म्याँमार में सेना द्वारा बंधक बनाए गए लोगों के उत्पीड़न पर चिंता

3 सितम्बर 2019

म्याँमार की सेना द्वारा एक बंदी शिविर में रखे गए राखीन प्रांत के लोगों के उत्पीड़न और फिर उनकी मौत के आरोपों के बाद संयुक्त राष्ट्र के तीन स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने ये उत्पीड़न तुरंत रोके जाने का आहवान किया है. इन विशेषज्ञों ने साथ ही इन आरापों की 'निष्पक्ष व भरोसेमंद' जाँच कराने का भी आहवान किया है.

संयुक्त राष्ट्र के विशेष मानवाधिकार दूतों ने सोमवार को कहा, "लोगों को गुप्त रूप से बंदी बनाकर रखने का चलन तुरंत बंद होना चाहिए. बंदियों के क़ानूनी सहायता हासिल करने व न्याय पाने के अधिकार का हर क़ीमत पर सम्मान किया जाना चाहिए."

ऐसी ख़बरें हैं कि दिसंबर 2018 में उत्तरी राखीन और चिन प्रांत में सशस्त्र झड़पें शुरू होने के बाद से अनेक लोगों को बंदी बनाया गया है. यूएन मानवाधिकार विशेषज्ञों ने ज़ोर देकर कहा है कि "बंदियों के उत्पीड़न, उनके साथ अमानवीय बर्ताव, हिरासत में मौत और अराकान आर्मी से संबंध होने के इक़बालिया बयानों को सही मानने जैसे मामलों की भरोसेमंद और स्वतंत्र जाँच" होनी चाहिए.

विशेषज्ञों ने कहा, "इस तरह के उल्लंघनों के लिए ज़िम्मेदार सभी पक्षों को न्याय के कटघरे में लाना होगा. लोगों को बंदी बनाकर गुप्त रूप से रखे जाने पर हम बेहद चिंतित हैं जहाँ बंदी बनाए गए लोगों पर अराकान आर्मी नामक उग्रवादी गुट के साथ संबंध होने का आरोप लगाया जाता है."

मानवाधिकार विशेषज्ञों ने नाइंग आंग हतून के मामले की तरफ़ ध्यान दिलाया. उन्हें 8 से 21 अगस्त तक गुप्त रूप से बंदी बनाकर रखा गया और सैनिकों ने उन्हें तब तक बिजली के झटके दिए जब तक कि उन्होंने अराकान आर्मी के साथ संबंध होने की बात स्वीकार नहीं कर ली.

यूएन मानवाधिकार विशेषज्ञों ने कहा, "ये बहुत ज़रूरी है कि बंदी बनाकर रखे गए लोगों को बाहरी दुनिया के साथ संवाद कयाम करने की इजाज़त दी जाए, ख़ासतौर से उनके परिवारजनों और वकीलों के साथ. हम इसलिए बेहद चिंतित हैं कि गुप्त रूप से बंदी बनाकर रखने का चलन उत्पीड़न को बढ़ावा दे सकता है."

विशेषज्ञों ने इन ख़बरों पर भी गहरी चिंता जताई है जिनमें कहा गया है कि बंदी बनाकर रखे गए 12 लोगों को अराकान आर्मी से कथित संबंध होने के आरोप में हिरासत में ही मार दिया गया.

म्याँमार की सेना ने कहा है कि इन मौतों के मामलों की जाँच की जा रही है, जिस पर मानवाधिकार विशेषज्ञों ने इस जाँच के नतीजे सार्वजनिक करने और ज़िम्मेदारों की निशानदेही करने और उन्हें न्यायिक प्रक्रिया का सामना करने को कहा है. 

म्याँमार की सेना ने उत्तरी राखीन के बुथीदाउंग इलाक़े में नाइंग आंग हतून व 50 अन्य लोगों को 8 अगस्त को हिरासत में लिया था.  5 लोगों को अराकान आर्मी से संबंधित होने के संदेह में औपचारिक रूप से गिरफ़्तार किया गया था और उनका बाहरी दुनिया से कोई संपर्क नहीं होने दिया गया. 

13 अगस्त को उन्हें बुथीदाउंग अदालत में पेश किया गया और उन पर आतंकवाद निरोधक क़ानून - 2014 की धारा 50 (ए) के तहत आरोप निर्धारित किए गए. उनमें से चार को 27 अगस्त को रिहा कर दिया गया.

नाइंग आंग हतून के पिता ने 22 अगस्त को उनसे जेल में मुलाक़ात की थी. उन्होंने बताया कि उनके पुत्र नाइंग आंग के चेहरे पर गहरी चोटों के निशान थे, वो कुछ खा-पी नहीं सकते थे और उन्हें अपने सिर, छाती और पीठ में दर्द होने की शिकायत की थी.

एक सिविलियन अस्पताल में उनकी चिकित्सा इलाज किया गया जिसके बाद उन्हें तीन दिन के लिए सैनिक अस्पताल में पहुँचा दिया गया. आख़िर में उन्हें बंदीगृह पहुँचा दिया गया.  21 अगस्त को उन पर एक और अतिरिक्त आरोप लगा दिया गया.

यूएन मानवाधिकार विशेषज्ञों ने कहा, "इन आरोपों की ठोस जाँच होनी चाहिए कि नाइंग आंग हतून को प्रताड़ित किया गया, और उन्हें तुरंत सही इलाज की सुविधा प्रदान की जाए."

"उनके क़ानूनी सहायता और न्याय पाने के अधिकार का सम्मान किया जाए, और प्रताड़ना के परिणामस्वरूप अगर उन्होंने कोई इक़बालिया बयान दिया है तो उसे उनके ख़िलाफ़ सबूत के तौर पर इस्तेमाल करने से हटा दिया जाए. " 

यूएन के स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों का कहना था कि क्याऊक्यान गाँव में पाँच लोगों को गिरफ़्तार करके गुप्त स्थान पर रखना और उनका बाहरी दुनिया से संपर्क नहीं होने देना अपने आप में कोई अकेला मामला नहीं है. राखीन में बहुत से अन्य मामलों में लोगों और लड़कों पर भी आतंकवाद संबंधी आरोप लगाए गए हैं. 

दो साल पहले, अगस्त 2017 में मुख्य रूप से मुस्लिम रोहिंज्या लोगों के ख़िलाफ़ व्यापक हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघन के बाद लाखों लोग सुरक्षा के लिए भागकर बांग्लादेश पहुँचे थे. म्यामाँर की बौद्ध बहुल सरकार पर रोहिंज्या लोगों के ख़िलाफ़ ये अत्याचार करने के आरोप लगे थे. 

ये ताज़ा रिपोर्ट पेश करने वाले तीन यून मानावाधिकार विशेषज्ञ हैं --

यंगी ली, म्याँमार में मानवाधिकारों की स्थिति पर विशेष रैपोर्टेयर

ऐगनेस कैलामार्ड, ग़ैर-क़ानूनी और मनमाने तरीक़े से हत्याओं पर विशेष रैपोर्टेयर

नील्स मेलज़ेर, प्रताड़ना और अन्य क्रूर, अमानवीय व असम्मानजनक बर्ताव व दंड पर विशेष रैपोर्टेयर.

विशेष रैपोर्टेयर जिनीवा स्थित यूएन मानवाधिकार परिषद द्वारा विशिष्ट मानवाधिकार मुद्दों या किसी देश में किसी ख़ास स्थिति पर रिपोर्ट करने के लिए नियुक्त किए जाते हैं. उनकी हैसियत मानद होती है और वो संयुक्त राष्ट्र के कर्मचारी नहीं होते हैं और ना ही उनके काम के लिए उन्हें कोई वेतन मिलता है.

 

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