मध्य पूर्व में 'संयम और सुलह-सफ़ाई की सख़्त ज़रूरत'

20 अगस्त 2019

संयुक्त राष्ट्र महासचिव की चीफ़ डी कैबिनेट मारिया लुइज़ा वॉयटी ने कहा है कि क्षेत्र में ख़तरनाक टकराव की स्थिति को टालने के लिए संयम और शांति के लिए गंभीर बातचीत बहुत ज़रूरी है, अगर इस टकराव को नहीं रोका गया तो इसके बेहद ख़तरनाक परिणाम हो सकते हैं जिनका क्षेत्र से बाहर भी गंभीर असर हो सकता है.

मारिया लुइज़ा वॉयटी ने मंगलवार को मध्य पूर्व क्षेत्र में ताज़ा हालात की जानकारी पर सुरक्षा परिषद को संबोधित करते हुए कहा कि मध्य पूर्व के अनेक देशों में बहुत ख़तरनाक और जटिल हालात बने हुए हैं जिनमें लंबे समय से चल रहे हिंसक संघर्ष, भूराजनैतिक तनाव, सरकार चलाने संबंधी मुद्दों और सामाजिक-आर्थिक विकास में भारी गिरावट की बहुत बड़ा भूमिका है.

उन्होंने हाल के समय में पारस की खाड़ी में हुए घटनाक्रम का ख़ासतौर पर ज़िक्र किया जिसमें ब्रिटेन का झंडा लगे एक जहाज़ को ईरान द्वारा रास्ता बदलने की घटना भी शामिल है.

अमरीकी और ईरानी ड्रोन को ध्वस्त किए जाने और तेल टैंकरों के साथ नौसैन्य सुरक्षा मुहैया कराने के ब्रिटेन का फ़ैसला भी प्रमुख रहे हैं.

मारिया लुइज़ा वॉयटी ने कहा कि पारस की खाड़ी में तनाव ख़तरनाक स्तर पर पहुँच चुका है और जल क्षेत्र में यातायात व आवागमन के अधिकारों और कर्तव्यों का अंतरराष्ट्रीय क़ानून के अनुसार सम्मान किया जाना चाहिए.

मारिया लुइज़ा वॉयटी ने ईरान परमाणु कार्यक्रम समझौते को संयुक्त राष्ट्र का समर्थन दोहराते हुए कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम मुद्दे पर यही एक मात्र अंतरराष्ट्रीय फ्रेमवर्क मौजूद है जिस पर सहमति बनी थी.

न्यायसंगत समाधान ज़रूरी

इसराइली-फ़लस्तीनी संघर्ष का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र के भविष्य के लिए एक ऐसा न्यायसंगत समाधान बहुत ज़रूरी है जो दोनों पक्षों को स्वीकार्य हो. संयुक्त राष्ट्र के शांति और सुरक्षा एजेंडा में ये सबसे लंबा चलने वाला मुद्दा है.

अवर महासचिव मारिया लुइज़ा वॉयटी ने ध्यान दिलाया कि इसराइल और फ़लस्तीन नामक दो राष्ट्रों के रूप में समाधान निकालने के लिए संयुक्त राष्ट्र हमेशा प्रयास करने को तैयार है. इस समाधान के तहत इसराइल और फ़लस्तीन लोकतांत्रिक देशों के रूप में साथ-साथ शांतिपूर्ण तरीक़े से एक रह सकेंगे. इसमें दोनों देशों की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त और सुरक्षित सीमाएँ निर्धारित होंगी.

2030 एजेंडा – संकट समाधान के लिए

महासचिव की चीफ़ डी कैबिनेट मारिया लुइज़ा वॉयटी ने कहा कि 2030 का टिकाऊ विकास एजेंडा संकटों का समाधान तलाश करने और संघर्षों को होने से पहले ही टालने के लिए भी बहुत प्रासंगिक है.

ग़ौरतलब है कि पृथ्वी की संरक्षा और सभी इंसानों के जीवन स्तर की गुणवत्ता बेहतर बनाने के लिए ये एजेंडा संयुक्त राष्ट्र का महत्वकांक्षी कार्यक्रम है जिस पर सक्रियता से काम चल रहा है.

संयुक्त राष्ट्र कि वरिष्ठ राजनयिक ने लैंगिक समानता पर ज़ोर देते हुए कहा कि मध्य पूर्व में इस मुद्दे पर हाल के समय में कुछ सुधार देखे गए हैं लेकिन समान अवसरों का मुद्दा अब भी बहुत सीमित है, जबकि लिंग आधारित हिंसा अब भी बहुत बड़े पैमाने पर होती है.

मारिया लुइज़ा वॉयटी ने अपनी बात इसी संदेश के साथ ख़त्म की जो संयुक्त राष्ट्र बहुत ज़ोर देकर कहता रहा है.

इनमें झगड़ों, संघर्षों और संकटों को होने से पहले ही टालने और बीचबचाव की कूटनीति अपनाने पर ज़ोर दिया गया है. साथ ही मानवीय सहायता मुहैया कराने और टिकाऊ विकास के प्रयासों को समर्थन देने पर भी ज़ोर दिया गया है.

 

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