'राष्ट्रवाद का ख़तरनाक रूप' राष्ट्रविहीनता से निपटने में बड़ा अवरोध

7 अक्टूबर 2019

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) के प्रमुख फ़िलिपो ग्रैन्डी ने कहा है कि नफ़रत भरी बोली व भाषणों और पथ से भटके हुए राष्ट्रवाद की वजह से राष्ट्रविहीनता की समस्या से निपटने में मुश्किलें पेश आ रही हैं. उन्होंने ध्यान दिलाया कि यह एक ऐसे समय में हो रहा है जब सार्वजनिक स्तर पर इस चुनौती को पहचाना जा चुका है और लोग इस समस्या को भली-भांति समझते हैं.

विश्व के कई देशों में लाखों लोग राष्ट्रविहीनता की स्थिति में रहने को मजबूर हैं और उन्हें इससे उबारने के उद्देश्य से जिनीवा में सोमवार को एक बैठक आयोजित की गई. 

इस बैठक को संबोधित करते हुए यूएन एजेंसी प्रमुख ग्रैन्डी ने कहा कि इस विषय में और ज़्यादा प्रयासों की आवश्यकता है. पांच वर्ष पहले ही यूएन शरणार्थी एजेंसी ने राष्ट्रविहीनता के अंत के लिए #IBelong मुहिम शुरू की थी.  

“इस संबंध में प्रगति अभी सुनिश्चित नहीं की जा सकी है: राष्ट्रवाद के तक़लीफ़देह स्वरूपों और शरणार्थी व प्रवासी विरोधी भावनाओं का ग़लत इस्तेमाल ऐसी ताक़तवर धाराएं हैं जिनका इस्तेमाल जानबूझकर किया जा रहा है जिससे प्रगति की दिशा उल्टी हो जाएगी.”

इस अवसर पर यूएन शरणार्थी एजेंसी की सदभावना दूत केट ब्लांचेट ने सदस्य देशों से आग्रह किया कि निराशा में रह रहे राष्ट्रविहीनों की मदद के जो प्रयास यूएन की ओर से किए जा रहे हैं उन्हें मज़बूती दी जानी चाहिए. 

ऑस्ट्रेलिया में जन्मी और हॉलीवुड में अभिनेत्री केट ब्लांचेट ने पीड़ितों की मुश्किलों को बयां करते हुए कहा कि हर दिन छोटी-छोटी चीज़ें उनकी पहुंच से बाहर बनी रहती हैं. इनमें वे सभी बातें शामिल हैं जिन्हें राष्ट्रीय पहचान वाले लोग आम जीवन का अटूट हिस्सा मानकर चलते हैं – जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंक खाता और यात्रा. उन्होंने कहा कि यह बिलकुल अदृश्य होने जैसा है.

लेबनान की एक युवती की व्यथा को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि देश के नियमों की वजह से एक मां अपनी नागरिकता अपनी बेटी को इसलिए हस्तांतरित नहीं कर पाई क्योंकि उनके पति एक ऐसे अल्पसंख्यक समुदाय से आते थे जिसको मान्यता नहीं मिली हुई है. केट ब्लांचेट ने इस स्थिति को दिल दहला देने वाली और अमानवीय क़रार दिया है.

“डॉक्टर बनने की उसकी आकांक्षा नौ वर्ष की आयु में ही मद्धम पड़ती जा रही है क्योंकि उनके हाई स्कूल जाने की उम्मीदें ना के बराबर हैं. मैं, एक अभिभावक के तौर पर, उनके माता-पिता की हताशा और अपराध-बोध को महसूस कर सकती हूं – और स्थिति को ना बदल पाने की वजह से उपजी शक्तिहीनता की उस भावना को भी.”

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि कुछ सीधे-सादे तरीक़ों से दुनिया राष्ट्रविहीनता का अंत कर सकती है - मसलन, लैंगिक भेदभाव वाले क़ानूनों को हटाकर.

सिएरा लियोन और मेडागास्कर ने हाल ही में ऐसे क़ानूनों को हटाने का संकल्प लिया है.

बांग्लादेश के दक्षिणी हिस्से में शरणार्थी संकट का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दशकों से यह समस्या बनी हुई है.

उनके मुताबिक़ राष्ट्रविहीनता के कारण रोहिंज्या समुदाय की समस्या व्यापक रूप धारण कर चुकी है जो परेशान कर देने वाला है.

म्यांमार में सैन्य अभियान और मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामलों के बीच लाखों रोहिंज्या शरणार्थियों ने बांग्लादेश में शरण ली हुई है.

इससे पहले संयुक्त राष्ट्र की उपमहासचिव आमिना मोहम्मद ने यूएन शरणार्थी एजेंसी को बताया कि राष्ट्रविहीनता और जबरन विस्थापन की समस्या से निपटने के लिए उन्हें जन्म देने वाली समस्याओं से निपटना होगा: विकास चुनौतियां, कमज़ोर शासन और जनसंख्या समूहों का समावेशन ना होना.

टिकाऊ विकास के 2030 एजेंडा में इन उद्देश्यों पर ध्यान दिया गया है जिसमें माना गया है कि अगर वंचित जनसमूहों को सामाजिक और आर्थिक विकास प्रक्रिया का लाभ मिलता है तो इससे लाभ होगा.

उन्होंने ध्यान दिलाया कि जो देश शरणार्थियों और प्रवासियों को शरण दे रहे हैं, विकास के नज़रिए से उन्हें ठोस सहारे की आवश्यकता है.

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी ने वर्ष 2024 तक राष्ट्रविहीनता का अंत करने का संकल्प लिया है और लगभग सभी देश इस संबंध में यूएन एजेंसी के साथ मिलकर प्रयास करने के लिए तैयार हो गए हैं.

 

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