कॉंगो लोकतांत्रिक गणराज्य: राजनैतिक तबके से बदलाव की बयार के समर्थन की अपील

9 अक्टूबर 2019

कॉंगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) में संयुक्त राष्ट्र की प्रमुख लैला ज़ेरोगी ने सुरक्षा परिषद को देश में हालात की जानकारी देते हुए बताया है कि हाल के दिनों में सकारात्मक प्रगति अगर आगे भी जारी रही तो देश की कायापलट करने और वहां स्थिरता लाने में मदद मिलेगी.  उन्होंने देश के राजनैतिक तबके से परिवर्तन की इस हवा को समर्थन देने का आह्वान किया है. 

जनवरी 2019 में कॉंगो लोकतांत्रिक गणराज्य में नए राष्ट्रपति फ़ेलिक्स त्शिसिकेदी ने पदभार संभाला था. डीआरसी में यूएन प्रमुख ने बुधवार को उनके राष्ट्रपति बनने के बाद देश में आए बदलाव के बारे में जानकारी साझा की.

ब्रिटेन से वीडियो कॉंफ्रेंसिंग के ज़रिए सुरक्षा परिषद को संबोधित करते हुए लैला ज़ेरोगी ने कहा कि, “क्षेत्रीय कूटनीतिक पहल शुरू की गई हैं, एक गठबंधन सरकार का गठन हुआ है जिसका महत्वाकांक्षी कार्यक्रम देश में स्थिरता लाना, प्रशासन को बेहतर करना और देश में आर्थिक विकास के स्तर को ऊर्जा प्रदान करना है.”

“यह बेहद अहम है कि डीआरसी में संपूर्ण राजनैतिक वर्ग बदलाव की इस बयार का समर्थन करे और इस सकारात्मक विकास को मज़बूती दे.”

हथियारबंद गुटों का ख़तरा बरक़रार

कॉंगो लोकतांत्रिक गणराज्य में यूएन मिशन (MONUSCO) के 20 हज़ार शांतिरक्षक देश के सुरक्षा बलों को समर्थन दे रहे हैं ताकि वहां पूर्वी हिस्से में सक्रिय हथियारबंद गुटों से निपटा जा सके – इनमें से कुछ विदेशी मूल के लड़ाके हैं.

हाल के दिनों में आम लोगों पर हुए हमलों पर उन्होंने चिंता जताई. इन हमलों में इतुरी प्रांत में 14 लोगों का सिर धड़ से अलग कर दिया गया जिनमें 11 बच्चे थे.

इस बीच उत्तरी रवांडा में सीमा पार से हुआ एक हमला दर्शाता है कि ये हथियारबंद गुट क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बड़ा ख़तरा बन गए हैं.

“मेरा मज़बूत विश्वास है कि सैन्य माध्यमों से सुरक्षा ख़तरों से निपटने के अलावा देश में प्रणाली को और ज़्यादा मज़बूत बनाना होगा, जिसमें सुरक्षा और बचाव सैक्टर को पेशेवर और न्यायपालिका को सशक्त बनाना है. इससे सरकार को इन ख़तरों से निपटने में सक्षम बनाया जा सकेगा.”

इबोला से निपटने में प्रगति

पूर्वी डीआरसी में हथियारबंद गुटों का आतंक व्याप्त है लेकिन उसके अलावा यह क्षेत्र इबोला वायरस के मोर्चे पर भी जूझ रहा है जिससे अगस्त 2018 से अब तक दो हज़ार लोगों की मौत हो चुकी है.

इबोला से निपटने के प्रयासों में बेहतर तालमेल देखा जा रहा है जिससे नए मामलों की संख्या में कमी आई है लेकिन इसकी चुनौती अब भी बरक़रार है.

देश में यूएन प्रमुख ज़ेरोगी ने बताया कि सामुदायिक स्तर पर अब भी इबोला की रोकथाम के उपायों को स्वीकार किया जाना चुनौती बना हुआ है. इस नज़रिए से उन्होंने स्थानीय जनता की बचाव, स्वास्थ्य, साफ़-सफ़ाई और शिक्षा से जुड़ी ज़रूरतों पर ध्यान केंद्रित करने की अहमियत पर बल दिया है.

हथियारबंद गुटों द्वारा हिंसा, विभिन्न समुदायों में आपसी संघर्ष और इबोला बीमारी की वजह से देश के कुछ हिस्सों में बदहाल मानवीय हालात हैं.

एक करोड़ 30 लाख लोग खाद्य संकट का भी सामना कर रहे हैं और 45 लाख बच्चे कुपोषण का शिकार हैं.

 

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