडा को लागू किए जाने के बाद से ही “ज़्यादा संख्या में लड़कियां स्कूल जा रही हैं और पढ़ाई पूरी कर रही हैं, कम संख्या में बालिकाओं की शादी हो रही है या वे मां बन रही हैं, और कार्यक्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए हुनर विकसित कर रही हैं.”
संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) के आंकड़े दर्शाते हैं कि पिछले एक दशक में ऐसी लड़कियों की संख्या 15 फ़ीसदी तक घटी है जिनकी बचपन में ही शादी करा दी जाती थी.
साथ ही वर्ष 2000 से 2016 के बीच प्राथमिक स्तर पर शिक्षा ना हासिल करने वाली लड़कियों की संख्या 5 करोड़ 80 लाख से घटकर 3 करोड़ 40 लाख रह गई है.
इन सफलताओं के बावजूद लड़कियों को उनकी पूर्ण संभावना तक पहुंचने से अब भी रोका जाता है. “अब यह स्वीकार नहीं किया जा सकता कि लड़कियों को सपने देखने से रोका जाए या उन्हें विश्वास दिलाया जाए कि वे पूरे नहीं हो सकते.”
यूनीसेफ़ के अनुसार कई कारणों की वजह से उनके भविष्य पर पहरे अब भी लगते हैं. 20 करोड़ से ज़्यादा लड़कियां व महिलाएं विश्व भर में जननांग विकृति का शिकार होती हैं, मानव तस्करी का शिकार हर चार में से तीन पीड़ित महिलाएं व लड़कियां होती हैं और संकटग्रस्त इलाक़ों में रह रही महिलाओं की व्यथा भावी पीढ़ियों के भविष्य पर भी असर डाल सकते हैं.
युवा लड़कियों के भविष्य को उजला बनाने के लिए उनके स्वास्थ्य, सुरक्षा और 21वीं सदी के हुनर में प्रयासों और निवेश की आवश्यकता पर बल दिया गया है.
“अगर सभी लड़कियां और लड़के अपनी माध्यमिक शिक्षा पूरी करें तो 42 करोड़ से ज़्यादा लोगों को ग़रीबी से बाहर निकाला जा सकता है. इसके लाभ अन्य पीढ़ियों को भी मिलेंगे.”
लड़कियों को सशक्त बनाने के प्रयासों को शुक्रवार को उस समय चुनौती मिली जब यूनीसेफ़ और एक स्किनकेयर ब्रैंड में कई सालों के लिए साझेदारी की घोषणा की गई है.
टोकियो स्थित शिसाइदो कंपनी लिमिटेड का त्वचा की देखभाल और सौंदर्य प्रसाधन का ब्रैंड (Clé de Peau Beauté) यूएन एजेंसी के लैंगिक समानता कार्यक्रम को 87 लाख डॉलर की मदद देगा.