मरीज़ों के स्वास्थ्य की सुरक्षित देखभाल सर्वोपरि

17 सितम्बर 2019

असुरक्षित ढंग से मरीज़ों की देखरेख किए जाने की वजह से प्रति मिनट कम से कम पांच लोगों की मौत हो जाती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्यकर्मियों, नीत-निर्धारकों, स्वास्थ्य देखरेख के काम में जुटे लोगों से मरीज़ों की समुचित तरीक़े से देखभाल करने की पुकार लगाई है ताकि इलाज कराते समय ख़तरों की रोकथाम हो सके. मंगलवार, 17 सितंबर, को ‘मरीज़ सुरक्षा दिवस’ मनाया जा रहा है.

विश्व भर में पहली बार मनाए जा रहे ‘मरीज़ सुरक्षा दिवस’ की थीम “स्पीक अप फ़ॉर पेशेंट सेफ़्टी” यानी ‘मरीज़ की सुरक्षा के लिए आवाज़ उठाओ’ रखी गई है.  

इसके ज़रिए मरीज़ों की जान को होने वाले जोखिमों को कम करने और इलाज के समय होने वाली ग़लतियों, जैसे ग़लत दवाई दिया जाना जैसे मामलों की रोकथाम करने से है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक डॉक्टर टैड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने अपने संदेश में कहा कि स्वास्थ्य की देखरेख के समय किसी को भी नुक़सान नहीं पहुंचना चाहिए.

इसके बावजूद प्रति मिनट पांच मरीज़ों की मौत असुरक्षित ढंग से देखभाल किए जाने की वजह से हो जाती है.

“हमें मरीज़ों की सुरक्षा की संस्कृति चाहिए जो उनके साथ साझेदारी को बढ़ावा, ग़लतियों के बारे में बताने और उनसे सीखने को प्रोत्साहन और दोषारोपण-मुक्त माहौल का सृजन करे जहां स्वास्थ्यकर्मी सशक्त होकर और बेहतर प्रशिक्षण पाकर त्रुटियाँ कम कर सकें.”

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने शोध नतीजों के हवाले से कहा है कि दवाईयों को देते समय होने वाली ग़लतियों से प्रतिवर्ष 40 अरब डॉलर के बराबर रक़म का नुक़सान होता है.

अन्य चुनौतियों में स्वास्थ्य देखरेख के समय होने वाले संक्रमण, असुरक्षित ढंग से होने वाली सर्जरी, बीमारी का पता लगाने में होने वाली ग़लतियां और सेप्सिस (संक्रमण का घातक होना) है जिससे हर साल 50 लाख लोगों की मौत हो जाती है.

संगठन ने एक मुहिम शुरू की है जिसमें संदेश दिया जा रहा है कि गुणवत्तापरक ज़रूरी स्वास्थ्य सेवाओं में मरीज़ों की सुरक्षा उसका एक बुनियादी अंग है.

अपने स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां साझा करने और ज़रूरी सवाल पूछकर मरीज़ भी स्वास्थ्य की बेहतर ढंग से देखरेख की प्रक्रिया का हिस्सा बन सकते हैं.

चिकित्सा समुदाय से मरीज़ों की सुरक्षा की संस्कृति विकसित करने का अनुरोध किया गया है जिसमें ग़लतियों से सबक लेने और खुले माहौल में सभी स्तरों पर बातचीत को बढ़ावा देने को अहम बताया गया है.

इस प्रक्रिया में समुचित प्रशिक्षण को महत्वपूर्ण माना गया है और उसके साथ-साथ प्रक्रियाओं का सरलीकरण करना, मानक स्थापित करना और स्वच्छ व सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना आवश्यक होगा.

 

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