इमरान ख़ान: कश्मीर मुद्दे पर भारत के साथ खुले टकराव की चेतावनी

27 सितम्बर 2019

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने शुक्रवार, 27 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए पड़ोसी देश भारत के साथ खुले टकराव की स्थिति पैदा होने की चेतावनी दी. महासभा के 74वें सत्र की उच्चस्तरीय जनरल डिबेट में शिरकत करते हुए उन्होंने कहा कि भारत जब विवादित क्षेत्र कश्मीर में लगभग दो महीनों से लगाया हुआ कर्फ्यू उठाएगा तो वहाँ ख़ूनख़राबा होने के बहुत आसार हैं.

प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा, “जब कोई परमाणु संपन्न देश युद्ध लड़ता है तो उसके परिणाम सीमाओं से भी परे तक होते हैं. उसके नतीजे पूरी दुनिया तक होंगे.”

“ये कोई धमकी नहीं है... ये एक वाजिब चिंता है. हम कहाँ जा रहे हैं? मैं यहाँ इसलिए आया हूँ क्योंकि ये स्थिति संयुक्त राष्ट्र के लिए भी एक परीक्षा की घड़ी है. आपने कश्मीर के लोगों को आत्मनिर्णय का अधिकार दगिया था. आपकी कुछ ज़िम्मेदारी बनती है.”

इमरान ख़ान ने महासभा को अपने संबोधन में अनेक मुद्दों का ज़िक्र किया जिनमें जलवायु परिवर्तन, विकास, असमानता और बढ़ते इस्लामोफ़ोबिया के ख़तरे जैसे मुद्दे शामिल थे. पाकिस्तानी नेता ने कहा कि जब वो पहली बार सत्ता में आए थे तो उन्होंने ये संकल्प लिया था कि उनका देश शांति के लिए काम करेगा – पूरी दुनिया में, क्षेत्र में और ख़ासतौर से भारत के साथ.

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा कि शुरू में उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बातचीत की थी और दोनों देशों की साझा चुनौतियों को दूर करने के लिए साथ मिलकर काम करने की पेशकश की थी. इनमें ग़रीबी और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियाँ भी शामिल हैं. इस तरह काम करके आपसी भरोसे पर क़ायम रिश्ते बनाए जा सकते थे. लेकिन अफ़सोस की बात है कि उस कोशिश के कोई सकारात्मक नतीजे नहीं निकले, किसी भी क्षेत्र में.

दोनों देशों के बीच संबंध तब बहुत ख़राब हो गए जब कश्मीर में तनाव बढ़ गया था. इनमें फ़रवरी 2019 में भारत प्रशासित कश्मीर में हुई वो घटना भी शामिल थी जिसमें भारतीय सुरक्षा बलों के एक काफ़िले पर एक आत्मघाती हमला हुआ था और भारतीय सुरक्षा बलों के अनेक सदस्यों मौत हो गई थी.

प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा कि हाल के समय में ये स्पष्ट हो चुका है कि भारत पाकिस्तान के ख़िलाफ़ एक “एजेंडे” पर काम कर रहा है, ये ख़ासतौर से तब स्पष्ट हो गया जब 5 अगस्त को भारत ने तब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों को नकार दिया कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त कर दिया था. भारत ने इसके साथ ही कश्मीर में तैनात सुरक्षा बलों की संख्या में एक लाख 80 हज़ार का इज़ाफ़ा कर दी जिसके बाद वहाँ तैनात सुरक्षा बलों की कुल संख्या लगभग नौ लाख हो गई है.

उन्होंने कहा, “और उन्होंने कश्मीर में 80 लाख लोगों को कर्फ़्यू में घेर दिया.”

प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने आगे कहा, “घमंड लोगों से क्रूर व बेवकूफ़ी वाले काम करवाता है. इसलिए जब कर्फ़्यू हटाया जाएगा तो [प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी] क्या करेंगे. क्या वो सोचते हैं कि कश्मीर के लोग यथास्थिति को ख़ामोशी से स्वीकार कर लेंगे.

इमरान ख़ान ने कहा, “जब कर्फ़्यू हटाया जाएगा तो ख़ून-ख़राबा होगा. क्या उन्होंने सोचा है कि तब क्या होगा. कश्मीर के लोग सड़कों पर निकलेंगे तब भारतीय जवान क्या करेंगे. वो कश्मीरी लोगों पर गोलियाँ चलाएंगे.”

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने आगाह करते हुए कहा कि परिणाम ये होगा कि और भी ज़्यादा कश्मीरी विद्रोह का रास्ता अपनाएंगे. और आप सुनिए, भारत इसके लिए पाकिस्तान को ज़िम्मेदार ठहराएगा... और ‘इस्लामी आतंकवाद’ का जुमला जारी रहेगा...

“मुस्लिम दुनिया में कहीं किसी स्थान पर, “कोई हथियार उठाएगा. अगर ख़ून-ख़राबा होता है, मुस्लिम हथियार उठाएंगे, और ये इस्लाम की वजह से नहीं होगा, बल्कि वो देखेंगे कि जब मुसलमानों का मामला आता है तो न्याय नहीं हो रहा है.”

प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा कि अगर चीज़ें इसी तरह से होती रहीं तो दो परमाणु शक्ति सम्पन्न पड़ोसी देशों के बीच पूर्ण युद्ध को टालना असंभव होगा. “लेकिन उससे पहले कि हम उस दिशा में और आगे बढ़ें, संयुक्त राष्ट्र पर एक ज़िम्मेदारी है. इसीलिए तो 1945 में संयुक्त राष्ट्र वजूद में आया था – [इसी तरह के हालात] को टालने के लिए. भारत को अमानवीय कर्फ़्यू तुरंत हटाना होगा.”

 

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