कठिन परिस्थितियों में राहत प्रयासों में जुटी महिला सहायताकर्मियों को सम्मान

19 अगस्त 2019

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने ‘विश्व मानवीय दिवस 2019’ पर उन सभी महिला मानवीय सहायताकर्मियों को श्रृद्धांजलि दी है जो लाखों-करोड़ों ज़रूरतमंद महिलाओं, पुरुषों और बच्चों के जीवन में बड़ा बदलाव ला रही हैं. इस दिवस पर जारी अपने संदेश में उन्होंने अपील की है कि मानवीय काम में जुटे लोगों की अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों के तहत रक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए.

विश्व मानवीय दिवस सोमवार, 19 अगस्त को दसवीं बार आधिकारिक रूप से मनाया जा रहा है जिसके ज़रिए संयुक्त राष्ट्र उन लाख़ों मानवीय सहायताकर्मियों के योगदान को सम्मान दे रहा है जो विश्व के सबसे ख़तरनाक स्थानों पर संकटमय परिस्थितियों में रहने के लिए मजबूर लोगों के जीवन की रक्षा के लिए सहारा दे रहे हैं.

19 अगस्त 2003 को इराक़ की राजधानी बग़दाद में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय को एक आतंकवादी बम हमले में निशाना बनाया गया था जिसमें 22 लोगों की मौत हो गई थी. इस हमले में इराक़ में संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधि सर्जियो वियेरा डे मेलो भी मारे गए थे.

इस हमले के पांच साल बाद यूएन महासभा ने 19 अगस्त को हर साल विश्व मानवीय दिवस के रूप में मनाए जाने का प्रस्ताव पारित किया था.

वर्ष 2019 में विश्व मानवीय दिवस पर महिला सहायताकर्मियों के प्रयास रेखांकित किए जा रहे हैं जो ज़रूरतमंदों की मदद के लिए सबसे पहले पहुंचने वालों में शामिल होती हैं और सबसे आख़िर में लौटती हैं.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने अपने संदेश में ध्यान दिलाया कि, “संकट में फंसे आम लोगों की मदद करने से लेकर बीमारियों के फैलने के बाद हालात से निपटने तक, महिलाएं मानवीय कार्यों में अग्रिम मोर्चों पर जुटी हैं.”

“उनकी उपस्थिति से सहायता अभियानों का दायरा बढ़ता है जिससे वे ज़्यादा प्रभावी हो जाते हैं. साथ ही आपात स्थितियों में बढ़ने वाली लिंग आधारित हिंसा से मानवीय ढंग से निपटने के उपाय ज़्यादा बेहतर हो जाते हैं.” 

विश्व भर में ढाई लाख से ज़्यादा महिला सहायताकर्मी हैं जो कुल सहायतकर्मियों का 40 फ़ीसदी है. लेकिन मानवीय राहत के कार्य में जोखिम लगातार बढ़ रहे हैं.

मानवीय राहत प्रयासों में जुटे सहायताकर्मी ख़तरनाक हालात में काम करते हैं जहां उन्हें हमले में मारे जाने, घायल होने, हिरासत में लिए जाने या फिर अगवा कर लिए जाने का जोखिम रहता है.

अगस्त 2003 से अब तक 4,500 सहायताकर्मियों के साथ ऐसे मामले सामने आ चुके हैं. हर सप्ताह उन पर औसतन पांच हमले होते हैं.

महिला सहायताकर्मियों को विशेष रूप से लूटपाट, यौन हमलों और अन्य प्रकार की हिंसा के ख़तरे का सामना करना पड़ता है. 

संयुक्त राष्ट्र ने स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय क़ानून के तहत सभी मानवीय सहायताकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए.

“विश्व नेताओं और हिंसक संघर्षों में शामिल सभी पक्षों को यह सुनिश्चित करना होगा कि मानवीय काम में जुटे लोगों की अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों के तहत रक्षा की जाए.”

उन्होंने चिंता जताई कि अंतरराष्ट्रीय मानवीय और मानवाधिकार क़ानूनों का गंभीर हनन दुनिया में अब भी हो रहा है.

उन्होंने अनुरोध किया है कि ऐसे मामलों की जांच होनी चाहिए और दोषियों को सज़ा मिलनी चाहिए. 

संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों के प्रमुख मार्क लोकॉक ने बताया कि इस दिन हम मानवीय सहायता समुदाय में कुछ अद्भुत महिलाओं के संकल्प और लगन को रेखांकित कर रहे हैं.

“दुनिया में सबसे पीड़ित लोगों की मदद के लिए उनकी प्रतिबद्धता सराहनीय है, विशेषकर उन महिलाओं की जो अपने समुदाय में आपात स्थितियों में मदद के लिए सबसे पहले पहुंचती हैं.”

विश्व मानवीय दिवस 2019 पर होने वाले आयोजनों में संयुक्त राष्ट्र और उसके साझेदार संगठनों ने लोगों को पीड़ा से उबारने और जान बचाने के काम में जुटी महिलाओं को सम्मान देने के लिए वैश्विक स्तर पर एक मुहिम (#WomenHumanitarians) शुरू की है.

इस मुहिम के तहत 24 घंटे में 24 महिलाओं की कहानियाँ साझा की जा रही हैं जो विस्तृत और विविध क्षेत्रों में उनके मानवीय राहत प्रयासों को दर्शाती हैं.

उदाहरण के तौर पर, मध्य अफ़्रीकी गणराज्य में ज़रूरतमंदों तक भोजन पहुंचाने वाली एक ड्राइवर; सोमालिया में शरणार्थी महिलाओं और बच्चों को क़ानूनी सलाह देने वालीं एक महिला; और लाइबेरिया में तीन दशकों से महिलाओं और नवजात शिशुओं की देखभाल कर रही एक दाई जिनका नाम 800 बच्चियों को दिया गया है.

 

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