यमन, वहाँ की जनता और क्षेत्र का ‘भविष्य दांव पर’

20 अगस्त 2019

यमन में संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने कहा है कि हिंसा से बदहाल यमन विघटन के ख़तरे का सामना कर रहा है और उसके पास गँवाने के लिए बहुत ज़्यादा समय नहीं बचा है. यमन में हाल के दिनों में हुई हिंसा और नई चुनौतियों के परिप्रेक्ष्य में उन्होंने कहा कि देश का भविष्य दांव पर लगा है और इसलिए शांति प्रयासों की सुस्त रफ़्तार को तेज़ किए जाने की आवश्यकता है.

यूएन के विशेष दूत ने एक महीने पहले सुरक्षा परिषद को बताया था कि देश में लंबे समय से चले आ रहे हिंसक संघर्ष में यमन एक अहम पड़ाव पर पहुंच गया है.

मंगलवार को जॉर्डन की राजधानी अम्मान से वीडियो लिंक के ज़रिए सुरक्षा परिषद को संबोधित करते हुए उन्होंने सदस्य देशों को बताया कि यमन में मौजूदा स्थिति इस रूप में जारी नहीं रह सकती.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यमन में गँवाने के लिए अब समय नहीं बचा है और यमन, यमनी जनता और क्षेत्र का भविष्य दांव पर लगा है.

उनका इशारा कभी एक साथ रहे अलगाववादियों और सरकार-समर्थित सुरक्षा बलों के बीच सिलसिलेवार झड़पों से था जिनमें बड़ी संख्या में आम नागरिकों की मौत हुई है और अनेक घायल हुए हैं.

संयुक्त राष्ट्र कई साल से सरकारी सुरक्षा बलों और हूती विद्रोहियों के बीच हिंसा रोकने के लिए प्रयासरत है लेकिन पूर्व सहयोगी रहे पक्षों के बीच लड़ाई से स्थिति और ज़्यादा जटिल हो गई है.

विशेष दूत ने अदन और अबयान में हालात का उल्लेख करते हुए सचेत किया कि यमन का विखंडन एक बड़ा और तात्कालिक ख़तरा बनकर उभर रहा है और इस वजह से शांति प्रक्रिया के लिए प्रयास पहले से कहीं ज़्यादा अहम हो गए हैं.

UN Photo/Loey Felipe
यूएन के विशेष दूत मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने सुरक्षा परिषद को यमन में हालात से अवगत कराया.

उन्होंने ध्यान दिलाते हुए कहा कि, “हिंसक संघर्ष से भरा हर दिन त्रासदी और विपदा को और ज़्यादा बढ़ाता है. कोई भी देश घरेलू हिंसा से पनपे दबाव को अनिश्चितकाल के लिए नहीं झेल सकता. यमन इंतज़ार नहीं कर सकता.”

हाल के दिनों में सरकार के दबदबे वाले शहर अदन में आपसी लड़ाई से संकेत मिल रहे हैं कि इस हिंसक संघर्ष को तत्काल शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त किए जाने की आवश्यकता है.

उन्होंने कहा है कि अलगाववादी ‘सदर्न ट्रांज़ीशनल काउंसिल’ द्वारा देश की संस्थाओं को ताक़त के ज़रिए हथियाए जाने के प्रयासों को स्वीकार नहीं किया जा सकता.

उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज़ में कहा कि राज्यसत्ता की संस्थाएं अगर और ज़्यादा कमज़ोर होती हैं तो लोगों के लिए दैनिक जीवन बदतर हो जाएगा. इससे यमन के सामाजिक ताने-बाने को क्षति पहुंचेगी और दक्षिणी इलाक़ों में भी हिंसा फैल जाएगी.

चरमपंथी गुटों की वजह से होने वाली हिंसा से अदन और उसके आसपास के इलाक़ों में सुरक्षा क्षेत्र पर असर पड़ने की आशंका है जिससे भविष्य में अस्थिरता फैल जाएगी.

साथ ही अदन में उत्तरी मूल के यमनी नागरिकों के उत्पीड़न की भी भर्त्सना की गई है जिसके मामले शारीरिक हिंसा, ज़बरदस्ती विस्थापन, आवाजाही की आज़ादी की मनाही और सरकारी अधिकारियों और समर्थकों को निशाना बनाए जाने के रूप में सामने आए हैं.

“इस परिषद के सदस्यों सहित मैं उन सभी सदस्यों का आभारी हूं जिन्होंने संयम और संवाद की अपील की है.”

सकारात्मक नतीजों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने बताया कि स्टॉकहोम समझौते के आठ महीने बाद हुदायदाह शहर में हूती विद्रोहियों और सरकार समर्थित सुरक्षा बलों में कोई बड़ा सैन्य अभियान नहीं हुआ है.

हुदायदाह और आसपास के इलाक़ों में हिंसा में कमी आई है और बंदरगाह के रास्ते मानवीय सहायता का पहुंचना जारी है जिससे वहां आम नागरिकों को राहत मिली है.

उनके मुताबिक़ ज़मीनी स्थिति तेज़ी से बदल रही है और सुरक्षा परिषद को प्रगति के लिए अवसरों को तत्काल अपने हाथों में लेना होगा.

मानवीय मामलों की सहायक महासचिव उर्सूला म्यूलर ने यमन में पीड़ा कम करने के लिए पांच मुख्य प्राथमिकताओं का ज़िक्र किया है.

इनमें अंतरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून का सम्मान; बेरोकटोक मानवीय सहायता सुनिश्चित करना; संयुक्त राष्ट्र कार्रवाई योजना के लिए फंडिंग उपलब्ध होना; और शांति के लिए तत्काल समाधान तलाश करना शामिल हैं.

 

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