योरोप में स्वास्थ्य असमानता की खाई पाटने की चुनौती

11 सितम्बर 2019

योरोप में स्वस्थ जीवन को सर्वजन के लिए सुलभ बनाने की दिशा में प्रगति के बाद अब इन प्रयासों में एक ठहराव का सामना करना पड़ रहा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा मंगलवार को जारी एक नई रिपोर्ट बताती है कि समाज में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ सभी के लिए सुनिश्चित करने का स्पष्ट रास्ता होने के बावजूद एक ऐसी खाई बनी हुई है जिसे पाटना मुश्किल हो रहा है.

यह पहली बार है जब इस विषय पर कोई रिपोर्ट, The Health Equity Status Report, जारी की गई है.

रिपोर्ट के अनुसार विश्व स्वास्थ्य एजेंसी के योरोपीय क्षेत्र में 53 देशों में कई देश ऐसे हैं जहाँ ‘हेल्थ इक्विटी’ यानी स्वास्थ्य समानता के स्तर में या तो कोई बदलाव नहीं हुआ है या फिर यह और भी ज़्यादा ख़राब हुआ है.

असमानता दूर करने की दिशा में सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों के बावजूद ऐसा हो रहा है.

योरोप में यूएन एजेंसी की क्षेत्रीय निदेशक डॉक्टर सुज़ाना जकाबा ने बताया कि इन चुनौतियों को एक राष्ट्रीय सरकार के औसत जीवनकाल चार वर्षों में पूरा किया जा सकता है.

एक प्रेस बयान में उन्होंने कहा, “पहली बार जारी हेल्थ इक्विटी स्टेट्स रिपोर्ट ने सरकारों को ऐसे आंकड़े और साधन उपलब्ध कराए हैं जिनकी ज़रूरत उन्हें स्वास्थ्य असमानताओं का मुक़ाबला करने और कम समय में प्रत्यक्ष नतीजे हासिल करने के लिए होगी.”

यहां ‘हेल्थ इक्विटी’ से तात्पर्य लोगों के समूहों के बीच स्वास्थ्य से जुड़े विषयों में अनुचित और टाली जा सकने वाली भिन्नताओं को दूर करने से है.

इसका लक्ष्य सभी लोगों के लिए ऐसे अवसर प्रदान करना हैं जिनसे वे अपने बेहतर स्वास्थ्य की संभावनाएँ पूर्ण रूप से हासिल कर सकें.

रिपोर्ट में वे समुदायों भी रेखांकित किए गए हैं जिन पर स्वास्थ्य असमानता के दायरे में आने का ख़तरा मंडरा रहा है. स्वास्थ्य असमानता के पांच मुख्य कारक बताए गए हैं:

- आय असुरक्षा (35 फ़ीसदी)

- बदहाल परिस्थितियों में जीवन यापन (29 फ़ीसदी)

- अलगावपन और मदद मांगने में अनिच्छुकता (19 फ़ीसदी)

- गुणवत्तापरक सेवाओं तक पहुंच (10 फ़ीसदी)

- रोज़गार असुरक्षा

रिपोर्ट बताती है कि योरोपीय क्षेत्र में किस तरह सकारात्मक बदलाव लाते हुए स्वास्थ्य समानता हासिल की जा सकती है.

“इस प्रयास के ज़रिए हम टिकाऊ विकास लक्ष्य हासिल कर सकते हैं, विशेषकर 10वां लक्ष्य जो असमानता घटाने पर केंद्रित है. यही एक ऐसा लक्ष्य है जो हमारे क्षेत्र में बेहतर नहीं हो रहा है. ”

संयुक्त राष्ट्र महासभा में 23 सितंबर को सार्वभौमिक स्वास्थ्य पर एक उच्चस्तरीय बैठक का आयोजन किया जाएगा जिसमें राष्ट्राध्यक्ष, राजनैतिक और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े नेता, नीति-निर्माता और अन्य प्रतिनिधि सभी के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के इरादे से विमर्श में हिस्सा लेंगे.

रिपोर्ट की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

- वर्ष 2016 तक महिलाओं और पुरुषों की  जीवन प्रत्याशा में वृद्धि देखी गई, इसके बावजूद सामाजिक असमानताओं की वजह से महिलाओं की उम्र सात साल और पुरुषों की 15 साल तक कम हो सकती है - अगर वे वंचित समूहों से हों

- संपन्नता के नज़रिए से आख़िरी पायदान पर खड़े 20 फ़ीसदी लोगों को सबसे संपन्न 20 प्रतिशत लोगों की तुलना में दोगुना ऐसी बीमारियों से जूझना पड़ता है जिनसे उनका रोज़मर्रा का जीवन प्रभावित होता है

- आंकड़े दर्शाते हैं कि जिन महिलाओं की शिक्षा सबसे कम हुई है, उनका स्वास्थ्य शिक्षित महिलाओं की तुलना में ज़्यादा ख़राब रहता है

- सीमित संसाधन और ख़राब स्वास्थ्य का शिकार लोगों को ग़रीबी से पीड़ित होने, सामाजिक अलगाव, आज़ादी खो देने और स्वास्थ्य बिगड़ने का जोखिम झेलना पड़ता है

 

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