माँ के दूध के अनगिनत फ़ायदे, फिर भी बेपरवाही

1 अगस्त 2019

इसमें ज़रा भी शक़ नहीं है कि माँ का दूध बच्चों के लिए बहुत से फ़ायदों वाला यानी अमृत समान होता है मगर दुनिया भर में माँ बनने वाली महिलाओं को नर्सिंग की समुचित सुविधाएँ मुहैया कराने वाली नीतियाँ मौजूद नहीं हैं, विशेष रूप में कामकाज के स्थानों पर. संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनीसेफ़) की अध्यक्ष हेनरिएटा फ़ोर ने बुधवार को कही.

यूनीसेफ़ की कार्यकारी निदेशक हेनरिएटा फ़ोर ने कहा, “बच्चों को माँ का दूध पिलाने के अनगिनत स्वास्थ्य, सामाजिक और आर्थिक फ़ायदे जच्चा-बच्चा दोनों को ही होते हैं और ये सच्चाई पूरी दुनिया में समझी और स्वीकार की जाती है.”

“लेकिन फिर भी दुनिया भर में लगभग 60 प्रतिशत शिशुओं को जन्म के पहले छह महीनों के दौरान माँ का दूध नहीं मिल पाता जबकि चिकित्सकों के अनुसार इन छह महीनों को दौरान शिशु को सिर्फ़ माँ का दूध ही पिलाना चाहिए.”

शिशुओं के लिए माँ के दूध के फ़ायदे व्यापक और बेमिसाल हैं, मसलन – ये शिशुओं और बच्चों के मस्तिष्क का स्वस्थ विकास करता है, शिशुओं को संक्रमणों से बचाता है, मोटापे और बीमारियों का ख़तरा कम करता है, स्वास्थ्य की देखभाल पर आने वाला ख़र्च कम करता है और महिलाओं के लिए ओवरी व छाती के केंसर से भी बचाने में मदद करता है.

हेनरिएटा फ़ोर का कहना था कि कामकाज के सभी स्थानों पर महिलाओं को अपना दूध अपने शिशुओं को पिलाने की सुविधा देने और वेतन सहित अभिभावक छुट्टियों का इंतज़ाम करने में ज़्यादा संसाधन निवेश करने होंगे. दुनिया भर में ब्रेस्टफ़ीडिंग की दर बढ़ाने के लिए ऐसा करना बहुत ज़रूरी है.

स्तनपान सप्ताह

दुनिया भर में शिशुओं को जन्म के पहले छह महीनों के दौरान माँ का दूध मिलने और बच्चों की समुचित देखभाल करने की ज़रूरत के बारे में जागरूता बढ़ाने के वास्ते हर वर्ष 1 से 7 अगस्त तक विश्व स्तनपान (ब्रेस्टफ़ीडिंग) सप्ताह मनाया जाता है.

इस वर्ष इस सप्ताह मनाए जाने के दौरान तथ्यों पर आधारित एक नया दस्तावेज़ भी जारी किया गया है जिसका नाम है – 2019 Global Breastfeeding Scorecard यानी स्तनपान पर 2019 का वैश्विक स्कोरकार्ड. इसमें अन्य तथ्यों के अलावा ये महत्वपूर्ण वास्तविकता बताई गई है कि वर्ष 2018 में हर 10 शिशुओं में से सिर्फ़ 4 को ही विशिष्ठ तौर पर माँ का दूध पिलाया गया. शहरी इलाक़ों के मुक़ाबले ग्रामीण इलाक़ों में शिशुओं को माँ का दूध पिलाए जाने की दर ज़्यादा थी.

कामकाज के स्थानों पर ब्रेस्टफ़ीडिंग 

यूनीसेफ़ की अनुशंसा के अनुसार कामकाज के स्थानों पर महिलाओं को अपने शिशुओं को अपना दूध पिलाने के लिए नियमित अंतराल पर विराम मिलना चाहिए. इनमें महिलाओं को ब्रेस्टफ़ीडिंग के लिए अनुकूल माहौल भी मुहैया कराना ज़रूरी है ताकि वो अपने शिशुओं को छह महीने तक बिना किसी बाधा के अपना दूध पिलाना जारी रख सकें. जन्म के पहले छह महीनों के बाद भी बच्चे की उम्र के अनुसार उन्हें माँ का दूध मिलता रहे, इसके लिए भी महिलाओं को अनुकूल वातावरण मुहैया कराना ज़रूरी है.

लेकिन अफ़सोस की बात है कि महिलाओं को समर्थन वाला माहौल नहीं मिल पाता है. दुनिया भर में कामकाज के स्थानों पर सिर्फ़ 40 फ़ीसदी महिलाओं को ही बुनियादी मातृत्व सुविधाएँ हासिल होती हैं. कुछ अफ्रीकी देशों में तो ब्रेस्टफ़ीडिंग जारी रखने के फ़ायदे सिर्फ़ 15 फ़ीसदी महिलाओं को ही मिल पाते हैं.  

वेतन सहित छुट्टियाँ

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के मातृत्व संरक्षा कन्वेंशन 2000 द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार महिलाओं को कम से कम 14 सप्ताहों की वेतन सहित मातृत्व छुट्टियाँ मिलनी चाहिए, सिफ़ारिश तो कम से कम 18 सप्ताहों की छुट्टियों की है. साथ ही कामकाज के स्थानों पर महिलाओं को ब्रेस्टफ़ीडिंग के लिए अनुकूल माहौल और सुविधाएँ भी उपलब्ध होनी चाहिए. इसके बावजूद दुनिया भर में सिर्फ़ 12 प्रतिशत देशों में ही महिलाओं को वेतन सहित मातृत्व छुट्टियाँ देते हैं.

परिवार अनुकूल नीतियों पर यूनीसेफ़ की ताज़ा रिपोर्ट कहती है कि दोनों अभिभावकों को मिश्रित रूप में बच्चों की देखभाल के लिए कम से कम छह महीनों की वेतन सहित छुट्टियाँ मिलनी चाहिए. इन छह महीनों में से 18 सप्ताह विशिष्ठ रूप से महिलाओं के लिए निर्धारित होनी चाहिए. सरकारों और कारोबारी कंपनियों को कम से कम नौ महीनों की छुट्टियों का प्रावधान करने पर काम करना चाहिए.

यूनीसेफ़ के अनुसार महिलाओं को ज़्यादा लंबे समय तक छुट्टियाँ मिलने का मतलब है कि वो ज़्यादा समय तक अपने बच्चों को स्तनपान करा सकेंगी.

यूनीसेफ़ का कहना है कि शिशु का अपना माँ के साथ त्वचा संपर्क में आने और स्तनपान करने से बच्चे में ऊर्जा का संचार होता है, और उसकी रोग प्रतिरोधी क्षमता विकसित होती है. माँ और बच्चे के बीच मज़बूत संबंधों की बुनियाद पड़ती है, माँ का दूध पिलाने की क्षमता बढ़ती है और इससे शिशु को बिना बाधा के माँ का दूध मिलने की संभावना बढ़ती है.

संगठन का कहना है कि शिशुओं के लिए माँ के दूध के फ़ायदे सिर्फ़ यहीं नहीं रुकते, शिशुओं के लिए अपनी माँ का दूध सिर्फ़ खाद्य पदार्थ भर नहीं है, बल्कि ये एक दवाई का भी काम करता है जिसमें बीमारियों का मुक़ाबला करने की क्षमता होती है. माँ का दूध बच्चों की ज़रूरतों के अनुसार काम करता है. जन्म के शुरूआती दिनों में माँ का दूध एंटीबॉडीज़ बनाने में सक्षम होता है जिससे बच्चों में बीमारियों और मौत से लड़ने की क्षमता विकसित होती है.

और भी ज़्यादा महत्वपूर्ण बात ये है कि माँ का दूध शिशुओं को भरपूर मात्रा में पिलाने से स्वास्थ्य ढाँचे पर लगभग 300 अरब डॉलर का बोझ कम होगा.

 

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