संयुक्त राष्ट्र के सामने नक़दी का गंभीर संकट

8 अक्टूबर 2019

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने सदस्य देशों को सचेत किया है कि यूएन के सामने नक़दी की कमी का गंभीर संकट मंडरा रहा है. महासचिव की ओर से जारी बयान के अनुसार सदस्य देशों ने अगर अपनी वार्षिक बक़ाया राशि का भुगतान नहीं किया तो संयुक्त राष्ट्र के कामकाज और सुधार प्रक्रिया के समक्ष जोखिम पैदा हो जाएगा.

महासचिव एंतोनियो गुटेरेश के प्रवक्ता की ओर से जारी बयान के अनुसार यूएन प्रमुख ने सदस्य देशों को एक पत्र लिख कर बताया है कि संयुक्त राष्ट्र को पिछले एक दशक में पहली बार इतने गंभीर वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है.

संगठन के सामने आरक्षित निधि में रखी गई नक़दी के अक्तूबर महीने के अंत तक ख़र्च हो जाने का ख़तरा मंडरा रहा है जिसकी वजह से कर्मचारियों को वेतन और अन्य सेवाओं के लिए भुगतान का संकट खड़ा हो सकता है.

193 सदस्य देशों में से अब तक 130 से ज़्यादा देशों ने तयशुदा वार्षिक बक़ाया राशि का भुगतान किया है लेकिन यूएन प्रवक्ता स्टेफ़ान दुजेरिक ने कहा है कि अन्य देशों को भी तत्काल पूर्ण भुगतान करना होगा.

उनका कहना है कि यही एक रास्ता है जिसके ज़रिए इस मुश्किल से निपटा जा सकता है वरना दुनिया भर में संगठन के कामकाज में व्यवधान आने का जोखिम है. “महासचिव ने सरकारों से इस संकट के अंतर्निहित कारणों को दूर करने और वित्तीय सेहत सुधारने के लिए क़दमों पर सहमति बनाने के लिए कहा है.”

सितंबर महीने के अंत तक तयशुदा राशि का 70 फ़ीसदी हिस्से का ही भुगतान हो पाया है जबकि पिछले वर्ष इस समय तक 78 प्रतिशत राशि का योगदान किया जा चुका था.

बयान के मुताबिक़ अगर इस साल के शुरू से ख़र्चों में कटौती नहीं की जाती तो नक़दी की कमी अक्तूबर महीने में बढ़कर 60 करोड़ डॉलर हो जाती.

इस स्थिति में संगठन के पास महासभा में जनरल डिबेट और अन्य उच्चस्तरीय बैठकों के इंतज़ाम के लिए पर्याप्त धनराशि नहीं होती.

“आज की तारीख़ तक हम अपने कामकाज में बड़े व्यवधानों को किसी तरह रोक पाए हैं... लेकिन ये प्रयास पर्याप्त नहीं है. अगर और ज़्यादा सदस्य देशों ने बजट की बक़ाया राशि का योगदान नहीं दिया तो ऐसा हो सकता है कि सचिवालय वेतन और सामग्री व सेवाओं का नवंबर महीने में भुगतान ना कर पाए.”

पांचवी समिति (Fifth Committee) पर बजट की रूपरेखा तय करने की ज़िम्मेदारी है. यूएन महासभा में समिति को संबोधित करते हुए महासचिव ने कहा कि “इस महीने हम इस दशक के सबसे गहरे घाटे में पहुंच जाएंगे.”

“संगठन एक गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रहा है... एक गंभीर नक़दी संकट. समीकरण का अंदाज़ा लगाना आसान है: नक़दी के अभाव में बजट को सही ढंग से लागू नहीं किया जा सकता.”

यूएन प्रमुख के अनुसार बजट को योजनाबद्ध तरीक़े से अमल में लाने के बजाय नक़दी की उपलब्धता के हिसाब से लागू किया जा रहा है.

नक़दी कम होने की वजह से नए पदों पर नियुक्तियाँ बेहद सीमित संख्या में हो रही हैं और और ग़ैर-वैतनिक ख़र्च भी सीमित हो गया है. इससे यूएन के कामकाज और नतीजों पर ध्यान केंद्रित करने के प्रयासों पर असर पड़ रहा है.

पिछले सप्ताह यूएन प्रमुख ने कहा था कि रिकॉर्ड स्तर पर नक़दी की कमी होने की वजह से उन्हें असाधारण क़दम उठाने पर मजबूर होना पड़ा है.

रिक्त पड़े पदों पर नियुक्ति नहीं हो पा रही है, यात्राएं तभी की जा रही हैं जब वे बेहद ज़रूरी हों, बैठकें टाली या स्थगित की जा रही हैं. इन कारणों से यूएन के कामकाज पर ना सिर्फ़ न्यूयॉर्क, जिनीवा, वियना और नैरोबी कार्यालयों बल्कि क्षेत्रीय आयोगों पर भी असर होगा.

संयुक्त राष्ट्र बजट मुद्दे पर ज़्यादा जानकारी इन लिंक्स पर उपलब्ध है: 

  • नियमित रूप से तय बजट राशि का भुगतान करने वाले सदस्य देशों की सूची
  • मैनेजमेंट स्ट्रैटेजी, पॉलिसी एंड कम्पलाएंस की अवर महासचिव कैथरीन पोलार्ड और प्रोग्राम प्लानिंग, फ़ाइनेंस एंड बजट के लिए सहायक महासचिव चंद्रमौली रामानाथन की प्रेस वार्ता
  • संगठन के वित्तीय हालात पर मैनेजमेंट स्ट्रैटेजी, पॉलिसी एंड कम्पलाएंस की अवर महासचिव कैथरीन पोलार्ड का पांचवी समिति (Fifth Committee) को संबोधन
  • संगठन के वित्तीय हालात पर मैनेजमेंट स्ट्रैटेजी, पॉलिसी एंड कम्पलाएंस की अवर महासचिव कैथरीन पोलार्ड की ओर से जारी वक्तव्य

 

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