क़रीब पाँच अरब लोग हो जाएंगे स्वास्थ्य केयर से बाहर

22 सितम्बर 2019

संयुक्त राष्ट्र की एक ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि देशों ने तमाम इंसानों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता में अंतर को ख़त्म करने के लिए ठोस प्रयास नहीं किए तो 2030 तक लगभग 5 अरब लोगों को स्वास्थ्य देखभाल मयस्सर नहीं होगी. 

रविवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी इस रिपोर्ट को नाम दिया गया है – “प्राइमरी हैल्थ केयर ऑन द रोड टू यूनिवर्सल हैल्थ कवरेज”.

इस रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि निम्न और मध्यम आय वाले देशों में प्राइमरी स्वास्थ्य सेवाओं पर लगभग 200 अरब डॉलर का वार्षिक ख़र्च निर्धारित करके क़रीब छह करोड़ लोगों की ज़िंदगी बचाई जा सकती है. 

यूनिवर्सल हैल्थ कवरेज (यूएचसी) रिपोर्ट दिखाती है कि वर्ष 2000 के बाद से कुल मिलाकर स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता में सुधार आया है मगर ग़रीब और संघर्षों और युद्धों से प्रभावित देशों में स्वास्थ्य सेवाओं उपलब्धता में भारी अंतर देखा गया है.

विशेष रूप में ग्रामीण इलाक़ों में समुचित बुनियादी ढाँचे अभाव में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बहुत कम देखी गई है. वहाँ स्वास्थ्यकर्मियों की भी कमी होती है और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता भी ख़राब होती है. 

विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने यह रिपोर्ट जारी करते हुए कहा, “अगर हम वाक़ई सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज और लोगों के जीवन में सुधार लाने के लिए बहुत गंभीर हैं, तो हमें प्राइमरी हैल्थ केयर के बारे में भी बहुत गंभीर होना पड़ेगा.”

“इसका मतलब है कि टीकाकरण, प्रसव व मातृत्व केयर, स्वस्थ जीवन शैली जैसी ज़रूरी स्वास्थ्य सेवाएँ लोगों के घरों के जितना नज़दीक हो सके, उपलब्ध होनी चाहिए. ये भी सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि लोगों को बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अपनी जेबों से भुगतान ना करना पड़े.”

ये रिपोर्ट यूनिवर्सल हैल्थ कवरेज पर सोमवार को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में होने वाले उच्चस्तरीय सम्मेलन के मौक़े पर प्रकाशित की गई है. संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र के उच्चस्तरीय सप्ताह के दौरान पाँच उच्चस्तरीय आधिकारिक सम्मेलन हो रहे हैं, ये भी उनमें से एक है. 

संयुक्त राष्ट्र ने यूनिवर्सल हैल्थ कवरेज पर इस सम्मेलन को अभी तक की सबसे अहम राजनैतिक बैठक क़रार दिया है जिसमें संबंधित संगठनों के वरिष्ठ प्रतिनिधि शिरकत करेंगे.

इनमें बहुत से देशों की सरकारों के अध्यक्ष, सांसद, संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ अधिकारी, सिविल सोसायटी के सदस्य, कारोबारी लीडर्स और शिक्षाविद भी शामिल होंगे. 

स्वास्थ्य व टिकाऊ विकास

विश्व स्वास्थ्य संगठन यूनिवर्सल हैल्थ कवरेज के क्रिन्यान्वयन में सभी देशों को मदद मुहैया कराता है.

संगठन का मानना है कि स्वास्थ्य टिकाऊ विकास के लिए भी बहुत ज़रूरी है.

संगठन ने कीनिया के अनेक हिस्सों में यूएचसी के पायलट कार्यक्रम को लागू करवाने में सक्रिय रूप से काम किया है.

इन इलाक़ों में बहुत सी संचारी और ग़ैर-संचारी बीमारियाँ हैं, जनसंख्या की दर बहुत ज़्यादा है, जच्चा-बच्चा की मौतें भी भारी संख्या में होती हैं और सड़क दुर्घटनाओं में भी भारी संख्या में लोग घायल होते हैं.

इन पायलट कार्यक्रमों को लागू करने का मक़सद स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं में लागू शुल्क ढाँचे को ख़त्म करके स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाना है.

साथ ही सामाजिक स्वास्थ्य बीमा योजना भी शुरू की जाएगी. मकुएना नामक इलाक़े में तो स्थानीय निवासियों ने इस योजना को बहुत ख़ुशी-ख़ुशी अपना लिया है क्योंकि उन्हें अब स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अपनी जेब से धन का भुगतान नहीं करना पड़ेगा जिससे उन्हें बहुत राहत महसूस हो रही है.

अगर 2030 के विकास एजेंडा को अगर हासिल करना है तो यूनिवर्सल हैल्थ कवरेज पर भी जलवायु कार्रवाई की तरह से ही प्रगति को ज़रूरी माना जा रहा है.

इस एजेंडा को पृथ्वी ग्रह, लोगों और ख़शहाली के भविष्य के लिए संयुक्त राष्ट्र का ब्लूप्रिंट कहा जाता है.

टिकाऊ विकास का लक्ष्य संख्या-3 तमाम अंतरराष्ट्रीय समुदाय सभी उम्र के सभी लोगों के स्वास्थ्य और ख़ुशहाल रहन-सहन को बढ़ावा देने का आहवान करता है. 

जब 2015 में सभी देशों ने टिकाऊ विकास एजेंडा अपनाया था तो पूरी दुनिया में यूनिवर्सल हैल्थ कवरेज सुनिश्चित करना भी एक प्रमुख लक्ष्य बनाया गया था. 

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने रविवार को न्यूयॉर्क में वॉक द टॉक का भी आयोजन किया जिसमें पैदलचाल, दौड़ और चहलक़दमी के ज़रिए स्वास्थ्य को बढ़ावा दिया गया.

इसका मुख्य मक़सद लोगों की स्वस्थ जीवन शैली और जलवाय परिवर्तन पर ठोस कार्रवाई के बारे में भी जागरूकता बढ़ाना था.      

 

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