काबुल में हमले और चुनावी हिंसा की धमकियों पर क्षोभ

7 अगस्त 2019

अफ़गानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र मिशन (UNAMA) ने काबुल में तालिबान द्वारा हमला किए जाने और चुनाव प्रक्रिया में हिंसा की धमकियां देने पर गहरा क्षोभ ज़ाहिर किया है. बुधवार को हुए इस हमले में कम से कम 14 लोगों की मौत हुई है और 150 से ज़्यादा घायल हुए हैं. यूएन मिशन ने एक ट्वीट संदेश कहा है कि घनी आबादी वाले इलाक़ों में इस तरह के हमले बंद होने चाहिए.

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़ तालिबान ने काबुल के एक पुलिस स्टेशन पर हुए घातक बम हमले की ज़िम्मेदारी स्वीकार की है.

इससे पहले यूएन मिशन ने एक वक्तव्य जारी कर तालिबान द्वारा दी गई उन धमकियों पर चिंता ज़ाहिर की थी जिनमें अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति के चुनाव में शामिल लोगों को निशाना बनाने की धमकी दी गई.

पहली योजनाओं के अनुसार अफ़ग़ानिस्तान में चुनाव अप्रैल 2019 में होने थे लेकिन उन्हें फिर जुलाई के लिए स्थगित किया गया, और अब कार्यक्रम फिर बदला गया है जिसके बाद चुनाव अब 28 सितंबर को होना है.

बयान में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय मानवीय और मानवाधिकार क़ानून के अनुसार चुनावी प्रक्रिया नागरिक समाज की ज़िम्मेदारी है.

आम लोग, उम्मीदवार और चुनाव प्रक्रिया में शामिल कर्मचारी – यानी सभी नागरिकों के पास डर, धमकियों और हिंसा से मुक्त चुनाव प्रक्रिया के हर चरण में हिस्सा लेने का अधिकार है.  

यूएन मिशन ने तालिबान से आग्रह किया है कि चुनावों में हिस्सा ले रहे आम लोगों को धमकियां ना दी जाएँ और उन पर हमले भी नहीं होने चाहिए.

बयान में स्पष्टता से कहा गया है कि मतदान केंद्रों और चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा ले रहे लोगों पर हमले अंतरराष्ट्रीय क़ानून का हनन हैं और ऐसे अपराधों के लिए ज़िम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाएगी.

काबुल में हमले और तालिबान द्वारा चुनावों में हिंसा की धमकियां सामने आने से कुछ ही दिन पहले क़तर में अमेरिकी और तालिबान प्रतिनिधियों के बीच शांति वार्ता हुई थी.

दोनों पक्षों का कहना है कि किसी समझौते की दिशा में प्रगति हो रही है जिस पर सहमति के बाद अमेरिका अफ़ग़ानिस्तान से अपने सैनिक वापस बुला सकेगा.

 

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