इबोला से मौतों का आंकड़ा चिंताजनक, रोकथाम के लिए निवेश पर ज़ोर

30 अगस्त 2019

कॉंगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) के पूर्वोत्तर हिस्से में वर्ष 2018 में इबोला वायरस नए सिरे से फैलना शुरू हुआ और तब से अब तक 850 बच्चे इस वायरस से संक्रमित हो चुके हैं. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने बताया है कि इनमें से 600 बच्चों की अब तक मौत हो चुकी है. डीआरसी के पड़ोसी देश युगांडा में एक नौ साल की बच्ची के इबोला से संक्रमित होने का नया मामला सामने आया है.

कुल मिलाकर इबोला के अब तक तीन हज़ार से ज़्यादा मामले सामने आए हैं और मृतकों का आंकड़ा दो हज़ार को पार कर चुका है. यूनीसेफ़ की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इतनी बड़ी संख्या में मौतें दर्शाती हैं कि बीमारी की रोकथाम के लिए प्रयासों को और तेज़ किए जाने की आवश्यकता है.

“जिस तरह से यह संख्या बढ़ रही है, यह याद रखा जाना अहम है कि हर मामले में किसी का बच्चा, बेटा या बेटी; एक मां, पिता, भाई या बहन पीड़ित है. हर एक मौत के बाद एक परिवार शोक में होता है और वायरस का शिकार बनने से भयभीत और चिंतित भी.”

इस बीच डीआरसी के पड़ोसी देश युगांडा में इबोला का एक नया मामला सामने आया है. डीआरसी से युगांडा जा रही एक नौ वर्षीय बच्ची को युगांडा में हुए परीक्षण में पॉज़िटिव पाया गया है और अब उसे उपचार के लिए वापस ले जाया गया है. सीमा पर चेकिंग के दौरान बच्ची की हालत काफ़ी ख़राब लग रही थी और फिर परीक्षण के बाद उसकी बीमारी का पता चला.

हाल के दिनों में इबोला पर क़ाबू पाने के प्रयासों में काफ़ी हद तक सफलता मिली है. यूनीसेफ़ का कहना है कि पहली बार ऐसा लग रहा है कि इबोला का उपचार और उसकी रोकथाम करने का तरीक़ा मिल गया है. कुछ मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि अब यह वायरस लाइलाज नहीं है और वैज्ञानिक शोध के ज़रिए इस बीमारी को नियंत्रण में लाना और पीड़ितों की जान बचाना संभव होता प्रतीत हो रहा है.

हालांकि यह स्पष्ट किया गया है कि अगर समय रहते संक्रमण का पता नहीं चल पाता या पीड़ित इलाज में डर की वजह से कोताही बरतते हैं तो फिर इस प्रगति से ज़्यादा फ़र्क नहीं पड़ेगा.

डीआरसी के पूर्वोत्तर क्षेत्र में इबोला उपचार केंद्रों पर हथियारबंद गुटों द्वारा कई हमले किए गए हैं. बहुत से स्थानीय लोग राहत एजेंसियों और स्वास्थ्यकर्मियों पर विश्वास नहीं है. घातक माहौल के साथ-साथ सामाजिक और राजनैतिक संकटों की वजह से इबोला के उपचार और रोकथाम में हुई प्रगति खटाई में पड़ सकती है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने जुलाई 2019 में इबोला को अंतरराष्ट्रीय चिंता वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित किया था. अगस्त 2018 के बाद सामने आए मामलों में बच्चे पहले की तुलना में ज़्यादा शिकार हो रहे हैं और इबोला उन पर वयस्कों की तुलना में अलग तरह से प्रभाव डालता है.

बच्चों की तात्कालिक और दीर्घकालीन ज़रूरतों को पूरा करने के लिए यूनीसेफ़ अपने साझेदार संगठनों के साथ मिलकर काम कर रहा है और हर क़दम पर उनका और उनके परिवार का ख़्याल रखने के लिए प्रयासरत है.

इन प्रयासों के तहत इबोला का जोखिम समझाने के लिए संपर्क और बातचीत, संक्रमण से बचने के लिए रास्तों, मनोवैज्ञानिक समर्थन, बेहतर पोषण से जुड़ी जानकारी साझा की जाती है.

यूनीसेफ़ के मुताबिक़ इबोला को फैलने देने से रोकने के लिए असाधारण ढंग से निवेश किए जाने की आवश्यकता है. 100 फ़ीसदी मामलों का उपचार किए जाने की आवश्यकता है और हर मामले में पीड़ित के संपर्क में आए लोगों का पता लगाने और उनकी देखरेख भी करनी होती है.

स्थानीय बच्चों और समुदायों की देखभाल के लिए 12 करोड़ डॉलर से ज़्यादा की धनराशि की आवश्यकता है लेकिन अब तक इसकी महज़ 31 प्रतिशत राशि का ही इंतज़ाम हो पाया है.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश शनिवार को इबोला प्रभावित इलाक़ों का दौरा कर रहे हैं जहां वह पीड़ितों और उनके परिजनों के प्रति एकजुटता का प्रदर्शन करेंगे.

 

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