शीत युद्ध दौर की परमाणु निरस्त्रीकरण संधि के ख़त्म होने पर गहरा खेद

5 अगस्त 2019

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने शीत युद्ध की परमाणु निरस्त्रीकरण संधि की समाप्ति पर गहरा खेद व्यक्त किया है. अमरीका और रूस के बीच इंटरमीडिएट रेंज न्यूक्लियर फ़ोर्सेज़ (आईएनएफ़) संधि शुक्रवार दो अगस्त को समाप्त हो गई. यह संधि 1987 में वजूद में आई थी.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता द्वारा जारी किए गए एक वक्तव्य में कहा गया है कि उन्होंने हमेशा ही इस पर ज़ोर दिया है कि अमरीका और रूस संघ अपने मतभेद इस संधि में किए गए प्रावधानों के तहत आपसी बातचीत के ज़रिए हल करने की कोशिश करें, लेकिन बेहद अफ़सोस की बात है कि दोनों देश ऐसा करने में नाकाम रहे हैं.

1987 में अमरीकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन और तत्कालीन सोवियत संघ के राष्ट्रपति मिख़ायल गोर्बाच्योफ़ ने आईएनएफ़ संधि पर हस्ताक्षर किए थे.

इस संधि में धरातल पर तैनात किए गए परमाणु मिसाइलों को ख़त्म करना और योरोप में मध्यम दूरी तक मार करने वाले हथियारों को नष्ट करने का प्रावधान था.

महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने ध्यान दिलाते हुए कहा कि मौजूदा दौर में ख़राब होते अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा वातावरण में ऐसे निरस्त्रीकरण समझौतों के वजूद पर ख़तरा मंडरा रहा है जिन पर अब से पहले के दौर में हथियारों के नियंत्रण के लिए सहमतियाँ हुई थीं. 

ये संधि 1 जून 1988 के वजूद में आई थी जिसने शीत युद्ध के दौर की हथियार दौड़ को ख़त्म करने और अंतरराष्ट्रीय रूप में शांति व स्थिरता क़ायम करने में अहम भूमिका निभाई, विशेष रूप में योरोप में.

इस संधि ने संघर्षों की आशंकाओं को कम करने, देशों के बीच आपसी भरोसा बढ़ाने और शीत युद्ध का ख़ात्मा करने में काफ़ी मदद की.

समाचारों के अनुसार अमरीका और रूस दोनों की इस संधि से बाहर हो गए हैं और दोनों ने ही इस संधि के ख़त्म हो जाने के लिए एक दूसरे को ज़िम्मेदार ठहराया है.

इसके बाद एक नई हथियार दौड़ शुरू हो जाने का ख़तरा पैदा हो गया है.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता द्वारा जारी वक्तव्य में कहा गया है, "महासचिव ने किसी भी तरह की अस्थिरता पैदा कर सकने वाली गतिविधियों से बचने औरअंतरराष्ट्रीय स्तर पर हथियारों पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए एक मिला-जुला रास्ता निकालने पर सहमति बनाने पर विशेष ज़ोर दिया."

वक्तव्य के अनुसार महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने रूस और अमरीका दोनों ही देशों का आहवान किया कि वो New START की समय सीमा बढ़ा दें और हथियार नियंत्रण के लिए दीगर उपायों के बारे में बातचीत शुरू करें.

 

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