हिजाब की अनिवार्यता का विरोध करने वाली महिलाओं की रिहाई की अपील

16 अगस्त 2019

ईरान में हिजाब को अनिवार्य रूप से पहने जाने का आदेश कड़ाई से लागू किया जाता है और उसका विरोध करने वाली महिलाओं को दशकों लंबी जेल की सज़ा सुनाई जा रही है जिसकी संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने निंदा की है. हाल के दिनों में ईरान में महिलाधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले कार्यकर्ताओं के विरुद्ध कार्रवाई होने के मामले बढ़ने की रिपोर्टें मिली हैं.  

स्वतंत्र यूएन विशेषज्ञों ने शुक्रवार को एक बयान जारी महिलाओं की गिरफ़्तारी पर चिंता जताई है.

उन्होंने ईरानी प्रशासन से अनुरोध किया है कि दोषी पाए गए मामलों को निरस्त कर दिया जाना चाहिए और उन सभी मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को तत्काल रिहा किया जाना चाहिए जिन्हें महिलाधिकारों को बढ़ावा देने के आरोप में मनमाने ढंग से हिरासत में लिया गया.

साथ ही महिलाओं के अधिकारों -– विचारों और अभिव्यक्ति की आज़ादी, शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होने और भेदभाव न किए जाने -– का पूरा सम्मान किया जाना चाहिए.  

विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाधिकार कार्यकर्ताओं की गतिविधियों के लिए सम्मान और समर्थन व्यापक रूप से मानवाधिकारों को वास्तविक बनाने के लिए आवश्यक है.

मोज़गान केशावर्ज़ को 23 साल 6 महीने के लिए जेल की सज़ा सुनाई गई थी जबकि मोनीरेह अरबशाही और उनकी बेटी यसमान अर्यानी दोनों को 16-16 साल की सज़ा सुनाई गई.

तीनों महिलाओं को राष्ट्रीय सुरक्षा के विरुद्ध काम करने, राजसत्ता के ख़िलाफ़ दुष्प्रचार करने और नैतिक भ्रष्टाचार और वेश्यावृत्ति को बढ़ावा देने का दोषी क़रार दिया गया था.

ईरान में महिलाओं की निष्पक्ष सुनवाई ना होने के आरोपों पर चिंता.
UN Photo/Loey Felipe
ईरान में महिलाओं की निष्पक्ष सुनवाई ना होने के आरोपों पर चिंता.

इन तीनों महिलाओं पर कार्रवाई तब हुई जब एक ऑनलाइन वीडियो में दिखाया गया कि 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर तेहरान मेट्रो पर ये महिलाएं फूल बांट रही हैं.

वीडियो में तीनों महिलाओं ने हिजाब नहीं पहना हुआ है और वे महिलाओं के अपनी मर्ज़ी के कपड़े पहनने की आज़ादी के अधिकार का शांतिपूर्ण ढंग से समर्थन कर रही थी.

इस वीडियो के सामने आने के बाद महिलाओं को अप्रैल 2019 में हिरासत में ले लिया गया और फिर कई हफ़्तों के लिए गायब हो गईं. उनका अपने परिवार या मित्रों से कोई संपर्क नहीं हो पाया.

शुरुआती पूछताछ में इन महिलाओं को वकीलों से नहीं मिलने दिया गया और मुक़दमें की कार्रवाई के दौरान भी उनके प्रतिनिधियों को महिलाओं का पक्ष सामने रखने की अनुमति ना दिए जाने की रिपोर्टें आई.

इससे मानवाधिकार विशेषज्ञों में चिंता बढ़ गई क्योंकि महिलाओं का निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार प्रभावित हो रहा था.

बयान में कहा गया है कि ये महिलाएं सार्वभौमिक मानवाधिकारों की रक्षा के लिए काम कर रही हैं और ऐसे में इस दमनकारी क़ानून से अभिव्यक्ति की आज़ादी को अपराध बना देना, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार क़ानून के तहत ईरान के दायित्वों के अनुरूप नहीं है.

महिलाओं को इस आधार पर गिरफ़्तार किए जाने का यह पहला मामला नहीं है और इससे पहले भी महिलाओं के अधिकारों को बढ़ावा देने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े आरोपों के आधार पर हिरासत में लेने के बाद दोषी साबित किया जा चुका है.

न्यूज़ रिपोर्टों के अनुसार जनवरी 2018 से अब तक 32 लोग गिरफ़्तार हो चुके हैं और हिजाब को अनिवार्य रूप से पहने जाने का विरोध कर रहे 10 लोगों पर दोष साबित किया गया है.

ईरान में हाल के दिनों में महिलाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी के मामलों में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है.

इसके अलावा आधिकारिक रूप से एक चेतावनी जारी की गई है कि अनिवार्य रूप से हिजाब पहने जाने का विरोध करन वालों के ख़िलाफ़ राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े क़ानून के तहत कार्रवाई की जाएगी.

वहीं ईरान सरकार का कहना है कि तीन महिलाओं को नैतिकता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों के तहत गिरफ़्तार किया गया है.

जिनीवा स्थित संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद मानवाधिकार से जुड़े किसी एक विशेष मुद्दे या किसी देश में स्थिति पर रिपोर्ट के लिए ‘स्पेशल रैपोर्टियर’ और स्वतंत्र विशेषज्ञों को नियुक्त करती है. उनका पद मानद होता है और वे यूएन स्टाफ़ नहीं होते. उनके काम के लिए धन का भुगतान भी नहीं किया जाता है.

 

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