पश्चिम और मध्य अफ़्रीका में शिक्षा पर मंडराता ख़तरा

23 अगस्त 2019

स्कूलों, छात्रों और शिक्षकों पर बढ़ते हमलों और हिंसा की धमकियों से पैदा हो रहे चुनौतीपूर्ण हालात के बीच 19 लाख से ज़्यादा बच्चे पश्चिम और मध्य अफ़्रीका में स्कूलों में पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने शुक्रवार को अपनी एक नई रिपोर्ट में चिंता जताई है कि हिंसा प्रभावित इलाक़ों में शिक्षा का ढांचा ढह रहा है जिससे बच्चों की एक पीढ़ी का भविष्य बर्बाद होने की आशंका बढ़ रही है.

रिपोर्ट में जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार बुर्किना फ़ासो, कैमरून, चाड, मध्य अफ़्रीकी गणराज्य, कॉंगो लोकतांत्रिक गणराज्य, माली, निजेर और नाइजीरिया में व्याप्त असुरक्षा का ही नतीजा है कि जून 2019 तक 9,272 स्कूल बंद हो चुके हैं. वर्ष 2017 के अंत में सामने आए आंकड़ों की तुलना में यह संख्या तीन गुना है.

संयुक्त राष्ट्र के सद्भावना दूत मुज़ून अलमेलेहान ने जिनीवा में पत्रकारों को बताया कि “हिंसक संघर्ष की वजह से लगभग 20 लाख बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं, इसलिए यह कोई आसान संख्या नहीं है. उन चुनौतियों पर प्रकाश डालना अहम है ताकि उन लोगों के संघर्ष को बताया जा सके. उन्हें हमारी ज़रूरत है, उन्हें हमारा ध्यान चाहिए.”

यूनीसेफ़ की उपकार्यकारी निदेशक शार्लेट पेट्री गोर्नीट्ज़का ने चिंता जताते हुए कहा कि स्कूल बंद हो रहे हैं. “पिछले दो सालों में बंद होने वाले स्कूलों की संख्या तीन गुना हो गई है; असुरक्षा की वजह से नौ हज़ार स्कूलों पर हमला किया गया है.”

यूनीसेफ़ की रिपोर्ट में चेतावनी जारी की गई है कि जानबूझकर स्कूलों को निशाना बनाने की घटनाएं पूरे क्षेत्र में बढ़ रही हैं जिससे बच्चों के सीखने के अधिकार और भविष्य पर संकट पैदा हो गया है.

रिपोर्ट बताती है कि उत्तर-पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम कैमरूप में असुरक्षा फैलने से 4,400 स्कूलों को जबरन बंद कराया गया है. बुर्किना फ़ासो में दो हज़ार से अधिक स्कूल बंद हुए हैं और माली में ऐसे स्कूलों की संख्या 900 है. दोनों देशों में हिंसक घटनाओं की संख्या बढ़ रही है.

सीखने के वैकल्पिक अवसरों को सहारा देने के लिए यूनीसेफ़ स्थानीय शिक्षा विभागों के साथ मिलकर काम कर रहा है. इन प्रयासों के तहत सामुदायिक केंद्रों, रेडियो शिक्षा कार्यक्रमों, पढ़ाने व सीखने के लिए तकनीक और आस्था आधारित शिक्षा पहलों को संभव बनाया जा रहा है.

ख़तरनाक स्थानों पर काम करने वाले शिक्षकों को मदद मुहैया कराई जा रही है और हिंसा से पीड़ित बच्चों को मनोवैज्ञानिक सहायता भी उपलब्ध कराई गई है.

हिंसा प्रभावित इलाक़ों में शिक्षा के अवसरों में कमी आने से एक बड़ा ख़तरा बच्चों का चरमपंथी गुटों में भर्ती होना है. साथ ही उनकी जबरन शादी कराए जाने की भी आशंका होती है. 

यूनीसेफ़ और उसके साझेदार संगठनों ने सरकारों, सशस्त्र सेनाओं, हिंसक संघर्ष में शामिल पक्षों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से समन्वित प्रयासों की अपील की है ताकि स्कूलों, छात्रों, अध्यापकों पर हमलों को रोका जा सके.

 

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