आधे से ज़्यादा शरणार्थी बच्चे स्कूली शिक्षा से वंचित

30 अगस्त 2019

संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी जारी की है कि लाखों की संख्या में शरणार्थी बच्चों को शिक्षा नहीं मिल पा रही हैं जिससे बेहतर भविष्य की उनकी आशाएं धूमिल हो रही हैं. संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने शरणार्थियों को शरण देने वाले देशों से समावेशी नीतियां लागू की जाने की अपील की है ताकि शरणार्थी शिविरों में बदहाल हालात में जीवन गुज़ारने के बजाए बच्चे अपने भविष्य को संवार सकें.

यूएन शरणार्थी एजेंसी की नई रिपोर्ट 'Stepping Up' के अनुसार लगभग 71 लाख शरणार्थी बच्चों की उम्र स्कूल जाने की है लेकिन इनमें आधे से ज़्यादा बच्चे स्कूली पढ़ाई से वंचित हैं.

रिपोर्ट दर्शाती है कि बच्चों की उम्र बढ़ने के साथ उन वजहों को दूर कर पाना और कठिन हो जाता है जिन अवरोधों की वजह से उनकी पढ़ाई रूकी हुई है.

हर 10 शरणार्थी बच्चों में से सिर्फ़ छह ही प्राथमिक स्कूल जा पा रहे हैं जबकि वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा 90 फ़ीसदी है. माध्यमिक शिक्षा में हालात बदतर हैं और हर 10 में से सिर्फ़ दो शरणार्थी बच्चों को ही स्कूली शिक्षा मिल रही है. औसतन, विश्व में हर 10 में से आठ बच्चों को माध्यमिक शिक्षा की सुविधा हासिल है.

उच्चतर शिक्षा में यह रूझान और स्पष्ट हो जाता है और हर 100 शरणार्थी बच्चों में महज़ तीन बच्चे ही अपनी पढ़ाई जारी रख पाते हैं. वैश्विक स्तर पर यह औसत 37 प्रतिशत है.

यूएन एजेंसी की प्रवक्ता मलिसा फ़्लेंमिग ने जिनीवा में पत्रकारों को बताया कि यह सिर्फ़ दुखद ही नहीं बल्कि बेवकूफ़ी भी है.

“युद्धरत इलाक़ों से जान बचाकर भागने वाले शरणार्थियों में निवेश ना करना उन लोगों के भविष्य में निवेश ना करना है; वे लोग भावी शिक्षक, वास्तुकार, शांति स्थापित कराने वाले, कलाकार और राजनीतिज्ञ हो सकते हैं जिनकी प्रतिशोध के बजाए आपसी मेलमिलाप में दिलचस्पी हो.”

शरणार्थी एजेंसी की रिपोर्ट बताती है कि यह समस्या मुख्य तौर पर संसाधनों की कमी का दंश झेल रहे उन ग़रीब देशों में ज़्यादा देखने को मिलती है जहां हिंसक संघर्षों और प्राकृतिक आपदाओं के कारण विस्थापन का शिकार लोग शरण लेते हैं.

यूएन प्रवक्ता मलिसा फ़्लेमिंग ने बताया कि ग्रीस और बाल्कन क्षेत्र के कुछ देशों को छोड़कर योरोप के अधिकांश अमीर देशों में शरणार्थी बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा में जगह मिली है.

ग्रीस में शरणार्थियों और प्रवासियों की मुश्किलों को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि वहां हज़ारों की संख्या में लोग शरण की गुहार लगा रहे हैं जिनमें कई बच्चे हैं और अपने अभिभावकों से अलग हैं. ग्रीस प्रशासन की क्षमता कम होने की वजह से बहुत से बच्चों की शिक्षा तक पहुंच नहीं है और वे देश के कई हिस्सों में ख़तरनाक हालात में रहने के लिए मजबूर हैं.

रोहिंज़्या बच्चों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि लाख़ों बच्चों ने म्यांमार से बांग्लादेश में शरण ली है लेकिन बांग्लादेशी शिविरों में संसाधनों की कमी की वजह से उन्हें पढ़ाई में मुश्किलें पेश आ रही हैं.

सकारात्मक बदलाव संभव

हालांकि उन्होंने तुर्की के अनुकरणीय उदाहरण का स्वागत करते हुए कहा कि देश में शरणार्थी बच्चों को राष्ट्र भाषा सीखने के लिए मदद दी गई है जिससे उनका स्कूल जा पाना और आसान हो गया है.

मेक्सिको ने भी यूएन शरणार्थी एजेंसी के एक कार्यक्रम को अपना समर्थन दिया है जिससे शरणार्थियों को देश के उत्तरी हिस्से जाने में मदद मिली है जहां 100 फ़ीसदी शरणार्थी बच्चे स्कूल जा रहे है.

यूएन एजेंसी अफ़्रीका में 20 से ज़्यादा देशों के साथ मिलकर काम कर रही है ताकि शरणार्थियों के लिए शिक्षा के अवसरों का दायरा बढ़ाया जा सके. युगांडा, इथियोपिया और जिबूती जैसे देशों ने अपनी शिक्षा प्रणाली में परिवर्तन किए हैं जिससे शरणार्थी बच्चों की शिक्षा तक पहुंच संभव हुई है.

लातिन अमेरिका में पेरु और कोलंबिया में शिक्षा नीतियों की शिक्षा नीतियों की भी प्रशंसा की गई है जिसका लाभ वेनेज़्वेला के उन बच्चों को मिल रहा है जो पहचान-पत्रों के बग़ैर इन देशों में शरण लेते हैं.

माध्यमिक स्कूलों में शरणार्थी बच्चों को जगह ना मिल पाने की एक बड़ी वजह धन का अभाव है. इस समस्या से निपटने के लिए यूएन शरणार्थी एजेंसी ने सरकारों, निजी क्षेत्र, शिक्षा संगठनो और दानदातओं से अपील की है कि ताकि निवेश के ज़रिए शरणार्थियों के लिए शिक्षा उपलब्ध कराने के पारंपरिक तरीक़ों में बदलाव लाया जा सके.

पर्याप्त फंडिंग के ज़रिए यूएन एजेंसी का “Secondary School Initiative” स्कूलों का निर्माण करने, उन्हें बेहतर बनाने और शिक्षकों को प्रशिक्षित करने पर केंद्रित है. साथ ही शरणार्थी परिवारों को वित्तीय सहारा दिया जाएगा ताकि बच्चों को स्कूल भेजने का ख़र्चा उठाने में मदद मिल सके.

यूएन शरणार्थी एजेंसी की ओर से जारी अपील का एक प्रमुख उद्देश्य पढ़ाई-लिखाई के अनाधिकारिक केंद्रों से आगे जाकर ज़्यादा से ज़्यादा शरणार्थियों को राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली का हिस्सा बनाना है.

 

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