युवाओं में आत्महत्या के बढ़ते स्तर पर गहरी चिंता

10 अक्टूबर 2019

दुनिया भर में क़रीब आठ लाख लोग हर साल आत्महत्याओं की वजह से मौत के मुँह में चले जाते हैं - हर चालीस सेकंड में एक व्यक्ति की मौत. विश्व स्वास्थ्य संगठन के आँकड़ों के अनुसार 15 से 29 वर्ष की उम्र के युवाओं में मौत का यह दूसरा सबसे बड़ा कारण है. गुरूवार 10 अक्तूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर आत्महत्याओं को रोकने के प्रयासों के बारे में जागरूकता बढ़ाने पर ही ज़ोर दिया गया है.

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के मौक़े पर जारी एक वीडियो संदेश में कहा है कि मानसिक स्वास्थ्य बहुत लंबे समय तक अनदेखी रहा है. इस पर तुरंत ध्यान दिए जाने की ज़रूरत है, ये एक ऐसा विषय है जिसका संबंध सभी से है. 

महासचिव का कहना था, "हमें सेवाओं में और ज़्यादा निवेश करना होगा. और हमें ऐसे कारणों को रद्द करना होगा जिनकी वजह से लोग ज़रूरत पड़ने पर चिकित्सा मदद लेने से कतराते हैं. मैं अपने मन की बात कह रहा हूँ क्योंकि मुझे इस विषय पर चिंता है."

उन्होंने कहा, "मानसिक स्वास्थ्य के बिना कोई स्वास्थ्य नहीं है."

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2019 के अंतरराष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य दिवस को समर्थन दिया है. संगठन का कहना है कि हर वर्ष दुनिया भर में जितनी मौतें युद्ध और मानव हत्याओं की वजह से होती हैं, उनकी कुल संख्या से भी ज़्यादा मौतें आत्महत्याओं के कारण होती हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के सितंबर 2019 में प्रकाशित ताज़ा आँकड़ों में कहा गया है कि विकासशील देशों में मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्याओं के बीच सीधा संबध देखा गया है. इसके साथ ही किसी मुसीबत की हालत में होने वाले सदमे, हिंसा और दुर्व्यवहार का सामना करना भी आत्मघाती बर्ताव से बहुत गहराई से जुड़ा देखा गया है. 

संयुक्त राष्ट्र और उसके साझीदार संगठन अब से पहले भी विश्व दिवस पर मानसिक स्वास्थ्य के विभिन्न पहलुओं पर ध्यान दिलाते रहे हैं.

इनमें बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य, कामकाज के स्थानों पर मानसिक स्वास्थ्य, विभिन्न मुद्दों या विषयों पर दोषारोपण और मनोवैज्ञानिक प्राथमिक चिकित्सा तक जैसे विषय शामिल हैं. साथ ही ये भी शामिल है कि किसी पीड़ित व्यक्ति को किस तरह से समर्थन व सहायता दी जाए.

इस वर्ष भी विश्व स्वास्थ्य संगठन और साझीदार संगठनों ने सितंबर में मनाए जाने वाले विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस का ही संदेश दोहराया है. इस मौक़े पर 40 सेकंड की एक एक्शन कैंपेन चलाई गई है जिसका मक़सद दुनिया भर में आत्महत्या और उसकी रोकथाम के तरीक़ों और उपायों के बारे में जागरूकता बढ़ाना है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार अभी तक सिर्फ़ गिने-चुने देशों ने ही आत्महत्याओं की रोकथाम को अपनी स्वास्थ्य प्राथमिकताओं में शामिल किया है. सिर्फ़ 38 देशों ने राष्ट्रीय स्तर पर रोकथाम रणनीति बनाई है. 

निसंदेह आत्महत्याओं को रोका जा सकता है, फिर भी मानसिक स्वास्थ्य के इर्द-गिर्द सामाजिक अंधविश्वास और दोषारोपण के चलन की वजह से समाजों में अब भी इस मुद्दे को सही तरह से नहीं समझा गया है.

  • इस विषय पर ज़िम्मेदार मीडिया रिपोर्टिंग
  • स्कूल में ही स्थिति को समझा जाए.
  • नसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और मादक पदार्थों के सेवन करने वाले लोगों में लक्षणों की शुरूआती स्तर ही निशानदेही और इलाज किया जाए
  • आत्मघाती व्यवहार की निशानदेही करने और उसको समझने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों का विशेष प्रशिक्षण
  • आत्महत्या का प्रयास करने वाले लोगों को मुहैया कराई जा रही चिकित्सा सेवा की निगरानी, साथ ही सामुदायिक सहायता का इंतेज़ाम.

संयुक्त राष्ट्र ने अपने कर्मचारियों के लिए स्वस्थ कामकाजी माहौल मुहैया कराने के लिए 2018 में एक फ्रेमवर्क लागू किया था. इसके तहत संगठन के हज़ारों कर्मचारियों के लिए मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित संसाधन मुहैया कराए गए हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2008 में मानसिक स्वास्थ्य अंतर कार्रवाई कार्यक्रम (एमएच-गैप) शुरू किया था. संगठन के 2013-2020 की कार्रवाई योजना में विश्व स्तर पर आत्महत्याओं की दर में 2020 तक 10 फ़ीसदी की कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है. ये संगठन के टिकाऊ विकास लक्ष्यों से मेल खाता है जिनमें ख़ुदकुशी दर में 2030 तक एक तिहाई की कमी लाने की लक्ष्य रखा गया है.

इस मामले में युवाओं तक पहुँच बढ़ाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनीसेफ़) के साथ हाथ मिलाया है. इन प्रयासों के तहत 7 नवंबर में बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे पर एक विश्व सम्मेलन बुलाया गया है. 

इटली के फ्लोरेंस में तीन दिन के इस सम्मेलन में दुनिया भर के विशेषज्ञ और युवा पैरोकार शिरकत करेंगे. इसमें बच्चों और युवाओं के लिए उपलब्ध मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में मौजूद खाई पर विचार किया जाएगा.

 

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